Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में वित्तीय संकट पर गरमाई बहस, वित्त मंत्री बोले- 'पैसों की कोई कमी नहीं', राजद ने उठाए ठेकेदारों के भुगतान पर सवाल

Published on 23 जुल॰ 2026

Bihar Assembly : बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। आकस्मिक निधि (Contingency Fund) से धन निकासी के मुद्दे पर शुरू हुई चर्चा जल्द ही बिहार में कथित वित्तीय संकट और ठेकेदारों के बकाया भुगतान तक पहुंच गई। राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में धन की कोई कमी नहीं है और सभी वित्तीय प्रक्रियाएं कानून के अनुरूप की गई हैं।

आकस्मिक निधि और डिजास्टर फंड में अंतर समझाया

बहस के दौरान वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने सबसे पहले आकस्मिक निधि और आपदा राहत कोष के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अक्सर दोनों को एक ही समझ लिया जाता है, जबकि दोनों की प्रकृति अलग-अलग है। उन्होंने बताया कि आपदा (Disaster) और आकस्मिकता (Contingency) दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं। बिहार में सरकार के पास आकस्मिक निधि (Contingency Fund) होती है, जिसका उपयोग केवल प्राकृतिक आपदाओं के लिए ही नहीं बल्कि अन्य आपात परिस्थितियों में भी किया जा सकता है।

वित्त मंत्री ने कहा कि यदि किसी विभाग को तत्काल धन की आवश्यकता होती है तो सरकार आकस्मिक निधि से राशि निकालती है और बाद में उसकी भरपाई कर दी जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आपदा की स्थिति में राहत कार्यों के लिए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भी प्रारंभिक राशि इसी निधि से जारी की जाती है। इसलिए इसे वित्तीय संकट से जोड़कर देखना उचित नहीं है।

राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार को घेरा

सरकार के जवाब से असंतुष्ट राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने सदन में कहा कि वे सरकार से यही स्पष्ट जवाब सुनना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि मंत्री के बयान से यह संकेत मिल गया है कि बिहार वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है।उन्होंने कहा कि मंत्री ने भले ही सीधे तौर पर वित्तीय संकट स्वीकार नहीं किया हो, लेकिन उनके जवाब से यही स्पष्ट होता है कि सरकार को आकस्मिक निधि का सहारा लेना पड़ रहा है। कुमार सर्वजीत ने कहा कि बिहार की जनता भी यही सवाल पूछ रही है कि क्या राज्य की आर्थिक स्थिति वास्तव में कमजोर हो चुकी है। राजद विधायक ने कहा कि यदि सरकार के पास पर्याप्त धन है तो फिर लगातार यह स्थिति क्यों बन रही है कि अलग-अलग मदों में आकस्मिक निधि का उपयोग करना पड़ रहा है।

वित्त मंत्री ने दिया विस्तृत जवाब

विपक्ष के आरोपों पर वित्त मंत्री विजेंद्र यादव दोबारा खड़े हुए और उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले का वित्तीय संकट से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) में कई बार केंद्र सरकार से राशि मिलने में थोड़ी देरी हो जाती है। ऐसी स्थिति में योजनाओं का काम प्रभावित न हो, इसलिए अस्थायी व्यवस्था के रूप में आकस्मिक निधि से राशि उपलब्ध कराई जाती है। बाद में केंद्र से पैसा मिलने पर उसकी भरपाई कर दी जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरी प्रक्रिया संबंधित अधिनियम और वित्तीय नियमों के अनुरूप होती है। इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या आर्थिक संकट जैसी स्थिति नहीं है।

ठेकेदारों के भुगतान का मुद्दा भी उठा

इसके बाद कुमार सर्वजीत ने सरकार से एक और सवाल किया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में राज्य के पास धन की कोई कमी नहीं है तो पिछले दो वर्षों से कई ठेकेदारों को समय पर भुगतान क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के पद पर बदलाव के बाद पुराने कई टेंडरों को रद्द कर दिया गया। उन्होंने पूछा कि यदि वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं थी तो ऐसी नौबत आखिर क्यों आई। राजद विधायक ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि ठेकेदारों के बकाया भुगतान और टेंडर रद्द होने की घटनाएं सरकार के दावों पर सवाल खड़े करती हैं।

ग्लोबल टेंडर नीति में बदलाव का हवाला

इन आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने कहा कि टेंडर रद्द होने का कारण वित्तीय संकट नहीं बल्कि सरकार की नई नीति थी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने निर्णय लेकर ग्लोबल टेंडर व्यवस्था में बदलाव किया है। नई नीति के तहत 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया है। इसी कारण कुछ पुराने ग्लोबल टेंडरों को निरस्त किया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि विपक्ष इस विषय को ध्यानाकर्षण या अलग चर्चा के माध्यम से उठा सकता था, लेकिन इसे वित्तीय संकट से जोड़ना उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक ठेकेदारों के भुगतान का सवाल है, विभागों से सड़क निर्माण और अन्य कार्यों की रिपोर्ट मांगी गई है। जिन परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हैं, उनका भुगतान किया जाएगा।

सरकार का दावा- राज्य में धन की कोई कमी नहीं

बहस के अंत में वित्त मंत्री ने दोहराया कि बिहार सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि आकस्मिक निधि का उपयोग पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के तहत किया जाता है और इसे वित्तीय संकट का संकेत मानना गलत होगा। हालांकि विपक्ष ने सरकार के जवाब से असहमति जताते हुए राज्य की आर्थिक स्थिति और विकास योजनाओं के भुगतान को लेकर अपने सवाल बरकरार रखे। विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देर तक जारी रही।