15

Image Credit :
X
मलक्का का विकल्प बना ग्वादर, अब चीन के लिए क्यों मुश्किल?
Gwadar Port Crisis: चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को अरब सागर तक पहुंचने और मलक्का जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर बेहद उम्मीदों के साथ विकसित किया था। इसे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का सबसे अहम हिस्सा माना गया था। लेकिन एक दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद, यह प्रोजेक्ट बीजिंग के लिए फायदे की जगह एक भारी आर्थिक और रणनीतिक बोझ बन चुका है। ज़बरदस्त विद्रोह, कमर्शियल गतिविधियों की कमी और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों ने चीन की नींद उड़ा दी है।
Add Asianetnews Hindi as a Preferred Source
25
Image Credit :
X
Gwadar Port और CPEC: चीन की रणनीतिक उम्मीद
चीन का मूल प्लान अपने शिनजियांग प्रांत को ग्वादर से जोड़ने का था, ताकि व्यापार के लिए एक सुरक्षित जमीनी रास्ता मिल सके। हालांकि, भूगोल इसके आड़े आ रहा है। शिनजियांग से ग्वादर का रास्ता दुनिया के सबसे दुर्गम इलाकों से होकर गुजरता है। काराकोरम हाईवे को 4,600 मीटर से ज्यादा ऊंचाई और खतरनाक मौसम, भूस्खलन व हिमस्खलन का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारी मात्रा में कंटेनर ट्रैफिक और बड़े पैमाने पर समुद्री शिपिंग का विकल्प यह जमीनी रास्ता कतई नहीं बन सकता है।
35
Image Credit :
X
बलूच विद्रोह और सुरक्षा का बड़ा खतरा
ग्वादर पोर्ट पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा बलूचिस्तान के हालात से जुड़ा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य विद्रोही गुट लगातार चीनी हितों, इंजीनियरों और काफिलों को निशाना बना रहे हैं। BLA की मजीद ब्रिगेड अब पारंपरिक हमलों से आगे बढ़कर घातक आत्मघाती हमलों को अंजाम दे रही है। स्थिति यह है कि पाकिस्तान को चीनी कर्मियों की सुरक्षा के लिए भारी फौज तैनात करनी पड़ रही है, जिससे इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत बेहिसाब बढ़ चुकी है। 60 अरब डॉलर के इस निवेश पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
45
Image Credit :
X
Gwadar Port में कारोबार की रफ्तार क्यों धीमी?
किसी बड़े पोर्ट को सफल बनाने के लिए पर्याप्त कार्गो, शिपिंग कंपनियां और आसपास मजबूत औद्योगिक गतिविधि जरूरी होती है। Lowy analysis के मुताबिक ग्वादर में इन मोर्चों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। दुबई, सलालाह और कराची जैसे स्थापित क्षेत्रीय हब की तुलना में ग्वादर को पर्याप्त कार्गो आकर्षित करने में मुश्किल हो रही है। आसपास प्रस्तावित Special Economic Zones में भी गतिविधि उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है।
55
Image Credit :
X
कमर्शियल विफलता और मलक्का का विकल्प नहीं बन पाना
व्यापारिक नजरिए से भी ग्वादर पोर्ट अपनी क्षमता साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। दुबई, कराची और सलालाह जैसे स्थापित हब के मुकाबले ग्वादर में कमर्शियल एक्टिविटी न के बराबर है। इसके अलावा, जानकारों का मानना है कि ग्वादर कभी भी मलक्का जलडमरूमध्य का असली विकल्प नहीं बन सकता, क्योंकि हजारों किलोमीटर लंबे मुश्किल जमीनी रास्तों से तेल और सामान ढोना बहुत महंगा और जोखिम भरा सौदा है।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।