सत्य निकेतन हादसा: पुरानी बिल्डिंग, कमजोर फाउंडेशन और बेसमेंट में काम... 'Hostel Days' PG या मौत का इंतजाम?

Published on 6 सित॰ 2026

सत्य निकेतन हादसा: पुरानी बिल्डिंग, कमजोर फाउंडेशन और बेसमेंट में काम... 'Hostel Days' PG या मौत का इंतजाम?

सत्य निकेतन में हादसा.Image Credit source: PTI

साउथ-वेस्ट दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को अचानक जोरदार आवाज से आसपास की बिल्डिंगों में रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर भागे, तो देखा कि वहां पांच मंजिला PG हॉस्टल, ‘हॉस्टल डेज’, जहां कभी था, वहां मलबे का ढेर लगा हुआ है. यह इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के बीचों-बीच एक भीड़भाड़ वाली कॉलोनी है, जहां प्राइवेट स्टूडेंट हॉस्टल, खाने-पीने की जगहें और दुकानें हैं. बिल्डिंग गिरने के बाद, कई लोगों ने अपने नंगे हाथों और जो भी औजार मिले, उनसे मलबा हटाने की कोशिश की और तेजी से राहत और बचाव कार्य चल रहा है. हादसे में अबतक पांच लोगों की मौत हो चुकी है और 11 लोगों को बाहर निकाला गया है.

बता दें कि हॉस्टल डेज में बेसमेंट के साथ 5 मंजिला PG है. हर फ्लोर पर 4 रूम थे, हर रूम में 2 से 3 छात्र रहते थे. एक फ्लोर पर कम से कम 10 छात्र रहते थे. दूसरी मंजिल पर किचन और मेस भी था. दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई कॉलेज के छात्र इस पीजी में रहते थे. जानकारी के मुताबिक मोतीलाल नेहरू, वेंकेटश्वर कॉलेज समेत कई अन्य कॉलेज के छात्र इसमे रहते थे.

इसके अतिरिक्त इस पीजी में JMC कॉलेज, आत्मा राम कॉलेज, दिल्ली कॉलेज आर्ट्स एंड कॉमर्स,गार्गी कॉलेज, मैत्री कॉलेज, रामलाल आनंद कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज के छात्र भी रहते थे.

बेंसमेंट में चल रहा था कंस्ट्र्क्शन का काम

दिल्ली पुलिस में काम करने वाले लोकल रहने वाले राजेन छेत्री ने बताया कि बिल्डिंग में करीब 15 कमरे थे, हर कमरे में दो से तीन स्टूडेंट रहते थे, और बेसमेंट में रिपेयर या कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. छेत्री ने कहा, “यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं. वे हर बेड के लिए करीब 12,000 रुपये दे रहे थे.” उन्होंने कहा, “मैं पिछले 20 सालों से यहां रह रहा हूं. बेसमेंट में कुछ कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था, जहां पानी जमा होने लगा था. फाउंडेशन भी बहुत कमजोर था.”

#WATCH | Delhi: Search and rescue operations are underway on a war footing in South Delhi’s Satya Niketan area following the collapse of a building.

Teams from the National Disaster Response Force (NDRF), Fire Service, Delhi Police and other agencies are working at the site to pic.twitter.com/FKwSOyY2pm

— ANI (@ANI) September 6, 2026

पुलिस ने बताया कि साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन पर दोपहर 1.34 बजे एक PCR कॉल आई, जिसके बाद आठ फायर टेंडर और कई रेस्क्यू टीमें मौके पर भेजी गईं. एक रहने वाले ने PTI को बताया, “हमें अपने घर में हल्का झटका महसूस हुआ. ऐसा लगा जैसे जमीन हिल गई हो, जैसे भूकंप आया हो. हम बाहर भागे.”

जोरदार धमाके के साथ बिल्डिंग गिर गई

उन्होंने दावा किया कि तुरंत कोई इंतजाम न होने पर, रहने वालों ने फंसे हुए लोगों को ढूंढने के लिए खुद ही भारी कंक्रीट स्लैब उठाने और मलबा हटाने शुरू कर दिए. वहां रहने वाले ने दावा किया कि बगल वाली बिल्डिंग भी खतरे में लग रही थी और थोड़ी झुकी हुई थी. एक और रहने वाले ने PTI को बताया कि लगभग 35 से 40 स्टूडेंट ऊपरी मंज़िलों पर रह रहे थे और उनमें से कुछ सो रहे थे जब बिल्डिंग गिरी.

#WATCH | Delhi | Satya Niketan building collapse | A person has been rescued alive from the debris and is being sent to the hospital via an ambulance.

Rescue operations underway. Further details awaited. pic.twitter.com/fmM7gMeS3T

— ANI (@ANI) September 6, 2026

उन्होंने दावा किया कि बेसमेंट में काम चल रहा था, उन्होंने कहा कि वह गिरने से कुछ मिनट पहले ही बाहर निकले और उन्हें चोटें आईं. उन्होंने कहा, “जैसे ही मैं बाहर आया, पूरी चीज गिर गई.” एक और रहने वाले ने कहा कि उनका भतीजा बिल्डिंग गिरने से कुछ देर पहले अपनी बाइक से बिल्डिंग पार करने के बाद बाल-बाल बच गया था. बिल्डिंग गिरने के तुरंत बाद जोरदार धमाके के साथ स्ट्रक्चर गिर गया. उन्होंने दावा किया कि यह घटना हुई, और उनके भतीजे ने कहा, “यह कुछ ही सेकंड की बात थी.”

रविवार होने की वजह से कई छात्र कॉलेज नहीं गए थे

उन्होंने कहा कि रविवार होने की वजह से कई स्टूडेंट कॉलेज नहीं गए थे और PG के अंदर थे. उन्होंने कहा, “कई घरों को लड़कों के PG में बदल दिया गया है, और मालिक कहीं और जा रहे हैं.” उन्होंने कहा, “वे बस प्रॉपर्टी को PG का नाम देते हैं, ऑनलाइन किराया लेते हैं और उन्हें चलने देते हैं. जो PG गिरा है वह 20 साल से ज्यादा पुराना है, और इतने सालों में, मैंने कोई मेंटेनेंस का काम होते नहीं देखा. पूरा सत्य निकेतन PG से भरा है, और मुश्किल से 30% घर के मालिक असल में यहां रहते हैं.” उन्होंने कहा, “यहां तक कि गटर और सीवर भी खुले हैं.”

एक और रहने वाले ने कहा कि इलाके की बिल्डिंग्स बहुत पुरानी थीं और उन्होंने ऐसी सभी प्रॉपर्टीज के स्ट्रक्चरल वेरिफिकेशन की मांग की. उन्होंने दावा किया कि रेजिडेंशियल इलाके में बेसमेंट वाली पांच मंजिला बिल्डिंग्स बनाई गई थीं, और सवाल उठाया कि क्या ऐसे स्ट्रक्चर्स को इजाजत दी जानी चाहिए थी.

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अंशुमन यादव

अंशुमन यादव

अंशुमन यादव के पास पत्रकारिता की दुनिया में दो दशक का अनुभव है. ज़मीनी रिपोर्टिंग से लेकर ब्रेकिंग न्यूज़ तक कवर करने में सक्षम. बरेली रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से वर्ष 2005 में मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2009 में सहारा समय न्यूज़ चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की. लगभग छह वर्षों तक सहारा समय में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद, वर्ष 2016 में इंडिया वॉयस न्यूज़ चैनल और फिर 2017 में देशबंधु ख़बर में अपनी सेवाएं दीं. साल 2019 से देश के प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल TV9 भारतवर्ष में सीनियर रिपोर्टर के तौर पर कार्यरत.

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