अगर आप रोजाना Ola-Uber से कैब बुक करते हैं, Swiggy-Zomato से खाना मंगाते हैं या Amazon-Flipkart से ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो GST से जुड़ी यह खबर आपके लिए अहम है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की ओर से अलग-अलग बिजनेस मॉडल के आधार पर टैक्स दरों को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही GST दरों में बदलाव, इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिफंड की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, CBIC के GST मेंबर संजय मंगल ने NDTV Profit को बताया कि GST काउंसिल ने अलग-अलग बिजनेस मॉडल के बावजूद संबंधित प्लेटफॉर्म के लिए समान टैक्स व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य टैक्स नियमों को सरल बनाना और कारोबारियों के बीच बनी उलझन को दूर करना है।इस व्यवस्था में उन प्लेटफॉर्म को भी शामिल किए जाने की बात कही गई है, जो ग्राहकों को डिलीवरी पार्टनर्स से जोड़ते हैं, और उन कंपनियों को भी जो खुद डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराती हैं। हालांकि, 5% GST की दर किन सेवाओं और लेन-देन पर लागू होगी, इसकी पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचना से करना जरूरी है। इसे सभी कैब बुकिंग, फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स खरीदारी पर एक समान GST मानना सही नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग सेवाओं पर अलग नियम लागू हो सकते हैं।
साल में एक बार बदल सकती हैं GST दरें
सरकार GST व्यवस्था को ज्यादा व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, GST दरों में बदलाव को साल में एक बार, यानी 1 अप्रैल से लागू करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए नए वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले GST काउंसिल फैसला कर सकती है।इस कदम का मकसद कारोबारियों को टैक्स से जुड़े बदलावों की पहले से जानकारी देना और अनुपालन की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
ITC और रिफंड की प्रक्रिया होगी आसान
GST से जुड़े सुधारों के तहत रजिस्ट्रेशन, रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दावों की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी काम हो रहा है। मोटर वाहनों से जुड़े ITC के मामलों को अधिकारियों के समूह के सामने रखे जाने की बात कही गई है। वहीं, निर्माण क्षेत्र में ITC के दावों पर चर्चा अभी बाकी बताई गई है।
रिपोर्ट में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत जमा ITC के रिफंड से जुड़े नियमों में बदलाव का भी उल्लेख है। इसके तहत पात्र इनपुट सर्विस क्रेडिट और पुराने क्रेडिट के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं। कारोबारियों को इन बदलावों की वास्तविक प्रभावी तारीख और पात्रता की शर्तें आधिकारिक GST अधिसूचना के आधार पर जांचनी चाहिए।
अगले वित्त वर्ष से अनिवार्य हो सकता है IMS
इनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम (IMS) को अगले वित्त वर्ष से अनिवार्य बनाने की योजना भी बताई गई है। इस सिस्टम के जरिए कारोबारियों के इनवॉइस का मिलान आसान हो सकता है। इससे सप्लाई चेन से जुड़े रिकॉर्ड बेहतर तरीके से मिलाने और टैक्स देनदारी में अंतर के कारण जारी होने वाले नोटिस कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।इसके अलावा, CBIC फेसलेस असेसमेंट के प्रस्तावित ढांचे पर सार्वजनिक सुझाव भी आमंत्रित कर सकता है। फिलहाल यह व्यवस्था केंद्रीय GST प्रशासन के तहत रजिस्टर्ड करदाताओं के लिए प्रस्तावित बताई गई है।
GST कलेक्शन में 15% की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक, संजय मंगल ने बताया कि दरों में बदलाव के बाद प्रभावी GST दर घटकर 10.84% रह गई है। इसके बावजूद टैक्स के दायरे में आने वाली सप्लाई में बढ़ोतरी हुई है और पिछले तीन महीनों में राजस्व में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है।हालांकि, मासिक GST कलेक्शन के 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की समयसीमा को लेकर कोई निश्चित अनुमान नहीं दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, राजस्व में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद है।
आपके लिए क्या जरूरी है? कैब बुकिंग, फूड डिलीवरी या ऑनलाइन शॉपिंग करते समय केवल किसी एक GST दर की खबर के आधार पर यह न मानें कि हर सेवा पर समान टैक्स लगेगा। अंतिम दर सेवा की श्रेणी, लेन-देन और लागू आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगी।