Haiwaan Film Review: क्यों देखें अक्षय कुमार-सैफ अली खान की 'हैवान'? यहां पढ़ें पूरा रिव्यू

Published on 11 सित॰ 2026

अक्षय कुमार और सैफ अली खान की नई फिल्म ‘हैवान’ सिर्फ 18 साल बाद की वापसी नहीं, बल्कि डार्क किरदारों, माइंड गेम और सस्पेंस से भरी एक अलग तरह की थ्रिलर है।

केमिस्ट्री से आगे जाती है। प्रियदर्शन ने दोनों सितारों को ऐसी कहानी में रखा है, जहां उनकी स्टार इमेज से ज्यादा किरदारों की बेचैनी और मानसिक जंग मायने रखती है। अक्षय का परशुराम रोल खामोश, रहस्यमयी और खतरनाक है, जबकि सैफ का श्याम किरदार अपनी कमजोरियों को ही हथियार बनाता है। दोनों के बीच चलने वाला खेल फिल्म को लगातार तनाव में रखता है। यही वजह है कि ‘हैवान’ एक पारंपरिक हीरो-विलेन मुकाबले के बजाय दिमाग और इंस्टिंक्ट की भिड़ंत बनकर सामने आती है।

क्या है ‘हैवान’ की कहानी?

फिल्म की कहानी परशुराम और श्याम के बीच बढ़ते संघर्ष पर टिकी है। यहां किसी मुकाबले का फैसला सिर्फ ताकत से नहीं होता, बल्कि हर कदम सोच-समझकर उठाना पड़ता है। परशुराम अपने इरादों को छिपाकर चलता है, वहीं नेत्रहीन श्याम अपनी बाकी इंद्रियों और इंस्टिंक्ट पर भरोसा करता है। कहानी सारी जानकारी एक साथ सामने रखने के बजाय धीरे-धीरे अपनी परतें खोलती है। इससे सस्पेंस बना रहता है और आगे क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं होता।

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‘हैवान’ की स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस कैसी है?

अक्षय कुमार ने परशुराम के किरदार में अपनी आम हीरो वाली छवि से हटकर काम किया है। उनकी खामोशी, एक्सप्रेशंस और बॉडी लैंग्वेज किरदार में रहस्य और खतरा पैदा करते हैं। सैफ अली खान ने श्याम को ओवरड्रामैटिक बनाने के बजाय सहज रखा है। उनका कंट्रोल्ड अभिनय किरदार की मजबूती बनता है। पहल चौधरी फिल्म में सरप्राइज देती हैं, जबकि सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर, बोमन ईरानी, शारिब हाशमी और दिवंगत असरानी कहानी को सपोर्ट करते हैं।

कैसा है ‘हैवान’ में प्रियदर्शन का डायरेक्शन?

प्रियदर्शन फिल्म को सिर्फ एक्शन-थ्रिलर बनने से बचाते हैं। उनका फोकस दोनों मुख्य किरदारों के बीच चल रही मानसिक जंग पर भी है। कई जगह बिना बड़े एक्शन के सिर्फ माहौल, खामोशी और किरदारों की प्रतिक्रिया से तनाव पैदा किया गया है। यही ट्रीटमेंट फिल्म को लगातार आगे बढ़ाता है।

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कैसा है ‘हैवान’ का म्यूजिक?

प्रीतम का संगीत कहानी के मूड के साथ चलता है और अलग से चिपका हुआ महसूस नहीं होता। ‘मेरे हीरो हैं’ भावनात्मक हिस्सों को सहारा देता है, जबकि ‘रंगियारा’ फिल्म के गंभीर माहौल में थोड़ा फ्रेशनेस लाता है। बैकग्राउंड स्कोर खासतौर पर तनाव वाले दृश्यों का असर बढ़ाता है।

टेक्नीकल फ्रंट पर कैसी है ‘हैवान’?

फिल्म की सबसे बड़ी तकनीकी ताकत उसका माहौल और सस्पेंस संभालने का तरीका है। दृश्यों की गति कहानी के तनाव के मुताबिक रखी गई है। लंबा रनटाइम होने के बावजूद फिल्म अपने मुख्य कॉन्फ्लिक्ट को ज्यादा देर तक बनाए रखती है। एक्शन, सस्पेंस और इमोशन को साथ लेकर चलने की कोशिश इसे कमर्शियल अपील देती है।

क्यों देखें ‘हैवान’?

अगर आपको ऐसे थ्रिलर पसंद हैं जिनमें सिर्फ मारधाड़ नहीं बल्कि माइंड गेम, रहस्य और लगातार बना तनाव हो, तो ‘हैवान’ देखी जा सकती है। अक्षय का डार्क अवतार और सैफ का कंट्रोल्ड अभिनय इसकी बड़ी वजह हैं। ‘हैवान’ अपनी स्टार जोड़ी को एक नए अंदाज में पेश करने वाली सस्पेंस-थ्रिलर है। हमारी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार।