DFRL ने बनाई जांच किट: दूध में यूरिया, दाल-मटर में रंग, किट खोलेगी मिलावट की पोल - Gwalior News

Published on 19 अक्टू॰ 2026

ग्वालियर1 घंटे पहलेलेखक: संजय बौहरे

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बाजार में बिक रहे नकली और मिलावटी दूध के साथ केमिकल युक्त दाल-मटर सब्जियों की पहचान अब घर बैठे की जा सकेगी। डीआरडीओ की रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएफआरएल), मैसूर ने ऐसी जांच किट तैयार की हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में दूध और मटर-दाल में मिलावट का पता लगाया जा सकेगा।

खाद्य पदार्थों में मिलावट चिंता का कारण बनी हुई है। दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और स्टार्च जैसे पदार्थ मिलाए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। वहीं, फलों और सब्जियों को आकर्षक दिखाने के लिए सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। दाल और सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन, मेटानिल येलो तथा सीसे जैसे रसायनों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

मिलावटी खाद्य से शरीर के इन अंगों पर पड़ता है असर

  • पाचन तंत्र: यूरिया, डिटर्जेंट और अन्य मिलावटी पदार्थ वाला दूध पेट दर्द, उल्टी, दस्त और एसिडिटी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
  • लिवर और किडनी: लगातार हानिकारक रसायनों के सेवन से शरीर के इन महत्वपूर्ण अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और लंबे समय में नुकसान हो सकता है।
  • कैंसर का खतरा: कई रंग और रसायन का खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल सुरक्षित नहीं होता। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहना गंभीर बीमारी की वजह बनता है।
  • बच्चों के विकास में अवरोध: सीसा जैसे भारी धातु और कुछ कीटनाशक बच्चों के मस्तिष्क और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं।

घर पर... ऐसे खुद करें दाल व मटर में खतरनाक रासायनिक रंगों की जांच

खाद्य पदार्थ में कृत्रिम रंग की जांच के लिए निर्धारित मात्रा में निष्कर्षण घोल परखनली में लें। इसमें मापने वाले कप से खाद्य पदार्थ का नमूना डालकर 30 से 60 सेकंड तक हिलाएं।

इसके बाद मिश्रण को स्थिर रखें, ताकि नमूने का रंग घोल में आ सके और परतें अलग हो जाएं। फिर ऊपर या नीचे बनी निर्धारित परत से एक बूंद परीक्षण पट्टी के जांच वाले हिस्से पर डालें। कुछ मिनट तक पट्टी के रंग में बदलाव देखें। रंग बदलने पर संबंधित रासायनिक रंग की मौजूदगी मानी जाती है।

डीएफआरएल का नाम डीआईबीटी किया...

डीआरडीओ के मैसूर स्थित रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएफआरएल) का नाम बदलकर रक्षा जैव-रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईबीटी) किया है। डीआरडीई ग्वालियर के प्रशासनिक नियंत्रण में लाया गया है, ताकि जैव रक्षा के लक्ष्यों पर अधिक प्रभावी ढंग से कार्य किया जा सकेगा।

दूध में मिलावट की जांच के लिए पहले से किट है। अब दाल-मटर में हानिकारक रसायनों की पहचान के लिए परीक्षण किट विकसित की गई है। - डॉ. एम.एम. परीडा, निदेशक,डीआरडीई

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