ऑफिस में बार-बार 'ब्रो' बोलना और बिना जानकारी राय देना पड़ा भारी, Gen Z कलीग की हरकतों से हुआ कर्मचारी, Reddit पर बयां किया दर्द

Published on 9 अक्टू॰ 2026

ऑफिस में बार-बार ‘ब्रो’ बोलना और बिना जानकारी राय देना पड़ा भारी, Gen Z कलीग की हरकतों से हुआ कर्मचारी, Reddit पर बयां किया दर्द

Gen Z कर्मचारी की आदतों से तंग आया सहकर्मीImage Credit source: Getty Images

ऑफिस में अलग-अलग सोच और काम करने के तरीकों वाले लोगों के साथ काम करना कई बार मुश्किल हो जाता है. खासकर तब, जब किसी सहकर्मी का व्यवहार लगातार परेशान करने लगे. ऐसा ही एक मामला Reddit पर सामने आया है, जहां एक कर्मचारी ने अपने Gen Z कलीग की आदतों को लेकर जमकर भड़ास निकाली. कर्मचारी का कहना है कि उसका युवा सहकर्मी काम पर ध्यान देने के बजाय स्लैंग का ज्यादा इस्तेमाल करता है और उन मामलों में भी अपनी राय देने लगता है, जिनसे उसका सीधा लेना-देना नहीं होता.

Reddit के r/IndianWorkplace कम्युनिटी में ‘Rant against my Gen Z coworker’ शीर्षक से लिखी पोस्ट में कर्मचारी ने अपने ऑफिस के एक युवा सहकर्मी के बारे में कई बातें शेयर कीं. उसने बताया कि वह उसका मेंटर नहीं है, लेकिन शुरुआत में उसने उसके साथ काफी दोस्ताना व्यवहार रखा था. अब उसे लगता है कि उसके कलीग ने उसकी इस सहजता को कुछ ज्यादा ही हल्के में ले लिया.

काम में फोकस नहीं, हर बात में दखल!

कर्मचारी के मुताबिक, उसका Colleague सुबह ऑफिस आते ही ‘ब्रोव’, ‘ब्रव’ और ‘व्हाट्या डूइंग’ जैसे शब्दों से बातचीत शुरू कर देता है. उसे ‘ब्रो’ कहे जाने से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन बार-बार ऐसे स्लैंग का इस्तेमाल उसे चिढ़ाने लगा है. उसे यह भी लगता है कि सहकर्मी इन सवालों के जवाब सुनने में खास दिलचस्पी नहीं रखता और बस अपने अंदाज में अभिवादन करके आगे बढ़ जाता है. पोस्ट में कर्मचारी ने अपने कलीग के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए. उसका दावा है कि मैनेजर और मेंटर से कई बार फीडबैक मिलने के बावजूद यूथ कर्मचारी अपने काम में खास सुधार नहीं करता. इसके उलट, वह ऑफिस में ऐसे घूमता रहता है, जैसे वह उसका अपना घर हो. कर्मचारी को उसकी यह बेफिक्री भी खलती है.

 Gen Z Colleague Slang

सबसे ज्यादा परेशानी उसे तब होती है, जब उसका सहकर्मी बिना पूरी जानकारी के गंभीर मामलों में अपनी राय देने लगता है. कर्मचारी ने एक घटना का जिक्र किया, जब वह अपने मैनेजर के साथ एक एस्केलेशन यानी गंभीर वर्क इश्यू को संभाल रहा था. इसी दौरान युवा कलीग ने बीच में आकर पूछा कि क्या उन्होंने लॉग चेक किए हैं और क्या समस्या मालवेयर की वजह से हो सकती है. कर्मचारी को लगा कि ऐसे संवेदनशील समय पर बिना पूरी जानकारी के इस तरह के सवाल करना गैरजरूरी था. उसने यह भी कहा कि मैनेजर अपने इस कलीग के साथ काफी धैर्य रखते हैं और उसे सीधे टोकते नहीं हैं. यही नहीं, कर्मचारी ने अपने सहकर्मी की आवाज को लेकर भी शिकायत की. उसका दावा है कि वह अपनी आवाज को जानबूझकर भारी बनाने की कोशिश करता है, जिसके कारण उसकी बातें समझना मुश्किल हो जाता है.

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इस पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी और अपने एक्सपीरियंस भी शेयर किए. एक यूजर ने कहा कि उसने Gen Z के ऐसे युवा कर्मचारियों के साथ काम किया है, जो सीखने के लिए उत्सुक रहते हैं, जिम्मेदारी लेते हैं और अच्छा काम करते हैं. वहीं, कुछ ऐसे लोग भी मिले जो काम से बचते हैं और खुद को जरूरत से ज्यादा हकदार समझते हैं. एक अन्य यूजर ने बताया कि उसके एक जूनियर सहकर्मी ने उसके काम पर फीडबैक दिया था, जबकि वह उससे दो लेवल नीचे था. फीडबैक देने का तरीका उसे रूखा लगा, क्योंकि उसने फाइल सिर्फ रेफरेंस के लिए शेयर की थी.

Disclaimer: यह खबर वायरल सोशल मीडिया पोस्ट और नेटिजन्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इस पोस्ट में किए गए किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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