Chaturmas 2026: आषाढ़ माह में इस दिन बदलेगी ईश्वरीय सत्ता, फिर शुरू होगा जप, तप और साधना का समय

Published on 12 जुल॰ 2026

Chaturmas 2026: आषाढ़ माह में इस दिन बदलेगी ईश्वरीय सत्ता, फिर शुरू होगा जप, तप और साधना का समय

चातुर्मास 2026Image Credit source: Unplash

Chaturmas 2026: सनातन धर्म में चातुर्मास का समय बहुत खास माना गया है. ये वही समय होता है, जब ईश्वरीय सत्ता बदलती है. साल के आठ माह भगवान विष्णु संसार के पालन का कार्यभार संभालते हैं, लेकिन चातुर्मास के चार महीनों में योगनिद्रा में चले जाते हैं. ये समय भगवान विष्णु के विश्राम करने का होता है. इस समय संसार का कार्याभार महादेव समेत अन्य देवी-देवता और पितृ देव संभालते हैं.

हर साल चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ माह में हो जाती है और इसका समापन कार्तिक मास में होता है. आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है. इसके बाद भगवान विष्णु कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं और फिर से संसार का कार्यभार संभालते हैं.

चातुर्मास माना जाता है साधना का समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाने वाली है. इस साल आषाढ़ माह में यही वो दिन होगा जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाएंगे. इसके बाद शादी-विवाह, सगाई समेत तमाम शुभ और मांगलिक कामों पर रोक लग जाएगी. चातुर्मास का समय सांसारिक सुखों से दूर रहकर स्नान-दान, पूजा-पाठ, जप, जप और साधना का समय होता है.

धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास में स्नान-दान, पूजा-पाठ, जप, जप और साधना करने से कई गुना अधिक पुण्यफल मिलता है. वहीं इस साल 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी और इसी दिन भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने के बाद चातुर्मास का समापन होगा और ईश्वरीय सत्ता फिर से बदलेगी. भगवान विष्णु संसार के पालन का कार्य फिर संभाल लेंगे. इसके बाद से एक बार फिर शादी-विवाह, सगाई समेत तमाम शुभ और मांगलिक काम शुरू कर दिए जाएंगे.

चातुर्मास में क्यों नहीं किए जाते शुभ काम?

चातुर्मास के समय में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई, विदाई, उपनयन आ​दि इसलिए नहीं किए जाते हैं, क्योंकि इस समय भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं. यह समय देवताओं का शयन काल माना जाता है और मांगलिक कार्यों के लिए देवताओं का जागृत अवस्था में होना जरूरी है, इसलिए मान्यता है कि चातुर्मास में मांगलिक कामों का शुभ फल नहीं मिलता.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण कुमार

वरुण कुमार

वरुण कुमार पिछले पांच वर्षों से पत्रकारिता जगत का हिस्सा हैं. साल 2021 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद प्रभासाक्षी न्यूज वेबसाइट से पत्रकारिता की शुरुआत की और फिर एबीपी न्यूज का हिस्सा बने. अब TV9 डिजिटल की धर्म टीम के साथ काम कर रहे हैं.

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