Ground Report: ‘मलबे में गुम हुए सपने…’, दिल्ली हादसे का आंखों देखा हाल, इन सवालों का जवाब ढूंढते छात्र

Published on 7 सित॰ 2026

Sep 08, 2026 12:06 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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संकरी गली में चारों तरफ फैला मलबा, मलबे को हटाते हुए आती क्रेन की आवाज और उस शोर में गुम होती लोगों की आवाज...दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद वहां ऐसा मंजर देखने को मिला।

Delhi Satya Niketan building collapse Ground Report

दिल्ली के मोती बाग के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर पांच मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर गिर गई।

Delhi Building Collapse: 'रेस्क्यू के दौरान मलबे में दबे एक छात्र को हमने निकाला। वो अपने स्टडी टेबल पर बैठा था और उसके सामने टेबल पर लैपटॉप रखा था। शायद वो पढ़ाई ही कर रहा होगा और उसी दौरान बिल्डिंग गिर गई होगी। उसे भागने तक का मौका नहीं मिला और वो हमें उसी हालत में मिला। रेस्क्यू के दौरान उसकी सांसें नहीं चल रही थी।', दिल्ली के सत्य निकेतन में रेस्क्यू कर रहे NDRF के एक अधिकारी ने ये बात मुझे बताई। हांलाकि उन्होंने खबर में अपना नाम ना लिखने की शर्त रखी। मेरे सामने सत्य निकेतन में हुए हादसे का शायद ये सबसे दर्दनाक मंजर उभरकर सामने आया।

थमी सात सासों की डोर

संकरी गली में चारों तरफ फैला मलबा, मलबे को हटाते हुए आती क्रेन की आवाज और उस शोर में गुम होती लोगों की आवाज...दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद वहां ऐसा मंजर देखने को मिला। साउथ दिल्ली के सत्यनिकेतन इलाके में रविवार को अपनी छुट्टी को दिन के दूसरे पहर में ले जाने की कोशिश ही कर रहे थे, तभी वहां एक बड़ा हादसा हुआ। जिस जगह पर कई छात्र रह रहे थो वो पलभर में मलबे में तब्दील हो गया। मोती बाग के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला मकान ताश की पत्तों की तरह ढह गया और कई जिंदगियां उसके नीचे दब गई। लोगों ने जबतक मलबा हटाया तब तक 7 सांसों की डोर थम गई थीं।

28 घंटे चल रेस्क्यू ऑपरेशन

बता दें कि मोती बाग के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर पांच मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर गिर गई। तेज आवाज के बाद आसपास के लोगों ने देखा तो चारों तरफ चीख-पुकार मची थी। करीब 28 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 18 लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। वहीं घायलों का इलाज अब भी दिल्ली एम्स में जारी है।

वहीं इस मामले में दिल्ली पुलिस ने उसके मालिक हरिराम गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा है और अब दिल्ली लेकर आ रही है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। वहीं, इस मामले में MCD के डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर समेत 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

डर और गुस्से में छात्र

रविवार को हुए हादसे के बाद पुलिस को तुरंत इस घटना की जानकारी दी गई। जानकारी मिलते ही एनडीआरएफ और पुलिस की टीम घटनास्थल पर तुरंत पहुंची। करीब 28 घंटे से ज्यादा समय तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। फिलहाल अभी भी हादसे वाली जगह से मलबा हटाने का काम जारी है। से बात करते हुए स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि, बेसमेंट में हो निर्माण कार्य और पानी लगने की वजह इमारत की बुनियाद कमजोर हो गई। इसके बाद हादसा हुआ।

दोस्त के भाई को मलबे से निकाला

हादसे वाली जगह पहुंचने के बाद मेरी मुलाकात सत्य निकेतन में ही रहने वाली छात्र लक्ष्मी राजपूत से होती है। हादसे वाली जगह से कुछ ही दूरी पर बनी एक पीजी में वो रहती हैं। हादसे के बारे में बात करते हुए लक्ष्मी बताती हैं कि, 'जिस पीजी की बिल्डिंग गिरी है वो बाहर से देखने पर काफी अच्छी थी और उसका किराया भी 16 हजार था। पर अंदर से उस इमारत की हालात खराब थी।' कुछ देर चुप रहने के बाद गुस्से भरी आवाज में वो कहती हैं कि, 'सरकार को हम छात्रों के बारे में जरूर सोचना चाहिए। पहले तो हॉस्टल नहीं मिलता और उसके बाद इतने महंगे पीजी। हम पढ़ने आते हैं और इनसरी चिंताओं में ही हमारे कई दिन निकल जाते हैं। पहले तो सरकार को इस इलाके में बनी सारी पीजी की अच्छे से जांच करनी चाहिए।' इतनी बातें कहने के बाद वो आगे चली जाती हैं।

हादसे वाली गली में थोड़ा आगे बढ़ने पर MCD की एक गाड़ी खड़ी दिखाई देती है। उसमें हादसे वाली इमारत का मलबा भरा था। मलबे में एक बैग साफ-साफ नजर आ रहा था। इस मंजर को देखते के बाद मेरी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से होती है जो उस हादसे के बाद लोगों की मदद करने पहुंचे थे। उस शख्स का नाम पवन था जो दिल्ली के मुनीरका से सत्यनिकेतन अपने दोस्त की मदद करने पहुंचे थे। उनके दोस्त का भाई उस मलबे की चपेट में आ गया था। अच्छी खबर ये रही कि उसकी जान बच गई। पवन ने बताया कि, इस बिल्डिंग के बगल वाली इमारत भी काफी जर्जर हो चुकी है और कभी भी गिर सकती है। फिलहाल प्रशासन ने उसे खाली करा लिया है पर मेरा सवाल है कि ये सारे काम पहले क्यों नहीं हुए। आखिर इन इमारतों को जर्जर हालात तो पहले से थे। इस सवाल के बाद वो मुझे उस जर्जर इमारत को दिखाने लगे।

इस बातचीत के दौरान ही हादसे वाली जगह अचानक पुलिसकर्मियों की हलचल होने लगी। पूछने पर पता चला की स्थित का जायजा लेने मुखमंत्री पहुंची हैं।