DRDO की बड़ी तैयारी, अब देश में ही बनेगा एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग पॉड, लड़ाकू विमानों को हवा में मिलेगा ईंधन

Published on 4 सित॰ 2026

DRDO की बड़ी तैयारी, अब देश में ही बनेगा एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग पॉड, लड़ाकू विमानों को हवा में मिलेगा ईंधन

देश में बनेगा एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग पॉडImage Credit source: Getty Images (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत अब हवा में ही लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने की तकनीक को स्वदेशी बनाने की तैयारी कर रहा है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी DRDO ने हवा से हवा में ईंधन भरने वाले पॉड (ARP) के विकास के लिए RFP जारी किया है. यह प्रोजेक्ट DRDO के टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड के तहत शुरू किया गया है. इस प्रोजेक्ट के जरिए देश में ही ऐसा एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिसकी मदद से उड़ान के दौरान लड़ाकू विमानों में ईंधन भरा जा सकेगा. इससे इस महत्वपूर्ण तकनीक के लिए विदेशी कंपनियों पर भारत की निर्भरता कम होगी.

प्रस्तावित सिस्टम को मॉड्यूलर डिजाइन के साथ विकसित किया जाएगा. एक टैंकर विमान में अधिकतम तीन रिफ्यूलिंग पॉड लगाए जा सकेंगे. इनमें दो पॉड विमान के दोनों पंखों पर और जरूरत के मुताबिक एक तीसरा पॉड विमान के फ्यूजलेज यानी मुख्य हिस्से पर लगाया जा सकेगा. इन पॉड्स के जरिए टैंकर विमान अपने अंदर मौजूद ईंधन को दूसरे लड़ाकू विमानों तक पहुंचाएगा. पूरी रिफ्यूलिंग प्रक्रिया को विमान के अंदर मौजूद एक टेक्नीशियन कंट्रोल स्टेशन से संभालेगा.

40 हजार फीट तक की ऊंचाई पर काम करने की तैयारी

डीआरडीओ के प्रस्ताव के मुताबिक, यह सिस्टम अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण उड़ान परिस्थितियों में काम करने के लिए डिजाइन किया जाएगा. यह करीब 10 हजार से 40 हजार फीट की ऊंचाई पर ऑपरेट कर सकेगा. सिस्टम की ईंधन ट्रांसफर क्षमता 2,000 अमेरिकी गैलन प्रति मिनट तक रखने का लक्ष्य है. इसमें होज-एंड-ड्रोग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. यह एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की एक प्रचलित तकनीक है, जिसमें टैंकर विमान से एक लचीली पाइप और ड्रोग यानी रिफ्यूलिंग बास्केट निकलती है और दूसरा विमान उससे जुड़कर ईंधन लेता है.

C-17 और C-130J जैसे विमानों को भी बनाया जा सकता है टैंकर

इस स्वदेशी तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि भविष्य में भारत अपने कुछ सामान्य सैन्य परिवहन विमानों को जरूरत पड़ने पर अस्थायी या सहायक एयर-टू-एयर रिफ्यूलर में बदल सकेगा यानी C-17 ग्लोबमास्टर, C-130J सुपर हरक्यूलस जैसे भारी परिवहन विमानों में रिफ्यूलिंग पॉड लगाए जा सकते हैं. भविष्य में भारत के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट यानी MTA प्रोग्राम से आने वाले विमान भी इस क्षमता के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इससे युद्ध या बड़े सैन्य अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के पास अतिरिक्त एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग क्षमता तैयार करने का विकल्प होगा.

लंबी दूरी के ऑपरेशन में मिलेगा फायदा

एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग से लड़ाकू विमान बिना जमीन पर उतरे ज्यादा समय तक हवा में रह सकते हैं. इससे उनकी कॉम्बैट रेंज और मिशन एंड्योरेंस बढ़ जाती है. युद्ध की स्थिति में इसका सीधा फायदा लंबी दूरी के स्ट्राइक मिशन, एयर पेट्रोलिंग और हवाई अभियानों में मिल सकता है.

मौजूदा IL-78 टैंकरों के साथ-साथ स्वदेशी विकल्प

भारतीय वायुसेना फिलहाल रूस निर्मित IL-78 MARS एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर विमानों का इस्तेमाल करती है. डीआरडीओ का यह प्रोजेक्ट मौजूदा टैंकर बेड़े को बदलने के बजाय अतिरिक्त स्वदेशी क्षमता तैयार करने की दिशा में कदम है.

भारत बड़े स्तर पर अपने एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग बेड़े के आधुनिकीकरण पर भी काम कर रहा है. इसके तहत HAL और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के सहयोग से बोइंग 767 विमानों को मल्टी-मिशन टैंकर ट्रांसपोर्ट में बदलने की योजना है.

आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

डीआरडीओ का एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग पॉड प्रोजेक्ट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि रिफ्यूलिंग सिस्टम सैन्य विमानन की बेहद संवेदनशील तकनीक है. अगर भारत इस तकनीक को देश में ही विकसित और तैयार करने में सफल रहता है, तो भविष्य में जरूरत के मुताबिक अलग-अलग सैन्य परिवहन विमानों को रिफ्यूलिंग भूमिका में इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ सकती है यानी एक तरफ नए समर्पित टैंकर विमानों की योजना आगे बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ भारत के पास जरूरत के समय अतिरिक्त रिफ्यूलिंग क्षमता तैयार करने का स्वदेशी विकल्प भी मौजूद होगा.

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अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण भारत की लीडिंग डिफेंस पत्रकारों में से एक हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर अपनी सटीक रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जानी जाती हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने इंडिया टीवी, न्यूज़ 24, ज़ी न्यूज़, इंडिया न्यूज़, ईटीवी और रिपब्लिक भारत जैसे प्रमुख समाचार चैनलों में रिपोर्टर, एंकर, प्रोड्यूसर और खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है. सितंबर 2022 से अंजू निर्वाण टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह रक्षा मामलों की कवरेज का नेतृत्व करती हैं, भारत के सैन्य आधुनिकीकरण, नौसेना की प्रगति, मिसाइल प्रणालियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर कवरेज करती हैं. अंजू निर्वाण ने युद्ध क्षेत्रों से रिपोर्टिंग की है, अग्रिम पंक्ति के सैन्य अभ्यासों को कवर किया है और शीर्ष रक्षा अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं.

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