Jul 30, 2026 04:47 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
बलूचिस्तान में आतंक का नया मामला सामने आया है। तुर्बत के पास केच जिले में अगवा किए गए छह मजदूरों के शव बरामद हुए हैं। सुरक्षा बलों ने इस घटना के लिए प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी जिम्मेदार ठहराया है।

बलूच लिबरेशन आर्मी ( फाइल)
बलूचिस्तान में आतंकवादी हिंसा एक बार फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। तुर्बत के पास केच जिले में अगवा किए गए छह निर्दोष मजदूरों के शव बरामद होने के साथ ही क्षेत्र में आतंक का एक नया अध्याय खुल गया है। सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से इस कायराना हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित आतंकी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BL) पर डाली है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह खूनी खेल 27 जुलाई को केच जिले के क्लाटुक इलाके में शुरू हुआ। हथियारबंद आतंकवादियों के एक समूह ने विकास कार्यों में लगे मजदूरों के एक काफिले को रास्ते में रोक लिया। उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी जिले के रहने वाले जावेद नाम के एक मजदूर को मौके पर ही गोली मारकर हत्या कर दी।
इसके बाद उन्होंने छह अन्य मजदूरों को जबरन अगवा कर लिया और अज्ञात स्थान की ओर ले गए। कई दिनों तक इन बंधकों का कोई सुराग नहीं मिल सका। और अब तुर्बत के पास एक दूरदराज और सुनसान इलाके से इन छह मजदूरों के शव बरामद किए गए। शवों की हालत देखकर साफ था कि उन्हें निर्ममता से मार दिया गया था। सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मृतकों में पंजाब के चार और खैबर पख्तूनख्वा के दो मजदूर शामिल थे। ये सभी लोग बलूचिस्तान के विभिन्न विकास कार्यों में लगे हुए थे।
बीएलए की ऑपरेशनल रणनीति में खतरनाक बदलाव
सीएनएन-न्यूज18 ने खुफिया और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि इस हमले को बीएलए की ऑपरेशनल रणनीति में एक बड़े और खतरनाक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पहले जहां संगठन मुख्य रूप से सुरक्षा बलों को निशाना बनाता था, अब वह चीनी निवेश, माइनिंग ऑपरेशन और खनिज विकास से जुड़ी परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और यहां तक कि स्थानीय लोगों को भी निशाना बना रहा है। संगठन का मकसद साफ है, इन परियोजनाओं को ठप करना और क्षेत्र में काम करने वाले हर व्यक्ति को डराना।
सूत्रों के मुताबिक, बीएलए की तरफ से जारी चेतावनियों का संदेश बेहद स्पष्ट और सीधा था। चीन के सहयोग से चल रही किसी भी परियोजना, खान या खनिज स्थल के पास काम करने वाले लोगों को चेतावनी दी गई है कि वे इन जगहों से दूर रहें। यह धमकी सिर्फ बाहरी प्रांतों से आने वाले मजदूरों के लिए नहीं, बल्कि पाकिस्तानी और चीनी विकास परियोजनाओं से जुड़े स्थानीय मजदूरों, इंजीनियरों, अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए भी है।
पहले भी हुई है इस तरह की घटनाएं
बताया जा रहा है कि केच जिले में हुई ये हत्याएं कोई अकेली घटना नहीं हैं। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि तुर्बत की इस घटना से ठीक पहले मश्केल इलाके में एक अलग हमले में कम से कम पांच और मजदूर मारे गए थे। ये दोनों घटनाएं बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा के एक सुनियोजित और समन्वित पैटर्न की ओर इशारा करती हैं। आतंकवादी संगठन एक साथ कई मोर्चों पर हमले कर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है।
यह नया हमला उस समय हुआ है जब बीएलए ने कुछ ही हफ्ते पहले मस्तुंग जिले में एक बड़े और चौंकाने वाले हमले की जिम्मेदारी ली थी। उस हमले में कथित तौर पर दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। दूसरी ओर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी परियोजनाओं और खनन कार्यों को निशाना बनाकर बीएलए न केवल आर्थिक गतिविधियों को बाधित करना चाहता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। बलूचिस्तान में चल रही इन परियोजनाओं से जुड़े कामगारों की सुरक्षा अब एक बड़ी चुनौती बन गई है।
