Agra News: सरस्वती शिशु मंदिर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव, सजी संस्कृति की भव्य झांकियां - Up18 News

Published on 3 सित॰ 2026

आगरा: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन और मंगल अवसर पर सरस्वती शिक्षा परिषद के तत्वावधान में आगरा के उत्तर विजय नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में एक अत्यंत भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम और रोमांचक दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह पूरा आयोजन भारी उत्साह, उमंग और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर विद्यालय का पूरा परिसर भारतीय संस्कृति, पारंपरिक धरोहर और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की अनूठी और मनमोहक छटा से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय के छोटे-छोटे भैया-बहनों ने श्री कृष्ण, राधा और विभिन्न गोप-गोपियों का मनमोहक रूप धारण किया। इसके बाद उन्होंने मंच पर एक से बढ़कर एक सुंदर नृत्य, गीत, नाटिका और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा, उनके गजब के आत्मविश्वास और शानदार कला प्रदर्शन ने वहां मौजूद सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट मेहमानों और अभिभावकों का दिल जीत लिया।

इस पूरे महोत्सव का सबसे मुख्य और रोमांचक आकर्षण दही-हांडी प्रतियोगिता रही। छात्र-छात्राओं ने पूरे जोश और उत्साह के साथ अनुशासित होकर मानव पिरामिड (मानव मीनार) बनाया और दही-हांडी को सफलतापूर्वक फोड़ने का अद्भुत कारनामा दिखाया। इस प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को साहस, आपसी सहयोग, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना (टीम वर्क) का एक बेहतरीन संदेश मिला। जैसे ही दही-हांडी की मटकी फूटी, पूरा विद्यालय परिसर ‘जय श्रीकृष्ण’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।

​सांस्कृतिक मंच प्रस्तुतियों और दही-हांडी प्रतियोगिता—दोनों ही प्रमुख स्पर्धाओं में सरस्वती शिशु मंदिर, उत्तर विजय नगर की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया और विद्यालय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। विद्यार्थियों की इस उल्लेखनीय सफलता पर पूरे विद्यालय परिवार, शिक्षकों और अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

​इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल (जज) की भूमिका में शहर के कई जाने-माने प्रतिष्ठित चेहरे शामिल रहे। इनमें प्रमुख रूप से शिक्षाविद एवं साहित्यकार श्रुति सिन्हा, प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना वीरा सक्सेना, महिला शांति सेवा की अध्यक्ष वत्सला प्रभाकर और फिल्म निर्देशक सूरज तिवारी शामिल थे। सभी निर्णायकों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

​इस गरिमामयी आयोजन में कई दिग्गज हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री राकेश गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा सरस्वती शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रमोद सारस्वत, मंत्री महेंद्र गर्ग, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार अग्रवाल, अतुल ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की निदेशक एवं विशिष्ट अतिथि आशु मित्तल, रुपाली अग्रवाल, विद्यालय अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, प्रबंधक किशोरी श्याम गोयल, कोषाध्यक्ष भविष्य अग्रवाल, सचिन मंगल, अतुल गुप्ता, प्रवीण गर्ग, गौरव वार्ष्णेय, फतेहपुर सीकरी के प्रबंधक, समाजसेविका बबीता पाठक और रवीन्द्र तिवारी सहित क्षेत्र के तमाम गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

​पधारे हुए सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों की बेहतरीन प्रस्तुतियों और प्रतियोगिताओं में दिखाए गए उनके उत्कृष्ट कौशल की जमकर सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को हमारी प्राचीन एवं गौरवशाली भारतीय संस्कृति, संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।

​विद्यालय के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत और अभिनंदन किया तथा दोनों स्पर्धाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बधाई दी। इसी विद्यालय के पुरातन छात्र रहे राज्य मंत्री राकेश गर्ग ने अपने पुराने दिनों की यादों को साझा करते हुए विद्यालय से जुड़ी अपनी स्मृतियों को ताजा किया।

कार्यक्रम के अंत में प्रबंध समिति और संपूर्ण विद्यालय परिवार की तरफ से सभी पधारे हुए अतिथियों, अभिभावकों और उपस्थित नागरिकों के लिए स्नेहभोज (प्रीतिभोज) की सुंदर व्यवस्था की गई थी। अतिथियों ने विद्यालय द्वारा किए गए इस भव्य प्रबंध, बच्चों की कलात्मक प्रस्तुतियों और शालीन आतिथ्य की खुलकर प्रशंसा की।

इस पूरे और विशाल आयोजन को सफलता के मुकाम तक पहुंचाने में विद्यालय के प्रधानाचार्य अरविंद तिवारी, समस्त आचार्य-आचार्या परिवार, कर्मठ विद्यार्थियों और अभिभावकों का विशेष और सराहनीय सहयोग रहा। यह आयोजन एक बार फिर यह साबित कर गया कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, संस्कृति और भारतीय परंपराओं का मेल आने वाली पीढ़ी के लिए कितना सार्थक और आवश्यक है।