बिलासपुर के सिम्स में 38 वर्षीय महिला के जबड़े में पुरानी सड़न से बनी बड़ी रेडिकुलर सिस्ट का सफल इलाज किया गया साथ ही आयुष्मान योजना से उपचार निःशुल्क हुआ।
महिला की रेडिकुलर सिस्ट का सफल उपचार
- Published: 18 Aug 2026, 04:51 PM IST
- Last Updated: 18 Aug 2026, 05:33 PM IST
पंकज गुप्ते - बिलासपुर। दांतों की सड़न और दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज करना कितना गंभीर हो सकता है, इसका उदाहरण सिम्स बिलासपुर के दंत चिकित्सा विभाग में सामने आया है। यहां 38 वर्षीय महिला के जबड़े में पुरानी सड़न और संक्रमण के कारण बनी बड़ी रेडिकुलर सिस्ट का सफल उपचार किया गया। खास बात यह रही कि मरीज का पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क किया गया।
जबड़े में सूजन के बाद पहुंची अस्पताल
मरीज जबड़े में सूजन की शिकायत लेकर सिम्स के दंत चिकित्सा विभाग पहुंची थी। चिकित्सकों ने डिजिटल एक्स-रे और सीबीसीटी जांच के जरिए बीमारी की पहचान की। जांच में पता चला कि प्रभावित दांत की जड़ के आसपास जबड़े की हड्डी का बड़ा हिस्सा सिस्ट से प्रभावित हो चुका था।
पुरानी सड़न और संक्रमण से बनी रेडिकुलर सिस्ट
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र कश्यप के अनुसार, रेडिकुलर सिस्ट मुंह में विकसित होने वाली एक प्रकार की गांठ या थैली होती है, जिसमें तरल पदार्थ भरा होता है। यह आमतौर पर लंबे समय से सड़े हुए या संक्रमित दांत की जड़ के आसपास विकसित होती है। दांत की नस के निष्क्रिय या मृत होने के बाद संक्रमण धीरे-धीरे जड़ के आसपास की हड्डी तक पहुंच सकता है। समय के साथ यही स्थिति सिस्ट का रूप ले सकती है।
शुरुआत में लक्षण नहीं होते स्पष्ट
रेडिकुलर सिस्ट शुरुआती अवस्था में कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती है। बाद में प्रभावित दांत के आसपास मसूड़े या जबड़े में सूजन, दांत का रंग गहरा होना और चबाते समय दर्द जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। गंभीर स्थिति में चेहरे की बनावट में बदलाव या दांत के हिलने जैसी समस्या भी हो सकती है।
दो चरणों में किया गया उपचार
सिम्स के चिकित्सकों ने जांच के बाद उपचार की योजना तैयार की। पहले चरण में संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित दांत की रूट कैनाल थेरेपी (RCT) की गई। इसके बाद छोटे चीरे के जरिए सर्जिकल एन्यूक्लिएशन की प्रक्रिया अपनाकर सिस्ट को पूरी तरह बाहर निकाला गया। इस दौरान आसपास की हड्डी को अनावश्यक नुकसान से बचाते हुए सिस्ट को हटाया गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार है और प्रभावित जबड़े की हड्डी भी धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही है।
निजी अस्पतालों के बाद CIMS में मिला मुफ्त इलाज
मरीज ने इलाज के लिए पहले निजी अस्पतालों में भी संपर्क किया था, लेकिन अधिक खर्च के कारण वह वहां उपचार नहीं करा सकी। बाद में उसे सिम्स में बीमारी के इलाज की जानकारी मिली। यहां आयुष्मान योजना के तहत उसका उपचार पूरी तरह निःशुल्क किया गया। दंत चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप प्रकाश ने कहा कि दांतों में सड़न, संक्रमण या चोट के कारण होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर दंत चिकित्सक से परामर्श और नियमित जांच से ऐसी समस्याओं की शुरुआती चरण में पहचान संभव है। उन्होंने नागरिकों से हर छह महीने में दंत जांच कराने की अपील की, ताकि छिपी हुई दंत समस्याओं का समय रहते उपचार किया जा सके और बड़ी सर्जरी की जरूरत से बचा जा सके।
चिकित्सकीय टीम की रही अहम भूमिका
सफल उपचार में डॉ. भूपेंद्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम में डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी कोनीकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे और डॉ. सोनल पटेल शामिल रहे। सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति और अस्पताल अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने सफल उपचार की सराहना करते हुए मरीजों के हित में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के उपयोग और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकीय टीम को प्रोत्साहित किया।
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