इस साल हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच कई तरह की जिज्ञासाएं हैं। खासतौर पर लोग जानना चाहते हैं कि क्या इन दोनों त्योहारों पर भद्रा काल रहेगा? अगर भद्रा होगी तो क्या पूजा या व्रत पारण पर इसका असर पड़ेगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल को कुछ शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, इसलिए पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में पंचांग देखकर समय का चयन किया जाता है।
साल 2026 में एक विशेष संयोग बन रहा है। हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएंगी। तृतीया और चतुर्थी तिथि के एक ही दिन आने के कारण यह स्थिति बनी है।
हरतालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, जबकि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और आराधना की जाती है।
क्या हरतालिका तीज पर रहेगी भद्रा?
पंचांग गणना के अनुसार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी के दिन भद्रा को लेकर अलग-अलग स्थानों के पंचांग में अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित माना जाता है।
मान्यता के अनुसार अगर पूजा के समय भद्रा हो तो शुभ कार्य को भद्रा समाप्त होने के बाद करना बेहतर माना जाता है।
हरतालिका तीज पूजा का शुभ समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह का समय शुभ माना गया है। कई पंचांगों में सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक पूजा का समय बताया गया है।
वहीं कुछ स्थानों पर स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा के समय में बदलाव हो सकता है।
गणेश चतुर्थी पूजा का समय
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। 2026 में गणेश चतुर्थी की पूजा के लिए दोपहर का समय शुभ माना गया है।
क्या पारण में भी भद्रा का असर होगा?
हरतालिका तीज का व्रत कई महिलाएं निर्जला रखती हैं। पारण यानी व्रत खोलने का समय तिथि, स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार तय किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- भद्रा समाप्त होने के बाद पारण करना शुभ माना जाता है।
- व्रत खोलने से पहले भगवान शिव-पार्वती की पूजा और प्रार्थना की जाती है।
- स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए व्रत रखने का निर्णय लेना चाहिए।
एक साथ दोनों त्योहारों की पूजा कैसे करें?
क्योंकि दोनों पर्व एक ही दिन हैं, इसलिए कई विद्वानों के अनुसार दोनों की पूजा अलग-अलग समय पर की जा सकती है।
- सुबह: हरतालिका तीज की पूजा
- दोपहर: गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना और पूजा
दोनों पर्वों के देवता अलग हैं, इसलिए पूजा क्रम को लेकर भक्त अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग का पालन कर सकते हैं।
नोट: भद्रा, पूजा मुहूर्त और पारण से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित हैं। अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार सही समय की पुष्टि करना बेहतर माना जाता है।