मसूड़ों से बार-बार खून आना नहीं है मामूली बात! हार्ट के मरीज हो जाएं सतर्क - Haribhoomi

Published on 12 सित॰ 2026

Bleeding Gums: मसूड़ों से बार-बार खून आना नहीं है मामूली बात! हार्ट के मरीज हो जाएं सतर्क

Bleeding Gums: मसूड़ों से खून आना लोग सामान्य समझते हैं लेकिन ये दिल के मरीजों के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।

bleeding gums

मसूड़ों से बार बार खून आने के कारण और उपाय।

  • Published: 12 Sep 2026, 11:22 PM IST
  • Last Updated: 12 Sep 2026, 11:22 PM IST

Bleeding Gums: ब्रश करते समय या कुछ खाते वक्त मसूड़ों से कभी-कभार खून आना कई लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, मसूड़ों में सूजन या लालिमा है और मुंह से दुर्गंध भी आती है तो यह मसूड़ों की बीमारी का संकेत हो सकता है। खासकर पहले से हृदय रोग से जूझ रहे लोगों के लिए ओरल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है।

मसूड़ों की बीमारी और हृदय संबंधी समस्याओं के बीच संभावित संबंध को लेकर कई शोध हुए हैं। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि मसूड़ों की बीमारी सीधे तौर पर हार्ट डिजीज का कारण बनती है। फिर भी हार्ट के मरीजों को मुंह की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और लगातार खून आने पर डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए।

मसूड़ों से खून आने की क्या वजह हो सकती है?

मसूड़ों से खून आने की सबसे आम वजहों में प्लाक जमा होना और मसूड़ों में सूजन यानी जिंजिवाइटिस शामिल है। अगर लंबे समय तक इसका इलाज न कराया जाए तो समस्या बढ़कर पीरियडोंटाइटिस का रूप ले सकती है। इसमें मसूड़ों के साथ दांतों को सहारा देने वाले ऊतकों पर भी असर पड़ सकता है।

कभी-कभी बहुत जोर से ब्रश करने, गलत तरीके से फ्लॉस करने या मुंह की पर्याप्त सफाई न रखने से भी खून आ सकता है।

हार्ट के मरीजों को क्यों रहना चाहिए सावधान?

मसूड़ों की गंभीर बीमारी में शरीर में सूजन और संक्रमण से जुड़ी प्रक्रियाएं बढ़ सकती हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने ओरल हेल्थ और हृदय स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध का अध्ययन किया है। कुछ अध्ययनों में दोनों के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन कारण और प्रभाव का सीधा संबंध अभी पूरी तरह स्थापित नहीं माना जाता।

इसलिए हार्ट के मरीजों को मसूड़ों से लगातार खून आने, सूजन या संक्रमण जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

डेंटल चेकअप क्यों है जरूरी?

अगर मसूड़ों से बार-बार खून आता है तो डेंटिस्ट इसकी वजह की जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर दांतों की सफाई, प्लाक और टार्टर हटाने या मसूड़ों के इलाज की सलाह दी जा सकती है।

हार्ट के मरीजों को डेंटिस्ट को अपनी बीमारी और चल रही दवाओं के बारे में जरूर बताना चाहिए। खासतौर पर अगर वे खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं तो कोई भी डेंटल प्रक्रिया कराने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है। ऐसी दवाएं अपनी मर्जी से बंद नहीं करनी चाहिए।

ओरल हेल्थ बेहतर रखने के आसान तरीके

दिन में दो बार फ्लोराइड टूथपेस्ट से धीरे-धीरे ब्रश करें। दांतों के बीच की सफाई के लिए फ्लॉस या इंटरडेंटल क्लीनिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाना भी मसूड़ों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

अगर खून आने की समस्या लगातार बनी हुई है, मसूड़ों में दर्द या सूजन है, दांत हिल रहे हैं या मुंह में घाव ठीक नहीं हो रहा है तो डेंटिस्ट से जांच कराएं।

ध्यान रखें, स्वस्थ मसूड़े केवल खूबसूरत मुस्कान के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हार्ट की बीमारी होने पर नियमित मेडिकल जांच के साथ ओरल हेल्थ की देखभाल भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहतर है।

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

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लेखक: (कीर्ति)

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