क्या अब नहीं बिकेंगी आपकी पसंदीदा ये रम और व्हिस्की? FSSAI ने लगाई रोक

Published on 4 अग॰ 2026

Artificial Flavors In Rum And Whiskey: अगर आप रम या व्हिस्की पीते हैं तो यह खबर आपके लिए अहम हो सकती है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अल्कोहलिक बेवरेज में एक जैसे या आर्टिफिशियल फ्लेवर के इस्तेमाल को लेकर अपना रुख साफ किया है. फूड रेगुलेटर ने नियमों का पालन नहीं करने वाले कुछ मैन्युफैक्चरर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. इसके साथ ही कई मशहूर रम और व्हिस्की की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है.

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, कई कंपनियां तय मानकों के अनुसार स्टैंडर्ड अल्कोहलिक बेवरेज का उत्पादन कर रही हैं. हालांकि कुछ मैन्युफैक्चरर्स ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिनकी अनुमति मौजूदा नियमों के तहत नहीं है. इन्हीं मामलों को लेकर रेगुलेटर ने कार्रवाई की है.

रम और व्हिस्की में क्यों मिलाया जा रहा फ्लेवर?

FSSAI के अनुसार, कुछ मैन्युफैक्चरर्स अपने अल्कोहलिक बेवरेज को मुख्य रूप से न्यूट्रल अल्कोहल या एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल से तैयार कर रहे हैं. इस तरह के अल्कोहल में उस ड्रिंक का प्राकृतिक और खास फ्लेवर मौजूद नहीं होता, जिसकी उम्मीद आमतौर पर रम या व्हिस्की जैसे स्टैंडर्ड अल्कोहलिक बेवरेज से की जाती है. इसके बाद ड्रिंक में वही स्वाद और खुशबू पैदा करने के लिए आइडेंटिकल या आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग पदार्थ मिलाए जा रहे हैं. आसान शब्दों में कहें तो रम या व्हिस्की का जो खास स्वाद उसकी उत्पादन प्रक्रिया और कच्चे माल से आना चाहिए, उसे कुछ मामलों में अलग से फ्लेवर डालकर तैयार किया जा रहा था.


FSSAI Alcohol Ban: क्या अब नहीं बिकेंगी आपकी पसंदीदा ये रम और व्हिस्की? FSSAI ने लगाई रोक

FSSAI ने क्या कहा?

फूड रेगुलेटर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई मान्यता प्राप्त मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस नहीं है, जिसमें रम का मूल स्वाद पैदा करने के लिए रम में अलग से रम फ्लेवर या व्हिस्की का स्वाद तैयार करने के लिए व्हिस्की में अलग से व्हिस्की फ्लेवर मिलाया जाता हो. FSSAI के मुताबिक, अल्कोहलिक बेवरेज के लिए बनाए गए मानकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनकी केमिकल कंपोजिशन उनके मूल कच्चे माल और उत्पादन प्रक्रिया के अनुरूप रहे.


FSSAI Alcohol Ban: क्या अब नहीं बिकेंगी आपकी पसंदीदा ये रम और व्हिस्की? FSSAI ने लगाई रोक

रेगुलेटर ने यह भी साफ किया है कि फूड बिजनेस ऐसी किसी सामग्री या एडिटिव का इस्तेमाल नहीं कर सकते, जिससे प्रोडक्ट को लेकर ग्राहक भ्रमित हो. यानी किसी स्टैंडर्ड रम या व्हिस्की की पहचान और उसके स्वाद को केवल अलग से फ्लेवर मिलाकर तैयार करना नियमों के दायरे में नहीं आता.

ओल्ड मॉन्क की इन तीन रम की बिक्री पर रोक

FSSAI की इस कार्रवाई के दायरे में कई जाने-माने ब्रांड आए हैं. नियामक ने मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर की खोपोली इकाई में तैयार की जाने वाली ओल्ड मॉन्क रम की तीन किस्मों की बिक्री पर रोक लगाई है. इनमें ओल्ड मॉन्क द लीजेंड, ओल्ड मॉन्क गोल्ड रिजर्व और ओल्ड मॉन्क XXX मैच्योर्ड रम शामिल हैं. इसके अलावा यूनाइटेड स्पिरिट्स की बारामती इकाई में तैयार होने वाली मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है.

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बैगपाइपर और ओल्ड कास्क भी लिस्ट में

FSSAI की कार्रवाई केवल ओल्ड मॉन्क और मैकडॉवेल्स तक सीमित नहीं है. मध्य प्रदेश में इनब्रू बेवरेजेज द्वारा तैयार की जाने वाली बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है. इसके अलावा मध्य प्रदेश में एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज द्वारा तैयार की जाने वाली सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड XXX रम भी कार्रवाई के दायरे में हैं.

एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज पर भी रोक

FSSAI ने मध्य प्रदेश में यूनाइटेड स्पिरिट्स द्वारा तैयार की जाने वाली एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की की बिक्री पर भी रोक लगाई है. इस तरह नियामक की कार्रवाई के दायरे में रम के साथ कई व्हिस्की भी आई हैं. हालांकि यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि FSSAI की कार्रवाई में संबंधित ब्रांड के साथ खास निर्माण इकाइयों में तैयार उत्पादों का जिक्र किया गया है.

Position of FSSAI on the use of identical flavours in Alcoholic Beverages pic.twitter.com/Uex8wYv9AL

— FSSAI (@fssaiindia) August 2, 2026

क्यों अहम है FSSAI की यह कार्रवाई?

FSSAI का पूरा जोर अल्कोहलिक बेवरेज की पहचान और उसकी वास्तविक बनावट को बनाए रखने पर है. अगर कोई ड्रिंक स्टैंडर्ड रम या व्हिस्की के नाम से बेची जा रही है तो उसकी खासियत केवल बाद में मिलाए गए आर्टिफिशियल या आइडेंटिकल फ्लेवर से तैयार नहीं की जानी चाहिए. रेगुलेटर का कहना है कि तय मानक इसलिए बनाए गए हैं ताकि अल्कोहलिक बेवरेज की केमिकल कंपोजिशन उसके कच्चे माल के मूल स्रोत के मुताबिक बनी रहे और ग्राहक को प्रोडक्ट की वास्तविक प्रकृति को लेकर गुमराह न किया जाए. फिलहाल FSSAI ने साफ किया है कि कई मैन्युफैक्चरर्स तय नियमों के मुताबिक ही स्टैंडर्ड अल्कोहलिक बेवरेज बना रहे हैं. कार्रवाई उन खास मैन्युफैक्चरर्स के खिलाफ शुरू की गई है, जहां गैर-अनुमत तरीके से आइडेंटिकल या आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है.

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