Updated On: Aug 09, 2026 | 08:01 AM IST
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सार
Tamil Nadu Delimitation: तमिलनाडु में परिसीमन विवाद गहराया! सीएम विजय की सर्वदलीय बैठक में लोकसभा की 543 सीटों को फ्रीज करने की मांग उठी, वहीं प्रमुख विपक्षी दल DMK ने बैठक का बहिष्कार किया।

मुख्यमंत्री विजय (सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Delimitation Controversy In South India: तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मुख्यमंत्री विजय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है, जहां एक ओर सीटों को फ्रीज करने की मांग उठी, वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल DMK के बहिष्कार ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिसीमन के खिलाफ तमिलनाडु सरकार का बड़ा दांव
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने केंद्र सरकार की परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी है। शनिवार को मुख्यमंत्री विजय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य परिसीमन के संभावित प्रभावों पर आम सहमति बनाना और केंद्र को एक कड़ा संदेश देना था। बैठक में मुख्यमंत्री की पार्टी TVK के अलावा कांग्रेस, MDMK और कई अन्य क्षेत्रीय दलों के नेता शामिल हुए, जहाँ सभी ने एक सुर में दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जाहिर की।
सीएम विजय ने बताया ‘दुर्भाग्यपूर्ण’
इस बैठक की सबसे बड़ी चर्चा मुख्य विपक्षी पार्टी DMK की अनुपस्थिति रही। DMK ने मुख्यमंत्री विजय द्वारा बुलाई गई इस बैठक का पूरी तरह से बहिष्कार किया। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने इसे ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने तमिलनाडु की राजनीति पर 60 वर्षों तक राज किया हो और जिसके संस्थापकों ने राज्य के अधिकारों के लिए बड़े बलिदान दिए हों, उसका ऐसी महत्वपूर्ण बैठक से दूरी बनाना समझ से परे है। सियासी गलियारों में इस बहिष्कार को विजय और DMK के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा जा रहा है।
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लोकसभा की 543 सीटों को ‘फ्रीज’ करने की मांग
घंटों चली इस बैठक के अंत में एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया। बैठक में शामिल सभी दलों ने इस बात पर सहमति जताई कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को यथावत रखा जाना चाहिए और उन्हें ‘फ्रीज’ कर दिया जाना चाहिए। विशेष रूप से, तमिलनाडु की मौजूदा 39 लोकसभा सीटों में किसी भी तरह की कटौती या बदलाव का कड़ा विरोध किया गया। सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार चाहती है कि अगले 40 से 50 वर्षों तक लोकसभा सीटों की संख्या में कोई बदलाव न किया जाए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को राजनीतिक नुकसान न उठाना पड़े।
लोकतंत्र के लिए खतरा या दक्षिण के अधिकारों की रक्षा?
बैठक के दौरान कांग्रेस के सांसदों ने भी मुखर होकर अपनी बात रखी। कांग्रेस का तर्क है कि यदि मौजूदा मानकों के आधार पर परिसीमन किया गया, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। कांग्रेस नेताओं ने सुझाव दिया कि तमिलनाडु विधानसभा को इस मुद्दे पर एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करना चाहिए। साथ ही, यह भी कहा गया कि जनता को यह विस्तार से समझाना जरूरी है कि आखिर राज्य सरकार इस प्रक्रिया का विरोध क्यों कर रही है और यह कैसे दक्षिण भारत के राजनीतिक प्रभाव को कम कर सकता है।
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केंद्र को कड़ा संदेश
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन का विरोध किया है। उनकी सरकार ने पहले भी स्पष्ट किया है कि दक्षिणी राज्यों के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कई बार आश्वासन दिए हैं, लेकिन तमिलनाडु के राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास की खाई अभी भी गहरी है। इस सर्वदलीय बैठक के माध्यम से तमिलनाडु ने साफ कर दिया है कि वह अपनी राजनीतिक ताकत और प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अब देखना यह होगा कि आगामी विधानसभा सत्र में इस पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
