विदिशा में हुए कन्यादान योजना घोटाले में CEO जनपद पंचायत गिरफ्तार, ED की रिमांड पर

Published on 4 सित॰ 2026

भोपाल, 4 सितंबर 2026: भारतीय संस्कृति में कन्यादान पुण्य का काम होता है। सरकार ने योजना चलाई तो सरकारी अधिकारियों ने घोटाला कर डाला। थोड़ा बहुत नहीं 5,917 से अधिक फर्जी कन्याओं की शादी करवाई गई। यह सब कुछ विदिशा जिले की केवल एक जनपद पंचायत में हुआ। मामले की पहले EOW इन्वेस्टिगेशन हुई और फिर 5,917 से अधिक फर्जी बैंक खातों का खुलासा होते ही मामला ED को ट्रांसफर कर दिया गया। ED ने इन्वेस्टिगेशन के बाद CEO जनपद पंचायत को गिरफ्तार कर लिया है, ताकि पता लगाया जा सके कि, इस घोटाले में उसके साथ और कितने लोग शामिल हैं? 

सिरोंज विवाह सहायता योजना घोटाला: पूर्व CEO शोभित त्रिपाठी की गिरफ्तारी पर विस्तृत रिपोर्ट

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने 02.09.2026 को जनपद पंचायत, सिरोंज के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19(1) के तहत निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है। आरोपी पर आरोप है कि उसने अपने कार्यकाल के दौरान विवाह सहायता योजना के तहत सरकारी धन के फर्जी वितरण के माध्यम से करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी की।

एक उच्च पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किया गया यह कृत्य सार्वजनिक विश्वास का गंभीर उल्लंघन है। जब राज्य की कल्याणकारी मशीनरी का संरक्षक ही भ्रष्टाचार का सूत्रधार बन जाए, तो यह सामाजिक सुरक्षा की पूरी अवधारणा को कमजोर करता है। यह गिरफ्तारी इस बड़े घोटाले की कानूनी जवाबदेही तय करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।

Judicial Proceedings and Remand

भारत के कानूनी ढांचे में, विशेष PMLA अदालतें (Special PMLA Courts) मनी लॉन्ड्रिंग की जटिलताओं को सुलझाने और अपराध की आय (Proceeds of Crime) को ट्रैक करने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। ये अदालतें जांच एजेंसियों को साक्ष्य जुटाने के लिए आवश्यक न्यायिक समर्थन प्रदान करती हैं।

इस मामले में अदालती कार्यवाही का विवरण निम्न प्रकार है:

गिरफ्तार आरोपी शोभित त्रिपाठी को 03.09.2026 को माननीय विशेष न्यायालय (PMLA), भोपाल के समक्ष पेश किया गया। मामले की सघन जांच और साक्ष्यों के विश्लेषण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, माननीय न्यायालय ने आरोपी को 09.09.2026 तक ED की कस्टडी में भेज दिया है।

प्रवर्तन निदेशालय के लिए यह कस्टोडियल पूछताछ (Custodial Interrogation) अत्यंत आवश्यक है ताकि उस व्यापक 'मनी ट्रेल' (Money Trail) का खुलासा किया जा सके, जिसके माध्यम से सरकारी कोष से लूटी गई राशि को विभिन्न निजी खातों और संपत्तियों में निवेश किया गया था।

Background and EOW Findings

वित्तीय अपराधों की जांच में PMLA की कार्यवाही अक्सर 'अनुसूचित अपराध' (Scheduled Offense) पर आधारित होती है। इस मामले की शुरुआत भी मध्य प्रदेश की राज्य एजेंसी द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी से हुई थी। ED की वर्तमान जांच आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing - EOW), भोपाल द्वारा शोभित त्रिपाठी और अन्य के विरुद्ध दर्ज की गई FIR को आधार बनाकर शुरू की गई है।

जांच के प्रमुख तथ्यों का विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

  • मुख्य आरोपी: शोभित त्रिपाठी (तत्कालीन CEO, जनपद पंचायत, सिरोंज)
  • अपराध की अवधि: वर्ष 2019 से नवंबर 2021 तक
  • जांच के दायरे में कुल राशि: ₹30.18 करोड़
  • योजना के तहत निर्धारित सहायता: ₹51,000 प्रति लाभार्थी

एक पत्रकार के रूप में यदि हम ₹30.18 करोड़ के इस घोटाले का विश्लेषण करें, तो यह स्पष्ट होता है कि लगभग 5,917 से अधिक फर्जी मामले तैयार किए गए थे। इतनी बड़ी संख्या में 'भूतिया लाभार्थियों' (Ghost Beneficiaries) का सृजन बिना किसी व्यापक मिलीभगत के संभव नहीं है। यह राशि उन गरीब बेटियों के लिए थी जो पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के परिवारों से आती हैं, जिन्हें इस धोखाधड़ी के कारण अपने न्यायसंगत अधिकारों से वंचित होना पड़ा।

Modus Operandi of the Scam

प्रवर्तन निदेशालय की जांच ने प्रशासनिक तंत्र की खामियों का लाभ उठाकर किए गए एक सुव्यवस्थित और सुनियोजित षड्यंत्र (Calculated Exploitation) का पर्दाफाश किया है। जांच के अनुसार, आरोपी शोभित त्रिपाठी ने अन्यों के साथ मिलीभगत (Collusion with others) कर इस पूरी योजना को अंजाम दिया।

धोखाधड़ी के लिए अपनाई गई पद्धति इस प्रकार थी:

फर्जी और मनगढ़ंत आवेदन पत्रों (Fabricated Application Forms) का व्यापक स्तर पर उपयोग। योजना का लाभ उन अपात्र व्यक्तियों (Ineligible Persons) को पहुँचाया गया जो निर्माण श्रमिक की श्रेणी में आते ही नहीं थे।झूठे साक्ष्यों के आधार पर नए बैंक खाते खोले गए और मौजूदा खातों का दुरुपयोग कर उनमें राशि हस्तांतरित की गई। सरकारी राशि खातों में जमा होते ही उसे तुरंत कई किश्तों में नकद (Cash) के रूप में निकाल लिया गया, ताकि बैंकिंग ट्रेल को धुंधला किया जा सके।

इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला और अनैतिक पहलू 

इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला और अनैतिक पहलू कोविड-19 लॉकडाउन (COVID-19 Lockdown) के दौरान की गई सक्रियता है। एक तरफ जहां महामारी के कारण सार्वजनिक विवाह आयोजनों पर कानूनी प्रतिबंध था, वहीं दूसरी ओर कागजों पर हजारों विवाह संपन्न कराकर सहायता राशि का गबन किया जा रहा था। यह तथ्य सिद्ध करता है कि ऑडिट (Audit) और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की प्रक्रियाओं को जानबूझकर दरकिनार किया गया था।

Evidence Collection and Prior Actions

किसी भी वित्तीय अपराध को साबित करने के लिए डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेजी प्रमाण (Documentary Evidence) सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ED ने इस गिरफ्तारी से पहले एक ठोस आधार तैयार करने के लिए व्यापक छापेमारी की थी।

03.10.2025 को प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले से जुड़े संदिग्ध ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान (Search Operations) चलाया था। इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण (Digital Devices) जब्त किए गए थे।

अक्टूबर 2025 में की गई यह प्रारंभिक कार्रवाई ही वर्तमान गिरफ्तारी का मुख्य आधार बनी है। जब्त किए गए डेटा के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि यह घोटाला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक बड़ा नेटवर्क शामिल है।

प्रवर्तन निदेशालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच अभी भी सक्रिय है और आने वाले समय में इस 'मनी लॉन्ड्रिंग' नेटवर्क से जुड़े अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों पर भी गाज गिर सकती है।