एक साल में बंद हो गए 9900 सरकारी स्कूल! क्या छात्र हैं इसकी वजह?

Published on 11 अग॰ 2026

यूडीआईएसई+ के नए आंकड़े सामने आ गए हैं, जिसमें कई हैरान कर देने वाले खुलासे हुए हैं. आंकड़ों के मुताबकि, करीब एक साल में 9900 सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय बंद हो गए हैं. रिपोर्ट में माना गया है कि इसमें सबसे ज्यादा गिरावट मेघालय, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में दर्ज हुई है. 

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क्यों बंद हो रहे हैं स्कूल?

क्यों बंद हो रहे हैं स्कूल?

जहां एक ओर सरकारी नौकरी का क्रेज दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. वहीं, सरकारी स्कूलों का हाल दिन पर दिन खराब होता जा रहा है. यूडीआईएसई+ के नए आंकड़ों में कई हैरान कर देने वाले खुलासे हुए हैं. संसद में पेश किए गए आंकड़ों में बताया गया है कि पिछले साल एक साल में कितने सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में बंद किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक साल में करीब 9900 हजार स्कूलों पर ताला लगा दिया गया है.  

क्या है रिपोर्ट में? 

लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2024-25 में देश में सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 8.89 लाख से अधिक थी. लेकिन साल 2025-26 में यह घटकर 8.80 लाख रह गई है. इसका मतलब साफ है कि पिछले एक साल में 9900 सरकारी स्कूल बंद हो गए. 

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किन राज्यों में सबसे ज्यादा कमी? 

आंकड़े बताते हैं कि इसमें सबसे ज्यादा गिरावट मेघालय में दर्ज की गई है. वहां सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की संख्या में दो हजार से अधिक की कमी आई है. इसके बाद इस लिस्ट में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश का नाम शामिल है. दोनों राज्यों में भी हजारों स्कूलों को बंद किया गया है.

बढ़त भी हुई है दर्ज 

बता दें कि जहां कई राज्यों में संख्या में गिरावट दर्ज की गई है वहीं, कई जगहों पर इनमें बढ़त भी हुई है. बिहार में सरकारी स्कूलों की संख्या में बदल हुई है. इसके साथ ही  छत्तीसगढ़ में भी स्कूलों की संख्या थोड़ी सी बढ़ी है. 

क्यों बंद हो रहे हैं इतने स्कूल? 

लेकिन इन सब के बीच जो सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है वह ये है कि आखिर क्या वजह है कि इतने बड़ी संख्या में स्कूल बंद हो रहे हैं. संसद में इस सवाल को उठाया गया कि क्या छात्रों की वजह से इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों को बंद किया गया है? लेकिन शिक्षा मंत्रालय ने यह साफ नहीं किया कि कुल कम हुए स्कूलों में से कितने वास्तव में छात्र संख्या घटने की वजह से बंद हुए. 

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