DPO को शिक्षा विभाग के निर्देश-ऑडिट में ट्रांसपैरेंसी रखें: बिलों के भुगतान में अनियमितता, कैश बुक में कांट-छांट जैसी कमियां - Tonk News

Published on 14 अक्टू॰ 2026

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने टोंक जिला परियोजना कार्यालय (DPO) को वित्तीय ट्रांसपैरेंसी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। ये निर्देश तब दिए गए हैं जब ऑडिट में बार-बार कमियां सामने आ रही हैं। इन कमियों को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। विभाग ने संब

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परिषद के वित्तीय सलाहकार के अनुसार- हर साल के लेखों का आंतरिक ऑडिट नियुक्त ऑडिटर के जरिए कराया जाता है। इसमें हर जिले की पहली और दूसरी छमाही की ऑडिट रिपोर्प रिषद को भेजी जाती है। इन रिपोर्ट में कई कमियां बार-बार सामने आने पर ये कदम उठाया गया है।

जीएसटी-टीडीएस कटौती और कैश बुक व्यवस्थित करने पर जोर

ऑडिट रिपोर्ट में बिलों के भुगतान पर नियमानुसार जीएसटी, टीडीएस और आयकर की कटौती नहीं करने, कटौती की राशि समय पर जमा नहीं कराने, कैश बुक में काट-छांट, रोकड़ पुस्तिका अधूरी रखने और विभिन्न वित्तीय रजिस्टरों में अधूरे कॉलम जैसी कमियां सामने आईं।

इसके अलावा स्टॉक रजिस्टर नहीं रखने, अनुपयोगी सामग्री का निपटारा पैंडिंग रखने और कोर्ट के मामलों की सूचि का लिखित ब्योरा उपलब्ध नहीं होने जैसे मामले चिह्नित किए गए।

निर्देशों के तहत राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम (आरटीपीपी) 2012 और नियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार खरीद प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। निविदा और अनुबंध संबंधी दस्तावेजों में आवश्यक हस्ताक्षर तय करने, अनुपयोगी सामग्री के कागज तैयार कर नियम से निपटारा करने और दफ्तर के वाहनों की लॉगबुक व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए।

साफ निर्देश- हिसाब से खर्च करें राशि

विदेश सेवा में प्रतिनियुक्ति की शर्तों की पालना, यात्रा भत्ते के अधिक भुगतान पर रोक और स्वीकृत मद के उद्देश्य के अनुसार ही राशि खर्च करने को कहा गया है। बिजली और टेलीफोन बिलों का समय पर भुगतान करने तथा बिलों के भुगतान में अनियमित प्रक्रियाओं से बचने पर भी जोर दिया है।

परिषद ने साफ कहा कि आंतरिक ऑडिट रिपोर्टों में पैंडिंग काम की अनुपालना समय पर पूरी कर रिपोर्ट परिषद को भेजी जाए।

वित्तीय पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी तय हो

शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा- शिक्षा विभाग में वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने और सरकारी धन के उचित उपयोग के लिए आंतरिक ऑडिट अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ऑडिट में सामने आने वाली कमियों को केवल रिपोर्ट तक सीमित रखने के बजाय उनका समयबद्ध समाधान तय किया जाना चाहिए। वित्तीय नियमों की पालना, अभिलेखों का नियमित संधारण और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होने से अनियमितताओं की आशंका कम होगी तथा सरकारी धन के उपयोग में जवाबदेही बढ़ेगी।

संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे बिलों के भुगतान, कर कटौती, स्टॉक रजिस्टर और निविदा प्रक्रिया सहित सभी वित्तीय कार्यों में निर्धारित नियमों का पालन करें। लंबित अंकेक्षण अनुच्छेदों की नियमित समीक्षा कर उनकी अनुपालना सुनिश्चित की जानी चाहिए।

साथ ही, जहां किसी प्रकार की कमी सामने आती है, वहां सुधारात्मक कार्रवाई भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में एक जैसी आपत्तियों की पुनरावृत्ति न हो और शिक्षा विभाग की वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।