FII बिकवाल, शेयर बाजार में लंबी तेजी मुश्किल! इस साल 26 बिलियन डॉलर की भारी निकासी| Navbharat Live

Published on 2 अग॰ 2026

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सार

Share Market: ना सरकार की तरफ से कोई राहत और ना ही पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद। देश की आर्थिक गति मंद पड़ने का खतरा है। ऐसे में बाजार में तेजी का दौर चले, ऐसा कोई बड़ा ट्रिगर फिलहाल नहीं दिख रहा।

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कॉन्सेप्ट फोटो, (AI जेनरेटेड इमेज

विस्तार

FIIs In Share Market: ईरान-अमेरिका के बीच जारी लड़ाई और देश में राजनीतिक घमासान के चलते भारतीय शेयर बाजार हिचकोले खा रहा है। डेढ़ साल लंबी मंदी के बाद निचले स्तरों पर समर्थन मिलने से बाजार में फिर से तेजी का दौर चलने की उम्मीद तो बन रही है, लेकिन जिस तरह के हालात हैं, उसे देखते हुए निकट भविष्य में बड़ी तेजी आना मुश्किल दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि ना सरकार की तरफ से कोई राहत या प्रोत्साहन है और ना ही पश्चिम एशिया में शांति होती दिख रही है। ऊपर से क्रॉकरोच आंदोलन तथा राजनीतिक घमासान के कारण देश की आर्थिक गति मंद पड़ने का खतरा भी है।

ऐसे में बाजार में तेजी का दौर चले, ऐसा कोई बड़ा ट्रिगर फिलहाल दिख नहीं रहा है। हालांकि कुछ विश्लेषक यह कह रहे हैं कि दक्षिण कोरिया सहित अन्य वैश्विक बाजारों में एआई और सेमीकंडक्टर शेयरों में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब जो भारी गिरावट आ रही है, उससे विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार का कम वैल्यूएशन देख यहां निवेश बढ़ा सकते हैं, लेकिन इसकी संभावना कम ही है क्योंकि भारत में भारी टैक्स बोझ के कारण विदेशी निवेशक पहले से ही निगेटिव हैं।

अब तक 26 बिलियन डॉलर की निकासी

अब तक 2026 में भारतीय इक्विटी बाजार से विदेशी निवेशक कुल 26 बिलियन डॉलर निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई 18 बिलियन डॉलर की कुल निकासी से भी काफी अधिक है। हालांकि जुलाई में विदेशी निवेशकों ने 20,000 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है, लेकिन यह लिवाली आगे भी जारी रहेगी, इसमें शंका है।

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डबल टैक्सेशन से कराहता निवेशक

इस साल के बजट में बाजार के निवेशकों को उम्मीद थी कि वित्तमंत्री टैक्स बोझ में कुछ राहत देने की घोषणा करेंगी, लेकिन राहत देना तो दूर उल्टे शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगाए गए सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को वायदा सौदों पर 150% तक और बढ़ा दिया। इससे पहले शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स 15% से बढ़ाकर 20% और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दिया था। इस तरह एसटीटी डबल टैक्सेशन हुआ।

एक फरवरी को बजट में एसटीटी बढ़ाने की घोषणा से ही उस दिन मार्केट कैप 10 ट्रिलियन रुपये घट गया था। उसके बाद विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से बाजार में जो मंदी आई, उसमें मिडकैप-स्मॉलकैप से लेकर सेंसेक्स-निफ्टी में 10 से 14% की भंयकर गिरावट आई। मुख्य बेंचमार्क सेंसेक्स 82,720 से गिरता हुआ 2 अप्रैल को 71,545 अंक पर ही आ गया, जो विगत एक साल का न्यूनतम स्तर है। हालांकि उसके बाद निचले स्तरों पर वैल्यू बाइंग निकलने से बाजार में सुधार तो आ रहा है और सेंसेक्स फिर से 78,000 अंक पर आ गया है, लेकिन लंबी तेजी चलना कठिन लग रहा है।

ऊपरी स्तरों पर बिकवाली की आंशका

भारतीय बाजार में लंबी तेजी का दौर तभी चलता है, जब विदेशी निवेशक लिवाली मूड में आते हैं। हमेशा से यही देखा गया है कि भारतीय निवेशकों की लिवाली से बाजार को निचले स्तरों पर समर्थन तो मिलता है और ज्यादा गिरावट की आशंका नहीं रहती है, लेकिन लंबी तेजी नहीं चल पाती है। ऊपरी स्तरों पर बाजार टिक नहीं पाता है। यही वर्तमान में हो रहा है। यदि विदेशी निवेशक निगेटिव हैं तो ऊपरी स्तरों पर बिकवाली दबाव बना डालते हैं।

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विदेशी निवेशकों की प्रमुख भारतीय कंपनियों में बहुत बड़ी हिस्सेदारी है और उनकी लागत भी कम है। पिछले कुछ महीनों से विदेशी निवेशक भारत की बड़ी आईटी कंपनियों और निजी बैंक शेयरों में भारी बिकवाली कर रहे हैं। इसलिए जब तक विदेशी निवेशक फिर से लगातार लिवाली नहीं करेंगे, बाजार में ज्यादा तेजी आना मुश्किल है, ऊपरी स्तरों पर फिर बिकवाली कर सकते हैं। विदेशी निवेशक भारत के प्रति तभी पूरी तरह पॉजिटिव होंगे, जब सरकार टैक्स बोझ को कम करेगी और अभी वित्तमंत्री अपनी जिद पर अड़ी हुई हैं।

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