Bihar News : बिहार में गंगा किनारे सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली एक बड़ी परियोजना को अब महत्वपूर्ण मंजूरी मिल गई है। मुंगेर और भागलपुर के बीच प्रस्तावित फोरलेन गंगा पथ के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जल संसाधन विभाग ने कुछ जरूरी शर्तों के साथ पथ निर्माण विभाग को एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी कर दिया है। इस परियोजना के तहत गंगा किनारे सड़क के साथ-साथ कई घाटों को भी विकसित किया जाएगा।
प्रस्तावित गंगा पथ को पटना के जेपी गंगा पथ की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके बनने के बाद मुंगेर, सुल्तानगंज, भागलपुर और सबौर के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है। परियोजना में सड़क के अलावा रिटेनिंग वॉल, टो वॉल, छोटे-बड़े पुल, फ्लाईओवर, स्पर और अन्य संरचनाओं का निर्माण भी प्रस्तावित है।
दो हिस्सों में बनेगा गंगा पथ
पूरी परियोजना को दो प्रमुख खंडों में पूरा किया जाएगा। पहले खंड में मुंगेर के साफियाबाद से बरियारपुर और घोरघट होते हुए सुल्तानगंज तक फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। दूसरे खंड में सुल्तानगंज से भागलपुर होते हुए सबौर तक सड़क विकसित की जाएगी।
परियोजना का निर्माण हाईब्रिड एन्युटी मोड के तहत किया जाना है। इस व्यवस्था में निर्माण एजेंसी को परियोजना की लागत का एक बड़ा हिस्सा शुरुआती तौर पर खुद वहन करना होगा।
पहले खंड की लंबाई करीब 42 किलोमीटर
मुंगेर से सुल्तानगंज के बीच प्रस्तावित पहले खंड की कुल लंबाई 41.931 किलोमीटर होगी। इसमें करीब 30 किलोमीटर सड़क जमीन के स्तर पर बनाई जाएगी, जबकि लगभग 11.88 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड रोड का होगा। इसके अतिरिक्त करीब 957 मीटर लंबी कनेक्टिंग रोड भी बनाई जाएगी।
वहीं, सुल्तानगंज-भागलपुर-सबौर खंड की कुल लंबाई 41.258 किलोमीटर होगी। इसमें करीब 30.698 किलोमीटर सड़क जमीन पर और लगभग 10.56 किलोमीटर एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। इस हिस्से में रैंप, सर्विस रोड और कनेक्टिंग रोड भी परियोजना का हिस्सा होंगे।
गंगा किनारे बनेंगे और विकसित होंगे घाट
इस परियोजना की खास बात यह है कि सड़क निर्माण के साथ गंगा किनारे घाटों को भी विकसित किया जाएगा। पथ विकास निगम को निर्माण के दौरान नदी से जुड़े बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
परियोजना में रिटेनिंग वॉल, टो वॉल, व्हीकल अंडरपास, बॉक्स कल्वर्ट, छोटे-बड़े पुल, फ्लाईओवर और स्पर जैसी संरचनाएं बनाई जा सकती हैं। इनका उद्देश्य सड़क को सुरक्षित रखने के साथ-साथ नदी के कटाव और बदलती धारा से होने वाले संभावित नुकसान को कम करना है।
नदी की धारा प्रभावित हुई तो जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की
जल संसाधन विभाग ने NOC जारी करते हुए कई शर्तें भी तय की हैं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि गंगा पथ के निर्माण से नदी की प्राकृतिक धारा पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। निर्माण स्थल का समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाएगा।
सड़क इस तरह तैयार करनी होगी कि वहां जलजमाव की समस्या पैदा न हो। यदि परियोजना के कारण जलजमाव या नदी की धारा पर कोई प्रतिकूल असर पड़ता है तो उसके समाधान पर होने वाला खर्च पथ विकास निगम को ही उठाना होगा।
बांध और नदी क्षेत्र में मिट्टी काटने पर रोक
गंगा के कटाव से सुरक्षा को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। निर्माण के दौरान बांध या नदी की चाट भूमि से 25 मीटर तक के क्षेत्र में मिट्टी काटने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही नदी के बेड लेवल को किसी भी तरह नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकेगा।
निर्माण स्थल पर डेंजर पोस्ट लगाने और नदी की बदलती धारा पर लगातार नजर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। निर्माण के बाद बची सामग्री को हटाने की जिम्मेदारी भी परियोजना एजेंसी की होगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि NOC में तय शर्तों का पालन नहीं किया गया तो अनापत्ति प्रमाणपत्र को रद्द भी किया जा सकता है। अब NOC मिलने के बाद बिहार राज्य पथ विकास निगम परियोजना से जुड़े अगले चरण की कार्रवाई आगे बढ़ा सकेगा।