CJP प्रोटेस्ट से पहले चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, वोटर लिस्ट में सुधार प्रक्रिया में किया बदलाव

Published on 9 अक्टू॰ 2026

Election Commission: CJP प्रोटेस्ट से पहले चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है. आयोग ने वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया में अहम बदलाव किया है. CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का एलान किया है.

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Election Commission: CJP प्रोटेस्ट से पहले चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है. आयोग ने वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया में अहम बदलाव किया है. CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का एलान किया है.

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Election Commission: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का एलान किया है. यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने है. इससे पहले चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है. आयोग ने वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया में अहम बदलाव किया है.

भारत के चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया के दौरान किसी एक वोटर द्वारा भरे जा सकने वाले 'फॉर्म 7' आवेदनों की संख्या तय कर दी है. दावे और आपत्तियों की पूरी अवधि के दौरान किसी एक वोटर द्वारा भरे जा सकने वाले 'फॉर्म 7' आवेदनों की अधिकतम संख्या 10 होगी. वहीं वोटर लिस्ट में लगातार अपडेट करने की अवधि के दौरान किसी एक वोटर द्वारा भरे जा सकने वाले 'फॉर्म 7' आवेदनों की अधिकतम संख्या 5 प्रति माह होगी. 

The Election Commission of India has capped the number of Form 7 applications that an individual elector can file during the electoral-roll revision process.

(i) Maximum number of Form 7 applications during the entire period of claims and objections by an individual elector: 10… pic.twitter.com/cMTy0yV6Cj

— ANI (@ANI) October 9, 2026

CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या है पूरा विवाद?

भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), आयोग के भीतर कथित मतभेदों और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर विवादों में हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के तहत देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिस पर विपक्ष ने गरीबों, प्रवासियों और पिछड़े वर्गों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. वहीं, एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति जताई. 

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फॉर्म-6 पर उठ रहे सवाल

नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी सवाल उठे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को मंजूरी नहीं दी थी. विपक्षी INDIA गठबंधन ने इस पूरे मामले को ‘वोट चोरी’ बताते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है, जहां अदालत ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा है. हालांकि, फिलहाल अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने या SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है.

क्या है चुनाव आयोग और सरकार का पक्ष?

चुनाव आयोग का कहना है कि आयुक्तों के बीच मतभेद होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है. आयोग ने आपत्तियों को दूर करने के लिए बैठकों से जुड़े नियम भी तय किए हैं. विवाद के बीच आयोग ने बिहार जैसे राज्यों में विशेष पंजीकरण अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मतदाता सूची से छूटे पात्र लोगों के नाम दोबारा जोड़े जा सकें. वहीं, सत्तारूढ़ बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा है कि इनका मकसद संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाना है.

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