Chamoli News: उत्तराखंड के चमोली जिले की उर्गम घाटी में सोमवार रात हुई भारी बारिश ने पंचकेदार में शामिल भगवान कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में तबाही मचा दी. पहाड़ी से आए भारी मलबे और बरसाती नाले के कारण मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा मलबे से पट गया. मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. मलबे की चपेट में आने से मंदिर परिसर का हवन कुंड और रेन शेल्टर क्षतिग्रस्त हो गए. मंदिर की सुरक्षा दीवार और रेलिंग को भी नुकसान पहुंचा है. रास्ता टूटने के बाद श्रद्धालुओं को दलदल और मलबे के उपर चढकर ही मंदिर तक पहुंचना पड़ रहा है.
हजारों साल पुरानी गुफा में विराजते हैं कल्पेश्वर महादेव
उर्गम घाटी में कल्पगंगा के ऊपरी छोर पर स्थित कल्पेश्वर महादेव की गुफा को प्राचीन शिव गुफा के रूप में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है. मान्यता है कि यहां गुफा के भीतर भगवान शिव का प्राचीन स्वंय भू यानी की अपने आप बना हुआ शिवलिंग विराजमान है, जिसकी पूजा भगवान शिव की जटाओं के स्वरूप में की जाती है.
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पंचकेदार में शामिल कल्पेश्वर महादेव की सबसे खास बात यह है कि इस धाम के कपाट पूरे साल श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुले रहते हैं. यानी बर्फबारी और कठिन मौसम के बावजूद यहां सालभर भक्त भगवान शिव की जटाओं के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
मंदिर परिसर में भारी मलबा आने के बाद गांव के नवयुवक खुद सफाई अभियान में जुट गए हैं. ग्रामीण मलबा हटाकर श्रद्धालुओं के लिए रास्ता तैयार करने में जुटे हैं. हालांकि बड़ी मात्रा में मलबा होने के कारण परिसर की सफाई में कुछ दिन लगने की संभावना है. वहीं ग्रामीणों के अनुसार, पहाड़ी में कहीं बादल फटने के कारण भारी मलबा मंदिर परिसर में घुसा है.
एक दानपात्र भी मलबे में दबने की सूचना
मंदिर के पुजारी दर्वान सिंह नेगी ने बताया कि मंदिर का एक दानपात्र भी मलबे की चपेट में आ गया है. बताया गया है कि दानपात्र में काफी धनराशि थी. बताया कि मंदिर तक का संपर्क मार्ग मलबे की भेंट चढने से आने-जाने में परेशानियां हो रही हैं. मंदिर प्रांगण की एक रेलिंग व सुरक्षा दीवार भी टूट गई है. ग्रामीणों ने मंदिर परिसर और क्षतिग्रस्त रास्ते की जानकारी तहसील प्रशासन को दे दी है. प्रशासन से मंदिर परिसर की सफाई और आवागमन मार्ग को जल्द दुरुस्त कराने के लिए आवश्यक मदद उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है.
कल्पेश्वर महादेव क्यों हैं खास?
- पंचकेदार में शामिल भगवान कल्पेश्वर महादेव का मंदिर चमोली की उर्गम घाटी में स्थित है.
- मंदिर एक प्राचीन प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है.
- गुफा के भीतर स्थित प्राचीन शिवलिंग की पूजा भगवान शिव की जटाओं के स्वरूप में की जाती है.
- मान्यता है कि पंचकेदार में भगवान शिव के जटा स्वरूप की पूजा यहीं होती है.
- कल्पेश्वर धाम की खासियत है कि इसके कपाट पूरे वर्ष श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुले रहते हैं.
- यहां देशभर से श्रद्धालु भगवान शिव की जटाओं के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
- प्राकृतिक गुफा, पहाड़ों और कल्पगंगा की धारा के बीच स्थित यह धाम आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है.

पूरन भिलंगवाल
वरिष्ठ पत्रकार पूरन भिलंगवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक, न्यायिक तथा जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जोशीमठ (जिला चमोली) के छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके पूरन 15 वर्षों से अधिक समय से समाचार पत्रों में लेखन एवं रिपोर्टिंग का काम कर रहे हैं. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. वर्तमान में वे चमोली से TV9 भारतवर्ष के संवादाता के रूप में जुड़े हुए हैं. पूर्व में वो एडीसी (सिविल) के सरकारी अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इससे उन्हें न्यायिक व्यवस्था, विधिक प्रक्रियाओं और प्रशासनिक विषयों की गहन समझ है. उन्होंने "पहाड़ Inside" नाम से अपना स्वतंत्र न्यूज़ पोर्टल भी संचालित किया, जिसने क्षेत्रीय और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. लगभग दो वर्ष पूर्व अपरिहार्य कारणों से इसका संचालन बंद कर दिया गया, किंतु स्वतंत्र एवं जनपक्षीय पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी बनी हुई है.
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