Explainer Puri Rath Yatra 2026: कल है बहुड़ा यात्रा... आज आड़प मंडप 'महावेदी' में होंगे भगवान के दर्शन, जानें एक संध्या दर्शन से कैसे धुल जाते हैं पाप?

Published on 23 जुल॰ 2026

Puri Rath Yatra 2026: (Bahuda Yatra 2026):पुरी में इन दिनों भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव मनाया जा रहा है. 16 जुलाई को श्रीगुंडिचा यात्रा हुई थी जिसे रथयात्रा भी कहते हैं. इसके 9 दिन के पश्चात बहुड़ा यात्रा होती है जिसमें भगवान कल अपनी मौसी के घर से विदा होकर दोबारा विशाल रथों पर सवार होंगे और घर यानी श्रीमंदिर लौटेंगे. श्रीमंदिर यानी पुरी में स्थित भगवान का जगन्नाथ मंदिर. बता दें कि प्रभु अपने भाई-बहनों के साथ जन्मवेदी यानी जहां उनका जन्म हुआ था श्रीगुंडिचा रानी का महल. वहां जाते हैं. ये उनका अपना घर माना जाता है. भगवान को यहां बालरूप में पूजा जाता है. कहते हैं कि भगवान अपनी माता समान मौसी के घर आते हैं इसलिए जगन्नाथ जी और उनके भाइ-बहन अपना बाल्यकाल यहां व्यतीत करते हैं. आज बहुड़ा यात्रा से एक दिन पहले संध्यादर्शन होंगे. इस संध्यादर्शन का बेहद खास महत्व होता है. चलिए जानते हैं इस बारे में.

संध्यादर्शन का महत्व क्या है?

संध्यादर्शन का पुरी में बेहद खास महत्व होता है. ओडिशा के हिंदुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा पर्व रथयात्रा माना जाता है. वहां के लोग भगवान जगन्नाथ को ही ईष्ट देव मानते हैं. पुरी सबसे बड़ा धार्मिक स्थल और चारधामों में से एक है. इसलिए, इस मंदिर की खास मान्यता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुंडिचा मंदिर में विराजमान महाप्रभु के दर्शन करना कितना शुभ माना जाता है? जी हां, कहते हैं कि जो भी मनुष्य भगवान जगन्नाथ के दर्शन इस मंदिर में करता है, उसे पुरी के जगन्नाथ मंदिर के 10 बार दर्शन करने से ज्यादा का फल मिलता है. 

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"आड़प मंडप" क्या होता है?

आड़प मंडप या आड़पा मंडप गुंडिचा मंदिर का गर्भगृह होता है. जब रथ यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा श्रीगुंडिचा मंदिर आते हैं तो इस गर्भगृह में ही विराजमान होते हैं. यह मंदिर पुरी के श्रीमंदिर से मात्र 3 किलोमीटर दूर होता है. नौ दिनों तक जब भगवान गुंडिचा मंदिर में रहते हैं तो भक्त विशेष रूप से यहां उनके दर्शन करने आते हैं. पुरी के मंदिर के प्रसाद से ज्यादा महत्व आड़प महाप्रसाद का होता है. आड़प प्रसाद ग्रहण करने से कई दर्शनों जितना पुण्य मिलता है.

आज होंगे भगवान जगन्नाथ के संध्यादर्शन

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के संध्या दर्शन करने से तीनों काल में भगवान के दर्शन जितना पुण्य मिलता है. आज नवमी तिथि है. इस तिथि पर दर्शन करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. स्कंद पुराण के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की दारु मूर्तियों के प्राकट्य के पश्चात महाराजा इंद्रद्युम्न ने प्रभु के दर्शन संध्या काल में ही किए थे. इसी प्रकार श्रीरामानंदाचार्य ने भी नवमी तिथि पर संध्या में भगवान के दर्शन किए थे. यहीं कारण है कि श्री गुंडिचा मंदिर में आड़प मंडप पर विराजमान प्रभु के दर्शन करना सौभाग्य कहलाता है. आज संध्य दर्शन के उपलक्ष्य में लाखों भक्त मंदिर पहुंच सकते हैं. क्योंकि इस जगह पर दर्शन करने के लिए अब भक्तों को अगले साल का इंतजार करना होगा.

बहुड़ा यात्रा 2026 कब होगी?

इस साल बहुड़ा यात्रा 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को होगी. इसका मतलब है कि कल बहुड़ा यात्रा निकाली जाएगी. आज संध्यादर्शन के पश्चात श्री गुंडिचा मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी ताकि अन्य पारंपरिक रस्में पूरी की जा सके. कल दोपहर में बहु़ड़ा यात्रा होगी. इस यात्रा में पुन: पहंडी बिजे किया जाता है. तीनों मूर्तियों और सुदर्शन चक्र को महावेदी से लाया जाता है और रथ पर सवार किया जाता है. इससे पहले राजा गजपति सोने की झाड़ू से सफाई करेंगे ताकि उस मार्ग से प्रभु निकल सके. इस अनुष्ठान को छेरा पहरा कहता है. इसके बाद शुभ मुहूर्त में तीनों रथों को चलाया जाएगा. 

'पोड़ा पीठा' का महत्व

बहुड़ा यात्रा की सबसे मीठी रस्म यहीं होती है. जब महाप्रभु अपने रथ की तरफ जाते है तो यात्रा का निशानी के रूप में माउसी मां उन्हें पोड़ा पीठा देती है. यह भगवान बलभद्र का प्रिय भोग माना जाता है. यह ओडिशा का एक प्रमुख व्यंजन भी कहलाता है. इसे बनाने के लिए चावल, नारियल, गुड़, घी और इलायची के साथ कुछ सुखे मेवे भी मिलाएं जाते हैं. रातभर इसे चुल्हें की आंच पर पकाया जाता है और अगले दिन यह बिल्कुल मुलायम हो जाता है. इस आतिथ्य को स्वीकार कर जगन्नाथ महाप्रभु वापस आते हैं.

Poda Pitha
Poda Pitha (पोड़ा पीठा)

बहुड़ा यात्रा के बाद होगा 'सुना बेशा'

बहुड़ा यात्रा के अगले दिन शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन यानी की इस साल 25 जुलाई 2026 को सुना बेशा की रस्म होगी. इस रस्म में तीनों रथों को मंदिर के सिंह द्वार पर रुकवाया जाता है. मंदिर में जाने से पहले महाप्रभु का सोने के आभूषणों से दर्शन होता है. इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्र को विशाल सोने के आभूषण पहनाएं जाते हैं. उन्हें सोने के हाथ-पैर, कुंडल, मुकुट, करधनी और कई चीजों पहनाई जाती है. इस रूप में प्रभु अद्भुत दिखाई देते हैं. सुना बेश में महाप्रभु को देखने के लिए लाखों भक्त आते हैं. 

suna besha 2026
suna besha 2026 Photograph: (suna besha 2026)

FAQs

प्रशन.1- बहुड़ा यात्रा 2026 कब है?

बहुड़ा यात्रा इस साल 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को निकाली जाएगी.

प्रशन.2-आड़प मंडप क्या होता है?

आड़प मंडप पुरी के श्रीगुंडिचा मंदिर का गर्भगृह होता है, जहां रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नौ दिनों तक विराजमान रहते हैं.

प्रशन.3- श्रीगुंडिचा मंदिर में दर्शन का विशेष महत्व क्यों माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीगुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने से पुरी के श्रीमंदिर में 10 वर्षों के दर्शन करने के बराबर पुण्य मिलता है.

प्रशन.4- रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के अलावा कौन आता है?

हर साल रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ सुदर्शन चक्र भी आते हैं. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)