सत्य निकेतन हादसे पर HC सख्त, सिर्फ बिल्डिंग मालिक नहीं MCD भी जिम्मेदार? PG-हॉस्टलों को लेकर कोर्ट ने दिया बड़ा निर्देश

Published on 7 सित॰ 2026

Satya Niketan Accident: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG हॉस्टल के तौर पर चल रही इमारतों के गिरने और सात छात्रों की मौत के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ इमारत या PG मालिक की नहीं है, बल्कि निर्माण नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी MCD प्रशासन की भी है. मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी किया है.

यह जनहित याचिका सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुई इमारत गिरने की घटना के बाद दाखिल की गई थी. हादसे में PG हॉस्टल के तौर पर इस्तेमाल की जा रही दो इमारतें गिर गई थीं. बताया गया कि इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे. हादसे में अब तक सात छात्रों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं.

HC ने कहा- अधिकारियों को और गंभीरता से काम करना होगा

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया. कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को इस तरह के मामलों में अधिक गहराई और गंभीरता से काम करने की जरूरत है. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि ऐसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं और इनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है.

कोर्ट ने कहा कि सत्य निकेतन में गिरी इमारतों में दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रह रहे थे. अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को PG और किराए के मकानों में रहना पड़ता है.

DU से छात्रों और हॉस्टल का डेटा मांगा

हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से यह जानकारी मांगी है कि उसके कॉलेजों में बाहर से आने वाले कितने छात्र पढ़ते हैं और विश्वविद्यालय या उसके कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल संचालित किए जा रहे हैं.

अदालत ने MCD से यह भी पूछा कि PG चलाने को लेकर किस तरह के नियम लागू हैं. MCD को PG हॉस्टलों से जुड़े नियमों और उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है.

गिरी इमारतों की अनुमति की होगी जांच

हाई कोर्ट ने MCD के उच्चतम कार्यकारी स्तर पर यह जांच कराने का निर्देश दिया है कि सत्य निकेतन में गिरी दोनों इमारतों का निर्माण वैध अनुमति के तहत हुआ था या नहीं. अगर निर्माण बिना अनुमति के हुआ था तो अदालत ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा है.

कोर्ट ने यह भी पूछा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है. इसके साथ ही MCD को इलाके में चल रहे PG हॉस्टलों का ऑडिट करने और यह जांचने का निर्देश दिया गया है कि उनकी इमारतें संबंधित अनुमति और बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप हैं या नहीं.

PG हॉस्टलों की सुरक्षा जांच के आदेश

सुनवाई के दौरान अदालत ने PG में रहने वाले छात्रों की संख्या से जुड़ा डेटा भी मांगा. कोर्ट ने यह जानने की कोशिश की कि प्रशासन को किस तरह जानकारी मिलती है कि कोई फ्लैट या इमारत PG के तौर पर इस्तेमाल की जा रही है.

चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए केवल PG मालिक को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है. निर्माण नियमों का पालन करवाना और अवैध निर्माण पर कार्रवाई करना MCD प्रशासन की जिम्मेदारी भी है. कोर्ट ने कहा कि अगर संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सतर्क रहते तो संभव है कि इस तरह की त्रासदी को रोका जा सकता था.

मालिक गिरफ्तार, MCD के पांच अधिकारी सस्पेंड

सत्य निकेतन हादसे के मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उसे राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा है और दिल्ली लाकर उससे पूछताछ की जा रही है. हादसे के बाद पुलिस ने उसके पालम विहार स्थित आवास पर भी छापेमारी की थी, लेकिन उस समय वह वहां नहीं मिला था.

वहीं, मामले में MCD के पांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है. डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की मांग

याचिकाकर्ता अनिकेत कुमार गुप्ता ने हाई कोर्ट में मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है. इसके अलावा उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच और सत्य निकेतन समेत आसपास के सभी PG और हॉस्टलों की इमारतों का संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है.

मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी. कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट और ऑडिट से जुड़ी जानकारी मांगी है.