खाद्य में किसका भाग ?: निजी कंपनी को 99 करोड़ का अनियमित भुगतान, 7 IAS, 12 कर्मी जांच के घेरे में - Jaipur News

Published on 10 सित॰ 2026

जयपुर1 घंटे पहलेलेखक: मनोज शर्मा

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  • खाद्य निगम में पोस मशीन, आईरिस स्कैनर और ई-वेइंग स्केल प्रोजेक्ट में गड़बड़ी मंत्री ने 18 मई को कार्रवाई के आदेश दिए, इसके बाद 3 महीने तक फाइल घूमती रही

राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड में पोस मशीन, आइरिस स्कैनर और ई-वेइंग स्केल प्रोजेक्ट के तहत निजी कंपनियों मैसर्स बालाजी इन्फोल्यूब और मैसर्स कॉम्पेक्ट कम्प्यूटर्स एंड पेरिफेरल्स को किए गए 119 करोड़ के भुगतान पर सवाल उठे हैं। अतिरिक्त खाद्य आयुक्त की अध्यक्षता वाली जांच समिति की 315 पेज की रिपोर्ट में निविदा प्रक्रिया, क्रियान्वयन और भुगतान में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए 7 आईएएस सहित 12 कार्मिकों पर सवाल उठाए हैं।

भास्कर के पास जांच रिपोर्ट और प्रकरण से जुड़ी 11 पेज की नोटशीट है। दस्तावेज बताते हैं- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने 18 मई को रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद कार्रवाई, अनियमित भुगतान की वसूली तथा वेंडर्स पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद फाइल 3 महीने तक विभागीय स्तर पर ‘डिस्कस' टिप्पणियों के बीच घूमती रही। समिति का गठन 6 अप्रैल को किया गया था। समिति ने 12 मई को रिपोर्ट मंत्री को सौंपी।

फर्मों ने मुफ्त में उठाया पैसा, कार्रवाई प्रक्रियाधीन : गोदारा

कांग्रेसराज में दोनों लैंडर्स ने एमओयू किया था। एमओयू की शर्तों का पालन नहीं किया और पैसा उठाते रहे। हमने इस मामले की जांच करवाई है। जिसमें गड़बड़ी सामने आई है। कार्रवाई के लिए मामला प्रक्रियाधीन है। -सुमित गोदारा, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री

सबूतों के साथ पूरी पड़ताल; 98.93 करोड़ का गलत भुगतान... और इन्हें माना जिम्मेदार

  • रिपोर्ट के अनुसार, भुगतान की शर्तों के विपरीत सितंबर 2021 से जून 2025 तक फर्मों को नियोजित मानव संसाधनों के मासिक भुगतान के सिस्टम जनरेटेड दस्तावेजी साक्ष्य प्राप्त किए बिना 98 करोड़ 93 लाख 39 हजार 505 रु. का भुगतान किया गया।
  • ब्लॉक स्तर पर मानव संसाधन नहीं लगाने के बावजूद 18.69 करोड़ रु. का भुगतान कर दिया।
  • एमआईएस एप्लीकेशन और पॉस सिस्टम बैकअप संबंधी कार्य नहीं होने के बावजूद वर्ष 2023 से मार्च 2026 तक की अवधि के लिए 2 करोड़ 45 लाख 36 हजार 834 रुपए की कटौती नहीं की गई।

उपकरण आपूर्ति व रखरखाव में भी गड़बड़ी

  • प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के लिए आवश्यक मानव संसाधनों की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव संबंधी शर्तों की पालना नहीं हुई। चयनित फर्मों ने निगम को संबंधित कार्मिकों के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
  • जिलों में मशीनों का स्टॉक रखने तथा प्रतिवर्ष अधिकतम 8 हजार दोषपूर्ण मशीनों के प्रतिस्थापन जैसी शर्तों का पालन नहीं किया। 2500 स्कैनरों की आपूर्ति, संस्थापन और एकीकरण का प्रमाण लिए बिना भुगतान कर दिया गया।
  • ई-वेइंग स्केल और आईरिस स्कैनर परियोजना की निविदा प्रक्रिया में भी अनियमितता हुई है। तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय स्वीकृति स्तर पर त्रुटियां हुईं तथा एक फर्म को एमएसएमई नहीं होने के बावजूद प्रदर्शन सुरक्षा राशि में अनुचित लाभ दिया गया।
  • अनुबंध शर्तों के अनुसार दुकानों पर ई-वेइंग स्केल और आईरिस स्कैनर का पॉस मशीन से एकीकरण होने के बाद ही 30 प्रतिशत भुगतान किया जाना था, लेकिन यह कार्य पूरा हुए बिना 18 करोड़ 84 लाख 8 हजार 259 रुपए का भुगतान कर दिया गया। {हेल्पडेस्क रिपोर्ट प्राप्त किए बिना 1 करोड़ 54 लाख 49 हजार 400 रुपए का भुगतान किया गया।

195 करोड़ का कार्यादेश, 156 करोड़ दिए

  • दोनों कंपनियों को फरवरी 2021 में 26,737 पॉस मशीनों के रखरखाव, प्रतिस्थापन, सॉफ्टवेयर संचालन और मानव संसाधन उपलब्ध कराने का 132.77 करोड़ रुपए का कार्यादेश दिया गया था। ई-वेइंग स्केल और आईरिस स्कैनर परियोजना के लिए 62.80 करोड़ रुपए का कार्यादेश दिया गया।
  • दोनों कंपनियों को 195 करोड़ रु. के कार्यादेश जारी हुए, 156 करोड़ रु. का भुगतान किया। लगभग 119 करोड़ रुपए के भुगतान पर सवाल उठाए हैं।

आईएएस अधिकारी 1. अभय कुमार तत्कालीन चेयरमैन 2. भास्कर आत्माराम सावंत तत्कालीन चेयरमैन 3. सुबीर कुमार तत्कालीन चेयरमैन 4. भवानी सिंह देथा तत्कालीन चेयरमैन 5. ए.टी. पेडनेकर तत्कालीन चेयरमैन 6. वी.पी. सिंह तत्कालीन एमडी 7. राजेंद्र वर्मा तत्कालीन एमडी/अधिकारी

अन्य अधिकारी-कर्मचारी 8. राजेंद्र विजय तत्कालीन एमडी/अधिकारी 9. पी.सी. जैन तत्कालीन महाप्रबंधक (वित्त) 10. परमेश्वर लाल पदनाम रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं 11. श्रीराम बिजारनिया — मैनेजर (वित्त) 12. रविंदर जैन सेवानिवृत्त तत्कालीन एसीपी 13. अंकुर सिंघल प्रोग्रामर 14. बिरजू कोली प्रोग्रामर 15. जितेंद्र वर्मा कनिष्ठ लेखाकार 16. भूपराज जाटव विधिक माप विज्ञान अधिकारी 17. दीपक जैन तत्कालीन विधिक माप अधिकारी 18. जितेंद्र जैन सहायक लेखा अधिकारी 19/ पदम सिंह तत्कालीन मैनेजर (वित्त)

मंत्री के आदेश भी धरे रह गए 18 मई 2026 को मंत्री सुमित गोदारा ने नोटशीट पर स्पष्ट आदेश दिए-

  • सेवा प्रदाताओं को आगे भुगतान ना किया जाए, अनियमित भुगतान की वसूली जाए, वेंडर्स के खिलाफ आरटीपीपी अधिनियम के तहत कार्रवाई हो। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की विभागीय जांच हो।
  • 19 मई को फाइल विभागीय सचिव के पास पहुंची। 10 जून को टिप्पणी सहित लौटी। जुलाई अंत तक पत्रावली चर्चा के लिए घूमती रही। 31 जुलाई को नए सचिव ने ‘डिस्कस’ की टिप्पणी दर्ज कर दी।

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