पूर्व IAS अग्रवाल केस में 16 साल बाद खुलासा: 472 ग्रामीणों को थमाए थे कागजी शेयर, दिवालिया कंपनी के बहाने खपाए करोड़ों - Raipur News

Published on 8 अक्टू॰ 2026

रायपुर45 मिनट पहलेलेखक: मोहम्मद निजाम

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ईओडब्ल्यू- एंटी करप्शन ब्यूरो ने पूर्व आईएएस बीएल अग्रवाल के 16 साल पुराने जिस मामले को ‘कोई सबूत नहीं मिला’ कहकर अदालत में खात्मा (क्लोजर रिपोर्ट) दाखिल कर दी थी, उसी बंद फाइल में अब करोड़ों का मनी लॉन्ड्रिंग खेल सामने आया है। इससे जांच एजेंसी की पुरानी नीयत पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

2017 से फाइलों में दबे भ्रष्टाचार के इस केस की जांच अब दोबारा शुरू हुई तो खरोरा के 472 ग्रामीणों के बैंक खाते ही सबूत बनकर सामने आए। पूर्व में ईओडब्ल्यू ने जिन ग्रामीणों के खातों को ‘साधारण लेन-देन’ मानकर छोड़ दिया था वही पैसे खपाने का मॉडल था।

जिसके जरिये पूरे पैसे पूर्व आईएएस से जुड़ीं कंपनियों में चले गए। फिलहाल उन ग्रामीणों के बयान लिए जा रहे हैं जिनके खाते खुलवाकर उसमें पैसों का ट्रांजेक्शन किया गया था। ग्रामीणों के बयान और उनके खातों की जांच के दौरान ही करोड़ों का यह पूरा ‘शेयर घोटाला’ सामने आया है।

अब पता चला रहा है कि खरोरा इलाके के 472 गरीब-मजदूर ग्रामीणों के नाम पर बैंक में खाते खुलवाने के बाद उनमें करोड़ों रुपए ट्रांसफर किए गए। बाद में ग्रामीणों के खाते में ट्रांसफर किए गए उन्हीं पैसों से एक कंपनी के शेयर खरीदे गए और शेयर ग्रामीणों के नाम अलॉट किए गए।

बाद में रणनीति के तहत उस कंपनी को ‘दिवालिया’ घोषित कर दिया गया और कंपनी की संपत्ति व शेयर दूसरी कंपनी ने खरीद लिए। इससे ग्रामीणों के हाथ में मौजूद शेयर रातों-रात रद्दी के टुकड़े बन गए। जब जांच टीम ने इस दूसरी कंपनी के तार खंगाले, तो उसका लिंक पूर्व आईएएस से जुड़ रहा है।

यानी ग्रामीणों के खातों के जरिए करोड़ों रुपये घुमाए गए, कंपनी को कागजों में डुबाया गया और असल संपत्ति पूर्व आईएएस से जुड़ी कंपनी में पहुंच गई।

16 साल से अटकी थी जांच

2010 में आयकर छापे के बाद ईओडब्ल्यू-एंटी करप्शन ब्यूरो ने बीएल अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया। उनके घर और सभी संबंधित ठिकानों पर कई बार छापेमारी की। करीब 7 साल जांच के बाद 2017 में ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। ये तर्क दिया गया कि ‘ ग्रामीणों के खाते में पैसे अग्रवाल के हैं इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।

ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट पेश करने के कुछ समय बाद ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एंट्री मारी और अग्रवाल की करीब 27.86 करोड़ की संपत्तियां अटैच कर दीं। ईडी की इस कार्रवाई से बैकफुट पर आई ईओडब्ल्यू ने आनन-फानन में कोर्ट में अर्जी देकर अपनी खात्मा रिपोर्ट तो वापस ले ली, लेकिन जांच आगे बढ़ाने के बजाय फाइल को 8 साल के लिए ठंडे बस्ते (बस्ताबंद) में डाल दिया।

अब क्या हो रहा है: फिलहाल एसीबी-ईओडब्ल्यू की नई टीम खरोरा के उन ग्रामीणों को समन भेजकर बयान दर्ज कर रही है, जिनके नाम पर ये खाते खोले गए थे। अधिकांश ग्रामीणों को यह तक नहीं मालूम कि उनके नाम से करोड़ों के शेयर खरीदे और डुबाए गए थे। अधिकतर ग्रामीण तो 70-75 साल की उम्र पार कर चुके हैं। कुछ की मृत्यु हो चुकी है। उसके बाद भी एक-एक कड़ी को जोड़ा जा रहा है।

ये है पूरा मामला: 1988 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के पूर्व आईएएस अग्रवाल के घर 2010 में आईटी की रेड पड़ी। उनके घर व अन्य संबंधित ठिकानों से खरोरा के एक गांव के 472 ग्रामीणों के खाते मिले। घर में लाखों का सामान मिला। उसके बाद ईओडब्ल्यू-एंटी करप्शन ब्यूरो ने छापे मारे। लेकिन 2017 में भ्रष्टाचार के केस में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। उसके बाद ईडी ने छापा मारा। ईओडब्ल्यू ने क्लोजर रिपोर्ट वापस ले ली।

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