gorakhpur news: हर साल लाखों युवाओं के सपनों की सरेआम होती है नीलामी

Published on 25 अक्टू॰ 2026

गोरखपुर: गोरखपुर के कोचिंग हब की तंग गलियों से होकर गुजरने वाला रास्ता सिर्फ सरकारी नौकरी का नहीं, बल्कि अरबों रुपये के काले कारोबार के उस सिंडिकेट का भी है, जहां हर साल लाखों युवाओं के सपनों की सरेआम नीलामी होती है. यह कहानी सिर्फ कुछ पन्नों के लीक होने की नहीं है, बल्कि साख की मंडी में सपनों के सौदे की वो खौफनाक दास्तान है, जिसने पूर्वांचल के सबसे बड़े क्रेडिबिलिटी सेंटर को एक संगठित सिंडिकेट में बदल दिया है. इस इनसाइड स्टोरी में हम परत-दर-परत बेनकाब करेंगे उस क्रोनोलॉजी नेक्सस को, जिसके तार बड़े कोचिंग संचालकों, प्रिंटिंग प्रेस, हैकर्स और बिचौलियों से जुड़े हैं.

अरबों की हो चुकी इंडस्ट्री

गोरखपुर का छात्रसंघ चौराहा, गोलघर और असुरन आज पूर्वांचल के कोचिंग हब बन चुके हैं. यहां सालाना अरबों रुपये का टर्नओवर होता है. कोचिंग सेंटर्स का पूरा बिजनेस मॉडल रैंक पर टिका है. यदि एक संस्थान पांच टॉप रैंकर्स दिखा देता है तो अगले सत्र में उसके पास 5,000 से 10,000 नए छात्रों की भीड़ उमड़ती है. एक छात्र की सालाना फीस 50,000 से 1,500,000 तक होती है. इस आर्थिक साम्राज्य को बनाए रखने के लिए कुछ बड़े संस्थान किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. उनके लिए छात्र एक भविष्य नहीं, बल्कि एक विज्ञापनी पोस्टर हैं.

पेपर लीक की क्रोनोलॉजी

यह कोई एक दिन की चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित संगठित अपराध है. इसकी कड़ियां इस प्रकार काम करती हैं.

चरण 1: परीक्षा कराने वाली एजेंसी और प्रिंटिंग प्रेस के भीतर भेदियों (अधिकारियों) से संपर्क.

चरण 2: बड़े कोचिंग संचालक और कंसल्टेंसी माफिया द्वारा करोड़ों रुपये का एडवांस पेमेंट.

चरण 3: परीक्षा से 24-48 घंटे पहले पेपर लीक कर चुनिंदा स्कॉलर्स से उसे सॉल्व कराना.

चरण 4: गोरखपुर के होटल या सीक्रेट लोकेशंस पर चुनिंदा छात्रों को क्वेश्चन पेपर रटवाना.

चरण 5: परीक्षा के बाद संस्थान की ओर से शत-प्रतिशत सिलेक्शन का झूठा या मैनिपुलेटेड दावा.

जब तक परीक्षा कराने वाली बाहरी एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों का ऑडिट नहीं होगा, यह नेक्सस नहीं टूटेगा. पेपर लीक अब केवल सुरक्षा में चूक नहीं, बल्कि वाइट कॉलर क्राइम बन चुका है, जिसमें अधिकारी, प्रिंटिंग प्रेस और कोचिंग संचालक बराबर के हिस्सेदार हैं.

बाल मुकुंद चौरसिया, एक्स डीजे

नए सख्त कानूनों के बावजूद जमीनी स्तर पर सबूतों के अभाव या लोकल नेक्सस के कारण मुख्य सरगना बच निकलते हैं. कोचिंग संस्थानों के आर्थिक खातों की जब तक ईडी या स्पेशल टास्क फोर्स से गहन जांच नहीं होगी, तब तक इनके हौसले बुलंद रहेंगे.

मधुसूदन मणि त्रिपाठी, सदस्य, बार काउंसिल, उत्तर प्रदेश

परीक्षा केंद्र संचालक और परीक्षा लेने वाली एजेंसी के एजेंटों के साथ नामचीन कोचिंग संचालकों का बड़ा नेक्सस सफेदपोसो के संरक्षण में चल रहा है.

रवि पाठक, सयोंजक, ज्ञान ज्योति ट्रस्ट

नकल माफिया, बड़े नेता और अधिकारी के साथ कोचिंग और परीक्षा केंद्र वालों से साठगांठ करके पेपर लीक करवाते हैं. जब भी ऐसे मामले पकड़े जाते हैं ये बातें खुलती भी हैं. नीट पेपर लीक में भी एम्सकर्मी और बड़े डॉक्टर या मिनिस्टर के हाथ थे.

पवन द्विवेदी, वरिष्ठ शिक्षाविद एवं समाज सेवी

हम तीन साल से कमरे में बंद होकर दाल-चावल खाकर तैयारी कर रहे हैं. परीक्षा के दिन पता चलता है कि पेपर वाट्सएप पर बिक रहा था. कोचिंग वाले हमसे लाखों रुपये लेते हैं, लेकिन जब पेपर लीक होता है तो वे पल्ला झाड़ लेते हैं.

अभय त्रिपाठी, अधीनस्थ सेवा अभ्यर्थी

जब हम देखते हैं कि कुछ रईस बच्चे बिना पढ़े पेपर खरीदकर रैंक ले आते हैं और कोचिंग वाले उनकी फोटो बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर लगाते हैं तो पढ़ाई से भरोसा उठ जाता है. यह शिक्षा व्यवस्था का मर्डर है.

शालिनी, अभ्यर्थी

हम सिर्फ बच्चों को पढ़ाते हैं. अगर कोई छात्र हमारे यहां से पास होता है तो वह हमारी मेहनत है. पेपर लीक में कोई हाथ नहीं होता. कुछ असामाजिक तत्व कोचिंग इंडस्ट्री को बदनाम करने के लिए नाम का इस्तेमाल करते हैं.

शिवम् कश्यप, करियर काउंसलर

योगी सरकार का ब्रह्मास्त्र: अब पेपर लीक पर जिंदगी भर जेल, संपत्ति होगी कुर्क!

गोरखपुर: पेपर लीक और कोचिंग माफिया के गठजोड़ को जड़ से उखाड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने देश का सबसे कड़ा कानून लागू कर दिया है. इस नए अध्यादेश के तहत अब सॉल्वर गैंग से लेकर कोचिंग सेंटर्स तक के खिलाफ ऐसी सख्त कानूनी धाराएं लगेंगी, जिनसे बचना नामुमकिन होगा. सार्वजनिक परीक्षाओं जैसे UPPSC, UPSSSC, पुलिस भर्ती में गड़बड़ी पाए जाने पर दोषी सिंडिकेट या कोचिंग संस्थान पर एक करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जाएगा. यदि कोई गिरोह या परीक्षा एजेंसी पेपर लीक में शामिल पाई जाती है तो दोषियों को न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्राविधान है. परीक्षा में हुए पूरे वित्तीय नुकसान की भरपाई दोषी पाए गए कोचिंग संचालकों या माफिया की व्यक्तिगत संपत्तियों को कुर्क और नीलाम करके की जाएगी. यदि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ती है तो दोबारा परीक्षा कराने का जितना भी खर्च आएगा, वह पूरा खर्च उसी दोषी सिंडिकेट से वसूला जाएगा. इस कानून के तहत दर्ज होने वाले सभी मामले गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएंगे. अग्रिम जमानत का कोई मौका नहीं मिलेगा और मामले की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा.