Sep 03, 2026 09:06 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

मुख्य बातें
- EPF vs NPS: अगर 30 साल की उम्र से हर महीने ₹10,000 निवेश किया जाए और हर साल निवेश 5% बढ़ाया जाए, तो अनुमान के मुताबिक 60 साल की उम्र तक EPF में करीब ₹4.44 करोड़ और NPS में करीब ₹5.30 करोड़ का रिटायरमेंट कॉर्पस बन सकता है
- आइए इसका गणित समझते हैं

EPF vs NPS
रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करना हर नौकरीपेशा व्यक्ति की जरूरत है। इसके लिए EPF (Employees’ Provident Fund) और NPS (National Pension System) दो लोकप्रिय विकल्प हैं। अगर कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र से हर महीने ₹10,000 निवेश शुरू करता है और हर साल अपने निवेश में 5% की बढ़ोतरी करता है, तो 60 साल की उम्र तक दोनों योजनाओं में अच्छी-खासी रकम जमा हो सकती है। लेकिन सवाल है कि EPF और NPS में से कौन ज्यादा बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बना सकता है? दिए गए अनुमान के मुताबिक, NPS इस मुकाबले में आगे नजर आता है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।
EPF का रिटर्न
EPF की कैलकुलेशन के लिए माना गया है कि निवेशक की उम्र 30 साल है और वह 60 साल की उम्र में रिटायर होगा। उसका बेसिक वेतन और DA मिलाकर ₹83,333 प्रति माह है और कर्मचारी EPF में हर महीने ₹10,000 यानी 12% योगदान करता है। इसमें हर साल योगदान 5% बढ़ाया जाता है। कैलकुलेशन में EPF की ब्याज दर 8.25% सालाना मानी गई है और शुरुआत में EPF बैलेंस शून्य माना गया है। साथ ही नियोक्ता के योगदान का हिस्सा भी कैलकुलेशन में शामिल किया गया है। इन मान्यताओं के आधार पर 30 साल बाद EPF में करीब ₹4.44 करोड़ का अनुमानित कॉर्पस बन सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि EPF की ब्याज दर सरकार द्वारा समय-समय पर तय की जाती है और अगले 30 सालों तक 8.25% की दर बनी रहे, यह जरूरी नहीं है।
अब बात NPS की करें तो इसकी खासियत यह है कि इसका रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है। निवेशक अपने पैसे को इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज जैसे अलग-अलग एसेट क्लास में लगा सकता है। यहां दिए गए उदाहरण में एक्टिव चॉइस (Active Choice) के तहत 75% इक्विटी और 25% सरकारी बॉन्ड का विकल्प माना गया है। NPS ट्रस्ट के कैलकुलेटर के अनुसार अनुमानित 12.7% रिटर्न मानने पर 30 साल में कॉर्पस करीब ₹5.30 करोड़ पहुंच सकता है, यानी दिए गए अनुमान में NPS का कॉर्पस EPF से लगभग ₹86 लाख ज्यादा हो सकता है।
हालांकि, NPS में पूरी रकम रिटायरमेंट के समय एक साथ निकालना संभव नहीं होता। अनुमानित ₹5.30 करोड़ में से 60% यानी करीब ₹3.18 करोड़ एकमुश्त निकाले जा सकते हैं। बाकी 40% रकम से एन्युटी खरीदनी होती है। अगर एन्युटी पर करीब 6.75% सालाना रिटर्न माना जाए, तो इससे लगभग ₹1.19 लाख प्रति माह की पेंशन मिल सकती है। दूसरी तरफ EPF में जमा रकम पर घोषित ब्याज के अनुसार रिटायरमेंट फंड तैयार होता है।
इस तुलना से साफ है कि उच्च अनुमानित रिटर्न की वजह से NPS का संभावित कॉर्पस EPF से बड़ा दिखाई देता है, लेकिन NPS में बाजार का जोखिम भी होता है। वहीं EPF अपेक्षाकृत स्थिर और ब्याज-आधारित विकल्प है। इसलिए सिर्फ अनुमानित कॉर्पस देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता, टैक्स नियम, नौकरी की स्थिति और रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की जरूरत को ध्यान में रखकर EPF और NPS का चुनाव करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊपर की पूरी कैलकुलेशन अनुमान पर आधारित है।
डिस्क्लेमर- यह एक अनुमान है। वास्तविक रिटर्न और 30 साल बाद मिलने वाली रकम अलग हो सकती है।