आरक्षण से लेकर E20 तक; CJP की सफलता के बाद मोदी सरकार के सामने खुला 'पैंडोरा बॉक्स'?

Published on 30 जुल॰ 2026

Jul 30, 2026 04:41 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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कॉकरोच जनता पार्टी के नीट को लेकर किए गए आंदोलन की सफलता के बाद सोशल मीडिया पर कई नए आंदोलन शुरू हो रहे हैं। इसमें प्रमुख रूप से आरक्षण विरोधी आंदोलन और पेट्रोल-डीजल में इथेनॉल ब्लैंडिंग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन प्रमुख हैं।

CJP Protest

हाथों में तिरंग लेकर लोकतंत्र का जश्न मनाते लोग

भारतीय राजनीति इन दिनों जेन-जी की तरफ देख रही है। संसद से लेकर सड़क तक हर तरफ इसी बात की चर्चा है कि कैसे मुख्य न्यायाधीश के एक बयान और फिर नीट पेपर लीक के मुद्दे ने जंतर मंतर पर भीड़ जुटा दी। फिर वह हुआ, जो पिछले एक दशक में नहीं हुआ। मोदी सरकार के एक मंत्री को सड़क पर बैठी भीड़ ने इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तो अपने उद्देश्य में सफल हो गई। लेकिन इसके साथ ही अब केंद्र सरकार के सामने इसी तरह की नई चुनौतियां आती दिखाई दे रही हैं। सीजेपी की सफलता के बाद इंटरनेट पर इन दिनों नई पार्टी बन रही है। इसका नाम है 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA)' इस पेज को भी कॉकरोचों की ही तरह बड़े स्तर पर लोगों का समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट लिखे जाने तक इंस्टाग्राम पर इसके 5.9 मिलियन फॉलोअर्स हो चुके थे। इसके अलावा दूसरी तरफ E20 के मामले पर भी सरकार घिरी हुई है। भले ही इसे लेकर अभी तक कोई बड़ा पेज सामने नहीं आया है। लेकिन ऑटो यूनियन समेत कई लोगों ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

सीजेपी ने सरकार के सामने खोला मुसीबतों का पिटारा

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत में लोगों ने सोचा था कि यह केवल एक मीम पेज बनकर रह जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अभिजीत दीपके को मिले सपोर्ट और बार-बार होते नीट पेपर लीक ने लोगों को अपना गुस्सा जाहिर करने का एक मौका दिया। 22 मिलियन फॉलोअर्स वाले सीजेपी के समर्थन में जमीन पर कुछ ही लोग आए। लेकिन प्रदर्शन शुरू हो गया। इसके बाद वांगचुक के अनशन और 20 जुलाई के संसद मार्च ने ग्राफ को एक दम बढ़ा दिया। फिर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने पूरी बात ही पलट दी। लेकिन सीजेपी की इस सफलता के बाद कई मुद्दों पर अपनी बात रख रहे लोगों ने भी इसी तरह की शुरुआत कर दी।

दावा- नीट में आत्महत्या करने वाले ज्यादातर छात्र जनरल कैटेगरी से

रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन की शुरुआत ऐसे ही विचार की वजह से हुई। सीजेपी की सफलता के बाद लोगों ने इसकी शुरुआत की और देखते ही देखते इसके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ने लगी। इस पक्ष ने सीजेपी आंदोलन के दौरान ही तर्क देना शुरू कर दिया था कि कॉकरोच जनता पार्टी आत्महत्या करने वाले जिन छात्रों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। उनमें से ज्यादातर छात्र जनरल कैटेगरी से आते हैं। ऐसे में कोई इस बात पर बात क्यों नहीं करता कि जनरल कैटेगरी के छात्र ही पेपर के दबाव में आकर आत्महत्या क्यों कर रहे हैं। हाल ही में हर्ष दुबे नामक एक छात्र भी वायरल हो रहा है, जो बड़ी ही भावुकता के साथ आरक्षण को लेकर अपने सवाल रख रहा है।

आरक्षण को हाथ लगाना आसान नहीं

भले ही आरक्षण को लेकर यह आंदोलन कितना भी तेज हो जाए। लेकिन भारत की किसी भी सरकार के लिए इसे हटाना संभव नजर नहीं आता। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने इस लंदन की एक ट्रेन प्रणाली का उदाहरण देकर समझाया था। बकौल थरूर, लंदन में किसी रेलवे स्टेशन पर दो तरफ ट्रेन चलती है। बीच में एक हाईटेंशन लाइन होती है। अगर कोई भी उस लाइन को छूता है, तो उसकी मौत निश्चित है। भारतीय राजनीति में आरक्षण भी उसी हाईटेंशन लाइन की तरह ही है, जिसे कोई भी राजनीतिक पार्टी छूना नहीं चाहती।

आरक्षण को खत्म नहीं करना है, पर सुधार की जरूरत- रंगनाथन

मशहूर पैनलिस्ट आनंद रंगनाथन ने आरक्षण में किए जाने वाले सुधार का भी जिक्र किया। आरजे रौनक के साथ दिए एक पॉडकॉस्ट में उन्होंने कहा कि वह आरक्षण के समर्थक हैं। लेकिन इसमें सुधार की जरूरत है। इसे हर पीढ़ी की जगह किसी एक ही पीढ़ी के लिए रखना चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर पिता को आरक्षण का लाभ मिला है, तो उसके बेटे को इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए। बकौल रंगनाथन, हमें यह देखना होगा कि आरक्षित सीटें बेहद कम हैं। लेकिन इन्हें लेने वाले बहुत ज्यादा है। ऐसे में अगर एक ही परिवार के दादा, पिता, पोता को आरक्षण मिलता रहेगा, तो यह उन गरीबों के साथ अत्याचार होगा, जो उसी कैटेगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण में सुधार करके यह व्यवस्था होनी चाहिए कि परिवार में किसी एक को ही आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसका फायदा यह होगा कि उस वर्ग के बाकी परिवारों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

सीजेपी आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने वाली भाजपा सरकार के लिए आरक्षण विरोधी यह ऑनलाइन आंदोलन परेशानी का सबब बन सकता है वह भी ऐसे समय में जब सरकार पहले से ही छात्रों के मुद्दे पर बैकफुट पर नजर आ रही है। भरत तिवारी एनकाउंटर केस, यूजीसी समेत ऐसे कई मुद्दे हुए हैं, जिनकी वजह से ऐसा कहा जा रहा है कि भाजपा का कोर वोटबैंक उनसे नाराज है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए यह स्थिति परेशानी पैदा करने वाली हो सकती है। क्योंकि भारत के इस सबसे बड़े राज्य में जाति के आधार पर ही राजनीति ज्यादा होती है।

इथेनॉल का मुद्दा बना सरकार की परेशानी

भारत हमेशा से ही ऊर्जा का आयातक देश रहा है। ईरान में जारी जंग की वजह से देश ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार पिछले कई वर्षों से इसका विकल्प ढूंढ़ने की कोशिश करती आ रही है। इथेनॉल के रूप में इसका विकल्प सामने आया भी है, लेकिन अब इस मुद्दे पर सरकार घिरती हुई नजर आ रही है। नीट पेपर लीक मामले में जहां देश के शिक्षा मंत्री निशाने पर थे। वहीं इस मामले में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी निशाने पर हैं। लगातार होते विरोध के बीच सरकार भी इस मामले पर बैकफुट की स्थिति में नजर आ रही है। पहले खुलकर इथेनॉल की वकालत करने वाले नितिन गडकरी भी अब इस पर असहज होते नजर आते हैं।

सीजेपी की सफलता ने विपक्ष और परिवहन से जुड़े लोगों को एकजुट होने के लिए प्रेरित किया है। कई लोग E20 पार्टी बनाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई बड़ी प्रगति देखने को नहीं मिली है। सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन इतना तय है कि सीजेपी की सफलता के बाद सरकार अब इस मामले को हल्के में नहीं ले सकती।