Child Trafficking: 4 दिन के नवजात को बेचने पहुंची थीं 5 महिलाएं, ₹6.5 लाख में हुई डील, फिर ऐसे खुला पूरा राज

Published on 16 अग॰ 2026

Delhi Newborn Baby Trafficking: दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक बड़े चाइल्ड ट्रैफिकिंग रैकेट का खुलासा किया है। इस मामले में पांच महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है और उनके चंगुल से एक चार दिन के नवजात बच्चे को भी बचाया गया है।

Delhi Child Trafficking Case: दिल्ली पुलिस ने नवजात बच्चों की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पांच महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से महज चार दिन के एक नवजात बच्चे को भी सुरक्षित बचाया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से बच्चों को खरीदकर उन्हें ऊंची कीमत पर इच्छुक खरीदारों को बेचता था।

2 से 4 लाख में खरीदकर लाखों में बेचते थे बच्चे

पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर कमजोर आर्थिक स्थिति वाले दंपतियों से नवजात बच्चों को 2 से 4 लाख रुपये में खरीदते थे। इसके बाद बच्चों को संभावित खरीदारों को ज्यादा कीमत में बेचने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और खरीदारों का पता लगाने में जुटी है।

यमुना बाजार में बच्चा बेचने पहुंची थीं महिलाएं

नॉर्थ दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में नवजात बच्चे की बिक्री की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया। एक पुरुष और महिला पुलिसकर्मी को संभावित खरीदार बनाकर आरोपियों के पास भेजा गया।

₹6.5 लाख में तय हुई डील, ऐसे पकड़ा गया गिरोह

पुलिस के मुताबिक, 7 अगस्त की रात करीब 10 बजे फर्जी ग्राहक बनकर पुलिसकर्मियों ने आरोपियों से नवजात को 6.5 लाख रुपये में खरीदने की बातचीत की। इसके बाद 20 हजार रुपये टोकन मनी देने की बात तय हुई। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने चार अन्य महिलाओं को बुलाया। इनमें से एक महिला कंबल में लिपटा नवजात लेकर पहुंची। जैसे ही पुलिस के डिकॉय अधिकारियों ने संकेत दिया, टीम ने मौके पर मौजूद पांचों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया।

चार दिन के बच्चे को अस्पताल भेजा गया

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने नवजात को सुरक्षित बरामद कर अरुणा आसफ अली अस्पताल भेजा। इसके साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति को भी मामले की जानकारी दी गई। बच्चे की सुरक्षा और देखभाल को लेकर संबंधित एजेंसियां आगे की प्रक्रिया में जुटी हैं।

तीन साल से चल रहा था कथित नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह कथित तौर पर करीब तीन साल से नवजात बच्चों की तस्करी में शामिल था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले 4-5 बच्चों को संभावित ग्राहकों तक पहुंचा चुके हैं। पुलिस अब उन बच्चों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

IVF सरोगेसी के नाम पर भी बनाते थे निशाना

जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को पैसे का लालच देकर IVF के जरिए सरोगेसी की व्यवस्था कराने की पेशकश करता था। आरोप है कि बच्चे के जन्म के बाद आरोपी नवजात को अपने कब्जे में लेकर उसे संभावित खरीदारों को बेच देते थे।

दो आरोपी आपस में बहनें

गिरफ्तार पांच महिलाओं में से दो के आपस में बहनें होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में Juvenile Justice Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। अब जांच एजेंसियां कथित तौर पर पहले बेचे गए बच्चों, उनके खरीदारों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने में जुटी हैं।

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