Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि शुरू हो गई है. यह नवरात्रि भी चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह पवित्र होती है. इस नवरात्रि में गुप्त रूप से व्रत और पूजा की जाती है. अगर आप भी गुप्त नवरात्रि व्रत कर रहे हैं तो राजकुमार के भाग्य बदलने वाली यह कथा जरूर पढ़ें.
Published byNamrata Mohanty
Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि शुरू हो गई है. यह नवरात्रि भी चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह पवित्र होती है. इस नवरात्रि में गुप्त रूप से व्रत और पूजा की जाती है. अगर आप भी गुप्त नवरात्रि व्रत कर रहे हैं तो राजकुमार के भाग्य बदलने वाली यह कथा जरूर पढ़ें.
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Ashadha Gupt Navratri 2026 Vrat Katha Photograph: (ai-generated)
Ashadha Gupt Navratri 2026: आज यानी 15 जुलाई 2026 से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि शुरू हो गई है. इस नवरात्रि में दुर्गा मां के शक्ति स्वरूपों की पूजा होती है. इन्हें गुप्त 10 महाविद्याएं कहते हैं. इन देवियों की शक्ति और ऊर्जा बहुत तेज होती है. सनातन धर्म में चार प्रकार की नवरात्रि होती हैं. दो सामान्य जिन्हें हम चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र कहते हैं और दो गुप्त नवरात्रि माघी गुप्त नवरात्रि और आषाढ़ गुप्त नवरात्र. इस नवरात्र में भी कलश स्थापित करने का विधान होता है. इन देवियों की इस दौरान विशेष रूप से पूजा होती है. तंत्र साधना और देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह नवरात्रि बहुत खास मानी जाती है.
ऐसे में अगर आप भी गुप्त नवरात्रि के व्रत रख रहे हैं तो इस पावन कथा का पाठ जरूर करें.
घटस्थापना का मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा के अनुसार, भक्त यदि गुप्त नवरात्रि का पालन कर रहे हैं. उनके लिए आज घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:33 से लेकर सुबह 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इस समय पुष्य नक्षत्र और अमृत काल रहेगा. आप इस अवधि में व्रत क उद्यापन कर सकते हैं. कलश स्थापित कर सकते हैं और दुर्गा माता का आह्वान कर सकते हैं.
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की दिव्य कथा
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पावन कथा के मुताबिक, प्राचीन काल में कौशल नामक राज्य में सुदर्शन नाम का एक राजकुमार रहता था. राजमहल में षड्यंत्र और विद्रोह की वजह से उसकी जान खतरे में आ गई थी. इस कारण अपनी जान बचाने के लिए उसे अपनी माता के साथ वन में रहना पड़ता था. एक दिन राजकुमाप जंगल में खेल रहा था कि तभी उसे पेड़ों के बीच से आवाज आई. राजकुमार अभी बच्चा था इसलिए उसने सुनाई पड़े शब्द को दो-तीन बार दोहराना शुरू कर दिया. दरअसल, राजकुमार इस बात से अनभिज्ञ था कि वो अनजाने में ही क्लीं बीज मंत्र का जाप कर रहा था. ये दुर्गा मां का शक्तिशाली मंत्र है. जिस वक्त राजकुमार के साथ ये सब हो रहा था तो गुप्त नवरात्रि चल रही थी. इसलिए, दुर्गा मां राजकुमार से प्रसन्न हो गईं, उन्होंने उसे उसका खोया राज्य वापस देने का आशीर्वाद दिया. इसके बाद सुदर्शन राजकुमार राज्य का राजा बन गया.
गुप्त नवरात्रि से जुड़ी अन्य कथा
इस कथा के अनुसार, एक दिन ऋषि श्रृंगी पीपव के वृक्ष के नीचे बैठ लोगों की परेशानियों को सुन रहे थे तभी वहां एक महिला आती है. महिला ने कहा कि वह दुर्गा मां की कृपा प्राप्त नहीं कर पा रही है क्योंकि उसका पति बुरे कर्मों सें लिप्त रहता है. साथ ही उसे भी बुरे मार्ग पर चलने के लिए मजबूर करता है. पति के कारण न वो व्रत कर पाती है और न ही भगवान की पूजा. उसकी व्यथा सुन ऋषि श्रृंगी ने उसे बताया कि साल में दो गुप्त नवरात्रियां आती हैं, जिनमें देवी के दस महाविद्या स्वरूपों की पूजा होती है. अगर तुम इन नवरात्रि में श्रद्धा के साथ मां दुर्गा का आह्वान करोगी और उनकी पूजा करोगी त वह निश्चित ही तुमसे प्रसन्न होंगी. इसके बाद महिला ने ऋषि द्वारा बताए गए तरीकों से गुप्त नवरात्रि व्रत का पालन किया. इससे उसके पति ने बुरे कर्म करने छोड़ दिए. महिला के जीवन के सारे दुख-कष्ट मिट गए और सफलताएं आने लगी.
दुर्गा मां का शक्तिशाली बीज मंत्र
दुर्गा मां के बीच मंत्र को नर्वाण मंत्र भी कहते हैं. इसे क्लीं बीज मंत्र भी कहते हैं. यह मंत्र है- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे. इस महामंत्र को आकर्षण और महाकाली का मंत्र कहते हैं. जो भी भक्त इस मंत्र का जाप करता है, उसे अपार साहस, ऊर्जा और आकर्षण प्राप्त होता है. इस मंत्र का नियमित जाप करने से जीवन से दुर्भाग्य खत्म होता है. इच्छाएं पूर्ण होती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)