IIT कानपुर से निकला लड़का, माइक्रोसॉफ्ट- गूगल से की इंटर्नशिप, Meta में मिल गई 800 करोड़ की नौकरी

Published on 15 अग॰ 2026

जहां एक ओर पुराने नौकरी करने के तरीके बदल रहे हैं तो वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है. अब काम केवल बेहतरीन टूल्स बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि ऐसे लोगों को टीम में शामिल करना है, जो एआई को समझ सके जिसके लिए कंपनियां पानी की तरह पैसे बहा रही है. इस बीच भारतीय मूल के युवा ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र त्रपित बंसल को META से 800 करोड़ रुपये का ऑफर मिला है. कंपनी ने उन्हें अपनी नई एआई रिसर्च डिवीजन में शामिल किया है. उनकी सैलरी सुन कर कोई हैरान हो जा रहा है औरल लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर उनके पास ऐसा कौन सा स्किल है, जो उन्हें ऐसा पैकेज दिया जा रहा है. 

कहा से शुरू हुआ ये सफर? 

अब सवाल उठ रहा है कि आखिर उनका सफर कहां से शुरू हुआ? बता दें कि त्रपित बंसल ने साल 2007 से 2012 के बीच IIT कानपुर से मैथ्स एंड स्टैटिस्टिक्स में इंटीग्रेटेड की डिग्री हासिल की थी. जहां टेक फील्ड में जाने वाले ज्यादातर युवा कंप्यूटर साइंस चुनते हैं, लेकिन त्रपित ने मैथ्स और स्टैटिस्टिक्स को अपना ढाल बनाया. बता दें कि एआई और मशिन लर्निंग को समझने के लिए दो विषयों का होना बहुत जरूरी है. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के IISc की मशीन लर्निंग लैब में 2 साल तक रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर काम किया और मशीन लर्निंग के एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स को गहराई से समझा. 

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आगे की पढ़ाई के लिए चले गए अमेरिका 

इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए. त्रपित ने यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स और phd की डिग्री हासिल की है. अपनी डॉक्टरेट रिसर्च के दौरान उन्होंने नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), डीप लर्निंग और मेटा-लर्निंग जैसे विषयों को गहराई से समझा. इस दौरान त्रपित ने दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में रिसर्च इंटर्नशिप की. इसमें मेटा, गूगल,माइक्रोसॉफ्ट और OPEN AI का नाम शामिल है. 

OPEN AI  से लेकर मेटा का सफर 

साल 2022 में त्रपित OPEN AI की टेक्निकल टीम से जुड़े. उन्होंने एआई की दुनिया के दिग्गज रिसर्चर इल्या सुतस्केवर के साथ रीइन्फोर्समेंट लर्निंग और रीजनिंग पर बेस्ड एआई मॉडल डेवलप करने का काम किया. इसके बाद साल 2025 में वह मेटा चले गए. मेटा ने उन्हें अपनी नई एआई रिसर्च डिवीजन के लिए उन्हें बतौर फाउंडिंग रिसर्चर अपनी टीम में शामिल किया.

800 करोड़ का पैकेज 

आज के समय में जहां युवाओं को 25 हजार की नौकरी मिलना भी मुश्किल हो गया है, वहां त्रपित को 800 करोड़ रुपये का पैकेज मिला. हालांकि, इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत, असफलता और रिसर्च शामिल है.

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