Published: Sunday, July 26, 2026, 17:58 [IST]
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाने वाले सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से दूरी बनाने का बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सक्रिय राजनीति नहीं छोड़ रहे हैं और जनता के बीच पहले की तरह काम करते रहेंगे।
अपने फैसले के पीछे उन्होंने बढ़ती उम्र,खराब होती सेहत और चुनावी राजनीति में बढ़ते पैसों के प्रभाव को बड़ी वजह बताया। उनके बयान के बाद कर्नाटक की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। जून 2026 में सिद्धारमैया ने कर्नाटक सीएम पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद डीके शिवकुमार को कांग्रेस ने सीएम बनाया।
वरुणा से चुनाव लड़ने का दबाव, लेकिन सिद्धारमैया ने क्यों मना किया?
सिद्धारमैया ने बताया कि वरुणा विधानसभा क्षेत्र के समर्थक और जनता उन पर एक बार फिर मैदान में उतरने का जोर बना रही है। लेकिन वे अपना मन पूरी तरह बना चुके हैं। उन्होंने पुराने दौर और आज के माहौल के अंतर को समझाते हुए भारतीय चुनावी व्यवस्था की कड़वी सच्चाई सामने रखी।
सिद्धारमैया ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा,
"पहले जब मैं चुनाव मैदान में उतरता था, तो क्षेत्र की जनता खुद अपनी जेब से पैसा जुटाकर हमें जीत दिलाती थी। लेकिन आज माहौल एकदम बदल गया है। आज चुनाव लड़ने के लिए नेताओं को जनता को पैसा देना पड़ता है। राजनीति इतनी भ्रष्ट हो चुकी है कि अब इसमें ईमानदार काम करने की जगह नहीं बची है। इन्हीं सब वजहों से मैंने आगे चुनाव न लड़ने का फैसला लिया है।"
अपने 50 साल के लंबे राजनीतिक सफर के बारे में क्या बोले सिद्धारमैया?
चुनावी संन्यास के पीछे सिद्धारमैया ने अपनी ढलती उम्र और सेहत को भी बड़ी वजह बताया। उन्होंने याद किया कि उनका राजनीतिक सफर 1978 में एक तालुक बोर्ड के सदस्य के रूप में शुरू हुआ था।
सिद्धारमैया ने कहा,
"मेरी उम्र अब 79 साल हो चुकी है। मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने तक मेरी उम्र 81-82 साल हो जाएगी। साल 2028 तक मेरे राजनीतिक जीवन के 50 साल पूरे हो जाएंगे। अब मेरी सेहत वैसी नहीं रही और न ही शरीर में पहले जैसी ऊर्जा बची है। इन पांच दशकों में मैंने कई हार और जीत देखी हैं, लेकिन मुझे इस बात का संतोष है कि मैंने कभी अपनी अंतरात्मा का सौदा नहीं किया। जनता के इस प्यार का कर्ज मैं कभी नहीं चुका सकता, इसलिए आखिरी सांस तक समाज सेवा करता रहूंगा।"
उन्होंने आगे लिखा,
''आज ऐसा दौर आ गया है कि अगर चुनाव लड़ना है तो लोगों को पैसे देने पड़ते हैं। राजनीति पूरी तरह से खराब हो चुकी है और ईमानदारी की राजनीति के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए मैंने भविष्य में कोई भी चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।''
सिद्धारमैया का यह बयान असल में शनिवार (25 जुलाई) को मांड्या जिले के के.आर. पेट में आयोजित एक प्राइवेट प्रोग्राम के दौरान दिए भाषण से जुड़ा था, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
कर्नाटक में मंत्रिमंडल का हो सकता है विस्तार!
एक तरफ सिद्धारमैया के चुनावी राजनीति से हटने की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं, तो दूसरी तरफ कर्नाटक कांग्रेस में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गई है। राज्य सरकार में करीब 20 खाली मंत्री पदों के लिए 60 से ज्यादा विधायक एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
वरिष्ठ नेता अपने-अपने करीबी विधायकों को कैबिनेट में जगह दिलाने की होड़ में लगे हैं, जिससे पार्टी के भीतर पावर बैलेंस बदलने की पूरी संभावना है। इसको लेकर मंगलवार (28 जुलाई) को नई दिल्ली में एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सामने अपने-अपने समर्थकों के नाम रखेंगे, जिसके बाद नए मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लगेगी।