By Oneindia Staff
Updated: Sunday, September 27, 2026, 17:40 [IST]
Dhamra Port: ओडिशा का धामरा बंदरगाह भारत का पहला बड़ा निजी बहु-मालवाहक यानी मल्टी-कार्गो पोर्ट बन गया है, जिसके पूरे विद्युत संचालन को नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित किया जा रहा है। Adani पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के संचालन वाले इस बंदरगाह में यह बदलाव अगस्त 2026 से प्रभावी हुआ।
कंपनी के मुताबिक, धामरा पोर्ट को हर महीने 90 लाख यूनिट से ज्यादा बिजली अब हरित ऊर्जा स्रोतों से मिल रही है। मौजूदा परिचालन स्तर पर इसकी सालाना नवीकरणीय ऊर्जा खपत 108 गीगावाट-घंटे (GWh) से अधिक है।
आखिर धामरा पोर्ट में क्या बदला?
धामरा पोर्ट में पहले भी नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन अब इसके संपूर्ण विद्युत संचालन को हरित ऊर्जा पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें बंदरगाह के 24 घंटे चलने वाले प्रमुख ऑपरेशन शामिल हैं। इनमें...
- माल की हैंडलिंग और ढुलाई
- स्टोरेज और यार्ड संचालन
- रेल से जुड़े ऑपरेशन
- लोडिंग-अनलोडिंग व्यवस्था
- अन्य प्रमुख इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यानी बंदरगाह के बिजली से चलने वाले मुख्य काम अब नवीकरणीय ऊर्जा से मिलने वाली बिजली पर निर्भर हैं।
90 लाख यूनिट से ज्यादा बिजली हर महीने
धामरा पोर्ट हर साल करीब 48 मिलियन टन से ज्यादा माल संभालता है। कंपनी के अनुसार, मौजूदा स्तर पर पोर्ट को हर महीने 90 लाख यूनिट से अधिक बिजली हरित स्रोतों से मिल रही है। इसे सालाना आधार पर देखें तो नवीकरणीय ऊर्जा की खपत 108 GWh से ज्यादा बैठती है। इस बदलाव का मकसद बंदरगाह की बिजली खपत से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को कम करना और APSEZ के नेट-जीरो रोडमैप को आगे बढ़ाना है।
कहां-कहां से आ रही है ग्रीन बिजली?
धामरा पोर्ट को पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा पर चलाने के लिए APSEZ ने किसी एक स्रोत पर निर्भरता नहीं रखी है। इसके लिए तीन अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- 1. खावड़ा से करीब एक-तिहाई बिजली: नवीकरणीय ऊर्जा का करीब एक चौथाई से एक-तिहाई हिस्सा गुजरात के खावड़ा में APSEZ के हाइब्रिड पावर प्लांट से आता है।
- 2. थर्ड पार्टी से 10-15% बिजली: करीब 10 से 15% ऊर्जा थर्ड-पार्टी एक्सेस एग्रीमेंट के जरिए हासिल की जा रही है।
- 3. ओडिशा की ग्रीन पावर खरीद: बाकी जरूरत ओडिशा की बिजली वितरण कंपनी के साथ ग्रीन कंज्यूमर एग्रीमेंट के तहत पूरी की जा रही है। इस तरह अलग-अलग स्रोतों को मिलाकर धामरा पोर्ट की बिजली जरूरत को नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा किया जा रहा है।
60 मिलियन टन की है पोर्ट की क्षमता
धामरा भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख डीप-वॉटर पोर्ट में शामिल है। यह ओडिशा के तटीय क्षेत्र में हल्दिया और पारादीप के बीच स्थित है।
पोर्ट की कुल कार्गो हैंडलिंग क्षमता करीब 60 मिलियन टन सालाना है। मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान धामरा पोर्ट ने 48.8 मिलियन टन कार्गो संभाला। यह पोर्ट खासतौर पर पूर्वी भारत के खनिज संपदा वाले इलाकों से जुड़ी औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है।
पोर्ट पर कौन-कौन सी सुविधाएं हैं?
धामरा पोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर में कई तरह की कार्गो हैंडलिंग सुविधाएं शामिल हैं। इनमें...
- छह ड्राई-बुल्क कार्गो बर्थ
- फास्ट लोडिंग साइलो
- वैगन टिपलर
- ट्रैक हॉपर
- मैकेनाइज्ड स्टोरेज यार्ड
- जेटी सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अलावा रेल और सड़क नेटवर्क के जरिए यह ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रमुख औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।
APSEZ के नेट-जीरो लक्ष्य से कैसे जुड़ा है?
धामरा पोर्ट को पूरी तरह नवीकरणीय बिजली पर चलाना APSEZ के व्यापक नेट-जीरो रोडमैप का हिस्सा है। कंपनी के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल से खरीदी गई बिजली से जुड़े उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, बिजली की ज्यादा खपत वाले पोर्ट ऑपरेशंस के पर्यावरणीय प्रदर्शन में भी सुधार होगा। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र अपनी ऊर्जा जरूरतों को धीरे-धीरे पारंपरिक बिजली स्रोतों से हटाकर नवीकरणीय ऊर्जा की ओर ले जा रहे हैं।
अब आगे क्या?
धामरा पोर्ट का पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा पर जाना APSEZ के बंदरगाह संचालन को चरणबद्ध तरीके से डीकार्बोनाइज करने की योजना का हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य अपनी ऊर्जा जरूरतों में स्वच्छ स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाना और संचालन से जुड़े उत्सर्जन को कम करना है।
धामरा में लागू मॉडल यह दिखाता है कि बड़े पैमाने पर लगातार चलने वाले पोर्ट ऑपरेशंस के लिए कैप्टिव रिन्यूएबल पावर, थर्ड-पार्टी बिजली और ग्रीन पावर खरीद जैसे अलग-अलग विकल्पों को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।