कानपुर में नकली सीमेंट बनाने वाली अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़, ACC और अंबुजा के नाम पर बेची जा रही थी घटिया सामग्री - Up18 News

Published on 16 अक्टू॰ 2026

कानपुर: अपने सपनों का आशियाना मजबूत बनाने के लिए लोग अक्सर नामी-गिरामी कंपनियों की सीमेंट पर भरोसा करते हैं, लेकिन यदि उसी ब्रांड के नाम पर धड़ल्ले से नकली या मिलावटी सीमेंट बाजार में बेची जाने लगे, तो न केवल मकानों की मजबूती दांव पर लग जाती है, बल्कि आम जनता की गाढ़ी कमाई भी खतरे में पड़ जाती है।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ‘ACC’ और ‘अंबुजा’ जैसी प्रतिष्ठित सीमेंट कंपनियों के नाम पर कथित तौर पर नकली और मिलावटी सीमेंट तैयार कर खुलेआम बाजार में बेचने के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने फैक्ट्री संचालक नीरज गुप्ता और धीरज गुप्ता समेत चार नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

​बुंदेलखंड से नीलामी में खरीदा जाता था एक्सपायर्ड सीमेंट

मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस जांच के मुताबिक, कानपुर के पनकी औद्योगिक क्षेत्र में एक गुप्त फैक्ट्री संचालित की जा रही थी, जहां खराब और एक्सपायर्ड हो चुके सीमेंट को भारी मात्रा में मंगाया जाता था। यह पूरा गिरोह बुंदेलखंड क्षेत्र से नीलाम होने वाले एक्सपायर्ड सीमेंट को मात्र 10 से 20 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खरीदता था। इसके बाद इस बेकार सीमेंट को मिक्सर मशीनों में दोबारा पीसकर उसमें अन्य सामग्री मिलाई जाती थी और फिर उसे ACC तथा अंबुजा जैसी नामी कंपनियों की असली छपाई वाली नई बोरियों में भरकर बाजार में सप्लाई के लिए तैयार किया जाता था। महज 30 रुपये प्रति बोरी की लागत वाले इस माल को बाजार में 250 से 280 रुपये प्रति बोरी के ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।

प्राइवेट से लेकर सरकारी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं तक थी सप्लाई

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस शातिर गैंग ने प्राइवेट सेक्टर के साथ-साथ सरकारी और बड़े निर्माण कार्यों में भी अपनी पैठ बना रखी थी। आरोपियों ने सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के ठेकों में आसानी से सीमेंट खपाने के लिए बाकायदा ACC और अंबुजा सीमेंट की डीलरशिप भी ले रखी थी। इस अवैध कारोबार में मेरठ के सुनील मित्तल और निशांत मित्तल के नाम भी सामने आए हैं।

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरोह हर महीने करीब 30 हजार बोरी नकली सीमेंट की सप्लाई करता था। हैरान करने वाली बात यह है कि इस मिलावटी और नकली सीमेंट की आपूर्ति लखनऊ एयरपोर्ट और करीब 10 जिलों में ‘सीएम ग्रिड’ (CM Grid) के तहत बन रही सड़कों के ठेकेदारों तक किए जाने की गंभीर आशंका जताई जा रही है।

​विजिलेंस टीम की छापेमारी, आरोपी फरार

नामी सीमेंट कंपनियों को लंबे समय से पनकी क्षेत्र में उनके ब्रांड नेम का दुरुपयोग कर नकली सीमेंट बेचे जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इसी बिना पर कंपनी की विजिलेंस टीम ने अपने स्तर पर गोपनीय जांच की और स्थानीय पुलिस को इसकी पुख्ता जानकारी दी। सूचना के आधार पर जब पुलिस और टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा, तो वहां ACC और अंबुजा के लोगो वाली एक हजार से अधिक खाली व भरी हुई बोरियां बरामद हुईं। मौके पर दो ट्रक भी खड़े थे, जिन पर मजदूर सीमेंट की बोरियां लाद रहे थे। हालांकि, पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही फैक्ट्री संचालक और अन्य आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब हो गए।

फिलहाल, कानपुर पुलिस इस पूरे सिंडिकेट और अंतरजिला नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह फर्जी पैकेजिंग यूनिट असल में कहां संचालित होती थी, यह नकली सीमेंट किन-किन डीलरों और निर्माण स्थलों तक पहुंचाया गया है तथा अब तक कौन-कौन लोग इसके झांसे में आ चुके हैं। इस बड़े फर्जीवाड़े के वास्तविक दायरे और इसमें संलिप्त अन्य चेहरों का खुलासा पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।