PHOTOS: 1975 में लाखों प्रदर्शनकारी संयमित थे, 2026 में Gen Z आंदोलन में कितना कुछ बदल गया?

Published on 10 अक्टू॰ 2026

Updated: Sat, 10 Oct 2026 03:32 PM (IST)

जेपी और अभिजीत दीपके आंदोलन को संबोधित करते हुए

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25 जून 1975 को इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में एक लाख लोग जुटे थे. रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से लोग कतारों में लगकर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे थे. न कहीं लाठीचार्ज हुआ, न कोई भगदड़ मची. अब, 51 साल बाद, CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली की सड़कों पर बड़ी-बड़ी कीलें और बैरिकेड लगाये गये हैं. तस्वीरों के जरिए जानते हैं कि मम्मी-पापा के दौर के आंदोलनों और Gen Z के आंदोलन में कितना फर्क है?

10 अक्टूबर को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले 250 से ज्यादा ट्रेनें रद्द कर दी गईं. CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में इमरजेंसी के दौरान भी ट्रेनों को रद्द नहीं किया गया था.

रांका के इस बयान ने लोगों के मन में इंदिरा इमरजेंसी और अब के राजनीतिक आंदोलनों की यादें ताजा हो गयीं हैं. ऐसे में रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘जनतंत्र का जन्म’ की पंक्तियां-‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ याद आती हैं.

ये वही पंक्तियां हैं, जिसने रामलीला मैदान में प्रदर्शनकारियों में इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ जोश भर दिया था. 2026 के आंदोलनों में भी प्रदर्शनकारियों ने गीतों के जरिए अपनी बात रखी. इस बार उनके होंठों पर रंग दे बसंती फिल्म का गाना- ‘खलबली है खलबली' था.

Gen Z ने 1970 के दशक के आंदोलनों को अपनी आंखों से नहीं देखा. इमरजेंसी के दौर की कहानियां उन्हें अपने मम्मी-पापा और किताबों के जरिए ही पता चलीं. लेकिन, उन कहानियों को याद करते ही आज भी आम-आवाम के जेहन में जयप्रकाश नारायण, रामलीला मैदान में उमड़ी भीड़ और हाथों में तख्तियां लिये प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें उभर आती हैं.

उम्मीद है कि राजनीतिक आंदोलनों के किस्से सुनकर आपके जेहन में भी कुछ कहानियां और किताबों में छपी तस्वीरें ताजा हो जाती होंगी.

तो आइए, आज दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के बहाने तस्वीरों के जरिए बीते 50 साल के दौरान बड़े राजनीतिक आंदोलनों की कहानी जानते हैं...

एक ओर 1975 के जेपी आंदोलन की तस्वीर है, तो दूसरी ओर 2026 के दिल्ली आंदोलन की. दोनों ही तस्वीरों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई करती नजर आ रही है. हालांकि, दोनों दौर में पुलिस की कार्रवाई के तौर-तरीकों में अंतर साफ-साफ दिखाई देता है.
एक ओर 1975 के जेपी आंदोलन की तस्वीर है, तो दूसरी ओर 2026 के दिल्ली आंदोलन की. दोनों ही तस्वीरों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई करती नजर आ रही है. हालांकि, दोनों दौर में पुलिस की कार्रवाई के तौर-तरीकों में अंतर साफ-साफ दिखाई देता है.
तस्वीर के पहले हिस्से में देखा जा सकता है कि 1975 में प्रदर्शन करने आये लोगों को रोकने के लिए पुलिस को बैरिकेडिंग नहीं करना पड़ा है. जबकि 2026 में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को जरूरत से ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है.
तस्वीर के पहले हिस्से में देखा जा सकता है कि 1975 में प्रदर्शन करने आये लोगों को रोकने के लिए पुलिस को बैरिकेडिंग नहीं करना पड़ा है. जबकि 2026 में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को जरूरत से ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है.
1975 में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारी अपने साथ जो पोस्टर लेकर आए हैं उसमें लिखा है- जनता का संदेश बताने, हम संसद तक आए हैं. जबकि 2026 में Gen Z अपने पोस्टर में लिख कर आ रहे हैं- ज्ञानेश इट्स डन ब्रो. पहले पोस्टर-बैनर का इस्तेमाल होता था. अब मीम कल्चर का जमाना है. मीम शेयर कर भावनाएं जाहिर करते हैं.
1975 में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारी अपने साथ जो पोस्टर लेकर आए हैं उसमें लिखा है- जनता का संदेश बताने, हम संसद तक आए हैं. जबकि 2026 में Gen Z अपने पोस्टर में लिख कर आ रहे हैं- ज्ञानेश इट्स डन ब्रो. पहले पोस्टर-बैनर का इस्तेमाल होता था. अब मीम कल्चर का जमाना है. मीम शेयर कर भावनाएं जाहिर करते हैं.
1975 में आंदोलन के दौरान रामलीला मैदान में लाखों की भीड़ संयम से लाइन में बैठी नजर आ रही है. जबकि 2026 Gen Z प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारी टीशर्ट खोलकर हवा में लहराते नजर आए. पहले प्रोटेस्ट पर काबू के लिए अखबारों पर रोक लगाया जाता था, अब इंटरनेट बैन किया जाता है.
1975 में आंदोलन के दौरान रामलीला मैदान में लाखों की भीड़ संयम से लाइन में बैठी नजर आ रही है. जबकि 2026 Gen Z प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारी टीशर्ट खोलकर हवा में लहराते नजर आए. पहले प्रोटेस्ट पर काबू के लिए अखबारों पर रोक लगाया जाता था, अब इंटरनेट बैन किया जाता है.
कुछ एक प्रदर्शनों को छोड़ दिया जाए, तो 50 साल पहले आंदोलन के दौरान हल्का बल प्रयोग से भीड़ तितर-बितर हो जाता था. अब प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोल भी कम पड़ जाते हैं.
कुछ एक प्रदर्शनों को छोड़ दिया जाए, तो 50 साल पहले आंदोलन के दौरान हल्का बल प्रयोग से भीड़ तितर-बितर हो जाता था. अब प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोल भी कम पड़ जाते हैं.
1975 में इमरजेंसी के खिलाफ सड़क पर उतरते ही कुछ इस तरह एमके स्टालीन को हिरासत में लिया गया था. जबकि 10 अक्टूबर 2026 को प्रोटेस्ट करने दिल्ली आ रहे दीपके और उनके साथियों को दिल्ली पुलिस ने फ्लाइट से ही हिरासत में ले लिया.
1975 में इमरजेंसी के खिलाफ सड़क पर उतरते ही कुछ इस तरह एमके स्टालीन को हिरासत में लिया गया था. जबकि 10 अक्टूबर 2026 को प्रोटेस्ट करने दिल्ली आ रहे दीपके और उनके साथियों को दिल्ली पुलिस ने फ्लाइट से ही हिरासत में ले लिया.

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