Anant Chaturdashi 2026 पर गणपति विसर्जन किया जाएगा। जानें बप्पा को विदा करने से पहले उत्तर पूजा कैसे करें, क्या भोग लगाएं और किन गलतियों से बचें।
Anant Chaturdashi 2026
- Published: 16 Sep 2026, 10:41 AM IST
- Last Updated: 16 Sep 2026, 10:41 AM IST
Anant Chaturdashi 2026: गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के साथ होता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर से शुरू हुआ और गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इन दिनों घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना कर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद अपनी परंपरा और श्रद्धा के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
गणपति विसर्जन को केवल मूर्ति को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं माना जाता, बल्कि इसे बप्पा को सम्मान और श्रद्धा के साथ विदाई देने की परंपरा से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि विसर्जन के दौरान कुछ धार्मिक और व्यावहारिक बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
विसर्जन से पहले करें उत्तर पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति विसर्जन से पहले उत्तर पूजा करने की परंपरा है। इस दौरान भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है और उन्हें भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।
कई जगहों पर उत्तर पूजा के बाद गणपति की प्रतिमा को उसके स्थापित स्थान से थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा भी है। इसे बप्पा की विदाई की तैयारी से जोड़कर देखा जाता है।
बप्पा को विदा करते समय क्या करें?
विसर्जन के लिए निकलने से पहले गणपति बप्पा को फूल, दूर्वा, मोदक और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद आरती करके भगवान गणेश से जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगने की परंपरा है।
प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक सम्मानपूर्वक ले जाना चाहिए। इस दौरान परिवार के सदस्य और श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ जैसे जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देते हैं।
गणपति विसर्जन में किन बातों से बचें?
गणपति विसर्जन के दौरान जल्दबाजी और लापरवाही से बचना चाहिए। प्रतिमा को सम्मानपूर्वक ले जाना और विसर्जन की प्रक्रिया को शांतिपूर्वक पूरा करना चाहिए।
धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखना जरूरी है। ऐसी जगह प्रतिमा विसर्जित करने से बचना चाहिए, जहां इससे जल प्रदूषण या पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता हो। स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थल और नियमों का पालन करना उचित है।
क्या बप्पा को अकेले विदा करना चाहिए?
गणपति विसर्जन को गणेश उत्सव का अंतिम चरण माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में परिवार और भक्तों के साथ मिलकर बप्पा को विदाई देने की भावना प्रमुख रही है। ऐसे में संभव हो तो परिवार के सदस्य साथ मिलकर गणपति की आरती करें और श्रद्धा के साथ उन्हें विदा करें।
डिस्क्लेमर: इस खबर में बताए गए पूजा और विसर्जन से जुड़े नियम धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा-विधि और विसर्जन की परंपराएं अलग हो सकती हैं।