रेपो रेट बढ़ा: होम लोन की EMI पर कितना असर? जानें बचने के स्मार्ट तरीके

Published on 10 अक्टू॰ 2026

Published: Saturday, October 10, 2026, 16:55 [IST]

7 अक्टूबर को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 25 बीपीएस (0.25%) की बढ़ोतरी कर दी। इसके 24 घंटे के भीतर ही बैंकों ने अपने रेपो-लिंक्ड बेंचमार्क बढ़ा दिए, जिससे होम लोन की EMI महंगी होने लगी है। इंडियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने 8 अक्टूबर से 25 बीपीएस बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। वहीं आईसीआईसीआई बैंक ने भी 8 अक्टूबर से 5.50 फीसदी रेपो रेट प्रभावी रूप से लागू कर दिया है।

कोई भी कदम उठाने से पहले अपने बैंक ऐप या सैंक्शन लेटर में लोन का बेंचमार्क चेक कर लें। अगर आपका लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क लैंडिंग रेट (EBLR) या रेपो-लिंक्ड लैंडिंग रेट (RLLR) से जुड़ा है, तो रेपो रेट में बदलाव का असर तुरंत दिखेगा। लेकिन अगर लोन मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लैंडिंग रेट (MCLR) पर है, तो इसका नियम अलग होता है। जैसे एचडीएफसी बैंक ने 7 अक्टूबर को MCLR में कटौती की थी, जिसका असर रेपो-लिंक्ड EMI पर नहीं पड़ता।

RBI Repo Rate Hike 2026: Impact on Home Loan EMI and Smart Ways to Manage Your Repayment Strategy

होम लोन EMI: 25 bps बढ़ोतरी का असर और आपके पास क्या हैं विकल्प

इसे एक उदाहरण से समझें: अगर ₹50 लाख का लोन 20 साल के लिए 8.50 फीसदी की दर पर था और वह बढ़कर 8.75 फीसदी हो जाता है, तो आपकी EMI ₹43,391 से बढ़कर ₹44,186 हो जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹794 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। अगर आप EMI पुरानी ही रखते हैं, तो लोन की अवधि (Tenure) करीब 13 महीने बढ़ जाएगी। अगर आपकी वित्तीय स्थिति इजाजत दे, तो EMI बढ़ाना ही समझदारी है, क्योंकि इससे कुल ब्याज में काफी बचत होती है। इसके अलावा, लिक्विडिटी बनाए रखते हुए पार्ट-प्रीपेमेंट का रास्ता चुनकर भी आप इस बढ़ोतरी के असर को बेअसर कर सकते हैं।

होम लोन EMI बनाम FD: 5, 10 और 15 साल का रिटर्न गणित

प्रोडक्ट/शर्तेंअवधिवार्षिक दर₹1,00,000 पर मैच्योरिटी रकम
FD (HDFC रिटेल)5 साल6.40%₹1,36,367
FD (HDFC रिटेल)10 साल6.15%₹1,81,635
FD (HDFC रिटेल)15 साल6.15%₹2,44,794

तुलना के लिए 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी एचडीएफसी बैंक रिटेल एफडी दरों का इस्तेमाल करें। आप बैंक ऐप में उपलब्ध कन्वर्जन सुविधा के जरिए स्प्रेड (Spread) समीक्षा का अनुरोध कर सकते हैं। इसके बाद ब्रेक-इवेन महीनों का हिसाब लगाएं: कुल लोन ट्रांसफर फीस को अपनी मंथली EMI बचत से भाग दें। उदाहरण के लिए, ₹30,000 की फीस और ₹1,268 की मासिक बचत का मतलब है कि लागत वसूल होने में करीब 24 महीने लगेंगे। आरबीआई के नियमों के अनुसार, फ्लोटिंग-रेट होम लोन पर बैंक कोई फोरक्लोजर पेनल्टी नहीं लगा सकते। इसलिए अपना केवाईसी, सैंक्शन लेटर, लोन स्टेटमेंट और फोरक्लोजर लेटर तैयार रखें।

अगर रेट रीसेट के बाद आपकी ब्याज दर बाजार दर से ज्यादा हो जाती है, तो रीफाइनेंस और पार्ट-प्रीपेमेंट के विकल्पों की तुलना करें। ऐसे फिक्स्ड-रेट लॉक-इन या टीजर रीसेट से बचें, जो बाद में आपको जाल में फंसा सकते हैं। जब तक बंडल इंश्योरेंस वाकई सस्ता और पोर्टेबल न हो, इसे लेने से मना कर दें। बैलेंस ट्रांसफर के मामले में, लीगल और वैल्यूएशन क्लीयरेंस मिलने के कुछ टी-डेज (T-days) के भीतर लोन राशि जारी कर दी जाती है। इस वीकेंड ही फैसला लें: अपना बेंचमार्क वेरिफाई करें, स्प्रेड रिव्यू की रिक्वेस्ट डालें और ब्रेक-इवेन का गणित लगाएं।

Story first published: Saturday, October 10, 2026, 16:55 [IST]

Other articles published on Oct 10, 2026