M.K. Stalin: मद्रास हाई कोर्ट ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2026 के तमिलनाडु चुनावों में कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र से TVK नेता वी.एस. बाबू के हाथों अपनी हार को चुनौती दी थी.
M.K. Stalin: मद्रास हाई कोर्ट ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2026 के तमिलनाडु चुनावों में कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र से TVK नेता वी.एस. बाबू के हाथों अपनी हार को चुनौती दी थी.
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तमिलनाडु के पूर्व CM एमके स्टालिन को मद्रास हाईकोर्ट से बड़ा झटका Photograph: (File)
M.K. Stalin: तमिलनाडु के पूर्व सीएम और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन को गुरुवार को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा. दरअसल, कोर्ट ने कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में अपनी चुनावी हार को लेकर दायर उनकी याचिका खारिज कर दी. यह आदेश दो जजों की बेंच ने दिया, जिसमें कहा गया कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री की याचिका सुनवाई के लायक नहीं है.
DMK का गढ़ रहा है कोलाथुर
बता दें कि तमिलनाडु की कोलाथुर डीएमके और स्टालिन का गढ़ रहा है, लेकिन हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में वे तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) के नेता वीएस बाबू से लगभग 8,000 वोटों के अंतर से हार गए. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अनुसार, स्टालिन को 74,202 (40.32 प्रतिशत) वोट मिले, जबकि बाबू को 82,997 (45.09 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए.
4 मई को नतीजे घोषित होने के बाद, DMK प्रमुख ने 7 मई को वेरिफिकेशन के लिए अर्जी दी थी, जिसकी प्रक्रिया 29 जुलाई को शुरू हुई. इसके साथ ही उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट का भी रुख किया था और नतीजों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के फेल होने की बात कही.
स्टालिन ने कोलाथुर के नतीजों में गड़बड़ी का लगाया था आरोप
अपनी याचिका में पूर्व सीएम स्टालिन ने कहा था कि सीनियर वकील एन.आर. इलांगो को 14 चुने हुए EVM सेट के कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और VVPAT (वोटर वेरिफ़िएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) में बर्न मेमोरी/माइक्रोकंट्रोलर की जांच और वेरिफिकेशन के लिए उनका अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था. जांच के दौरान ही गड़बड़ियां पाई गईं. बाद में, इलांगो ने जिला चुनाव अधिकारी (DEO) को एक पत्र लिखा. हालांकि, DEO ने कहा था कि जांच और वेरिफिकेशन का काम सफलतापूर्वक किया गया और तय प्रक्रियाओं के अनुसार 5 अगस्त को पूरा हो गया.
स्टालिन ने किया था मद्रास हाई कोर्ट का रुख
उसके बाद 6 अगस्त को उन्होंने DEO को पत्र लिखकर उन खास कमियों के बारे में बताया जो उसमें सामने आई थीं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंजीनियर द्वारा जारी किए गए सर्टिफिकेट, तकनीकी/विफलता रिपोर्ट (जिनमें खराबी के कारणों का ब्यौरा हो) की जगह नहीं ले सकते और न ही उन्होंने ऐसा किया था.
इसके साथ ही उन्होंने डीईओ के दावे को भी मानने से इनकार कर दिया और मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने कहा कि विवादित आदेश बिना किसी स्पष्टीकरण या उनकी आपत्तियों पर ध्यान दिए, यांत्रिक ढंग से पारित किया गया था. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने दिन में ही उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है.
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