सेकंड वर्ल्ड वॉर के लगभग 85 वर्ष बाद जर्मनी में राजनीतिक विचारधारा बदलाव के लिए करवटें ले रही हैं. जर्मनी में नाजी दौर के बाद पहली बार किसी राज्य में दक्षिणपंथी सरकार बनने की प्रबल संभावना है. इससे जर्मनी के समाज में उथल-पुथल मचा हुआ है. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पार्टी क्रिश्चयन डेमोक्रेटिक यूनियन को तगड़ा झटका लगा है.
जर्मनी के सैक्सनी अनहाल्ट प्रांत में हुए चुनाव में कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टनेटिव फॉर जर्मनी पार्टी (AfD) ने बंपर जीत हासिल की है.
6 सितंबर 2026 को हुए लैंडटैग चुनाव में एएफडी (AfD) ने 43.8 प्रतिशत वोटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की, यह उनके 2021 के नतीजे (20.8%) से दोगुना से भी अधिक है.
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पार्टी क्रिश्चयन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) को सिर्फ 17.2 प्रतिशत वोट मिले हैं.
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इन नतीजों ने जर्मनी में नाजियों जैसी विचारधारा वाली पार्टी के आने की आहट दे दी है. पूर्वी राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में AfD बहुमत हासिल करने से बस थोड़ा ही पीछे रह गई है. AfD को जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने चरमपंथी समूह माना है.
मर्ज़ ने कहा कि उनकी सेंटर-राइट पार्टी CDU इस बात से "बहुत हैरान" है कि उसे "सालों, बल्कि दशकों में चुनाव में सबसे बड़ी हार" का सामना करना पड़ा है. हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि वे पार्टी की कमान संभाले रखने के लिए पक्के इरादे वाले हैं और कहा कि "हार मान लेना मेरे लिए कोई विकल्प नहीं है."
दोराहे पर खड़ा है जर्मनी
AfD की जीत जर्मनी और मर्ज़ के लिए एक बड़ी चुनौती है, खासकर ऐसे समय में जब यूरोप कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. इनमें यूक्रेन के खिलाफ़ रूस की लगातार आक्रामकता, NATO देशों को निशाना बनाने वाला संदिग्ध भियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुश्किल संबंध शामिल हैं.
इस चुनाव के नतीजों ने जर्मनी को राजनीतिक दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है. जर्मनी की सरकारी मीडिया एजेंसी डायचे वेले के अनुसार सैक्सनी अनहाल्ट में देश के सिर्फ 3 फीसदी मतदाता हैं. ये संख्या तो बड़ी नहीं है, लेकिन यहां मतदाताओं की पसंद ने जर्मनी में सनसनी पैदा कर दी है. यहां के मतदाताओं का कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी AfD को वोट देना दूसरे प्रांतों के लिए मिसाल बन सकती है.
जर्मनी में अगले दो हफ्ते में मैक्लेनबुर्ग वेस्ट पोमेरेनिया और बर्लिन में चुनाव होने वाले हैं. वहां के चुनावों पर इन नतीजों का असर हो सकता है.
AfD को सहयोगियों की जरूरत
'ऑल्टरनेटिव फ़ॉर जर्मनी' राज्य विधानसभा में पूर्ण बहुमत चाहती थी ताकि वह अकेले सरकार चला सके और मुख्यधारा की पार्टियों द्वारा उसके साथ काम करने से इनकार करने की 'फ़ायरवॉल' को पार कर सके.
अंतिम नतीजों में AfD तीन सीटों से पीछे रह गई. 83 सदस्यों वाली संसद में उसके 39 विधायक चुने गए हैं. AfD के नेता 35 साल के उलरिच जीगमुंड ने कहा कि उनकी पार्टी अल्पसंख्यक सरकार जैसे 'खेलों' में शामिल नहीं होगी. लेकिन यह साफ नहीं था कि उसके बंटे हुए विरोधी उसके बिना कोई स्थिर सरकार कैसे बना पाएंगे.
उलरिच जीगमुंड को अब इस राज्य में सरकार बनाने के लिए अपनी विचारधारा जैसी सहयोगी पार्टियों की तलाश करना होगी.
AfD से क्यों डरी हुई है जर्मनी की जनता
सैक्सनी अनाहल्ट में AfD की जीत ने जर्मनी के उदारवादी विचारधारा के लोगों को नाजी जर्मनी की याद दिला दी है, जब देखते ही देखते ही जर्मनी कुछ ही सालों में हिटलर की दक्षिणपंथी राजनीति की गिरफ्त में आ गया था. अब लोगों को ऐसी ही आशंका नजर आ रही है.
AfD जर्मनी की राष्ट्रीय संसद में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और यह पूर्व कम्युनिस्ट और कम समृद्ध पूर्वी हिस्से में सबसे मज़बूत है, जहां सैक्सनी-अनहाल्ट स्थित है.
सैक्सनी-अनहाल्ट में इसकी क्षेत्रीय शाखा उन कई शाखाओं में से एक है जिन्हें घरेलू खुफिया एजेंसी ने दक्षिणपंथी चरमपंथी समूह के तौर पर क्लासिफाई किया है; एजेंसी का कहना है कि इसके सदस्य मुस्लिम देशों से आए प्रवासियों की बुराई करते हैं और ऐसी ही अन्य बातें करते हैं.
यह पार्टी "रीमाइग्रेशन" (वापस भेजने) की बात करती है, जो प्रवासियों को देश से बाहर निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील शब्द है. पड़ोसी राज्य में इसके नेता ने जानबूझकर नाजी नारे का इस्तेमाल करने के लिए मिली दो सज़ाओं के ख़िलाफ़ अपील की थी. ये पार्टी रूस के साथ संबंदों को सुधारने की समर्थक है. और यूक्रेन को सहायता बंद करने और यूरो या यूरोपीय संघ से दूरी बनाने पर जोर देते हैं. घरेलू स्तर पर पारंपरिक परिवार मूल्यों, स्कूलों में प्राइड फ्लैग पर प्रतिबंध, कर कटौती और सामाजिक कल्याण में कमी की बात करते हैं. ये नीतियां मुख्यधारा की पार्टियों से काफी अलग और विवादास्पद मानी जाती हैं.
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