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- Sahara Even Misled The Supreme Court By Claiming 88 Properties Were Cleared, While 75% Were Under Litigation.
रायपुर32 मिनट पहलेलेखक: प्रशांत गुप्ता
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सहारा इंडिया ग्रुप को अभी भी 1.04 करोड़ निवेशकों के 89,000 करोड़ रु. लौटाने हैं। इतनी भारी-भरकम राशि सहारा अपनी संपत्तियां बेचकर ही जुटा जा सकता है।
भास्कर के 25 दिनों से जारी इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि सहारा ने सुप्रीम कोर्ट में अक्टूबर 2025 में जिन 88 संपत्तियों को बेचने संबंधित सूची सौंपी, इनका बाजार मूल्य 1 लाख करोड़ आंका गया है।
ये संपत्तियां 227 शहरों में हैं। इनमें फ्लैट, अपार्टमेंट, मॉल, सहारा शहर, शॉपिंग सेंटर, प्रिंटिंग प्रेस, होटल से लेकर सालों से खाली पड़ी जमीन तक शामिल हैं। लेकिन असल में इनमें से 75% संपत्तियों में कुछ न कुछ विवाद है।
जैसे- टाइटल, रेरा, उपभोक्ता फोरम, सिविल सूट, ईडी अटैचमेंट, ईपीएफओ और मालिकाना हक को लेकर विवाद है। मनी लांड्रिंग कानून के तहत भी अटैच हैं। 20 से अधिक संपत्तियां बिक चुकी हैं, लेकिन सूची में हैं। रायपुर की भी 127 एकड़ जमीन बेची जा चुकी है।
इन्वेस्टिगेशन में यह सामने आया कि बावजूद इसके सहारा ने कोर्ट के समक्ष इन संपत्तियों की सूची रखी। इससे स्पष्ट है कि सहारा कोर्ट को गुमराह कर रहा है। इतना ही नहीं इसमें कई प्रोजेक्ट जैसे कि सहारा शहर लीज पर है, वह भी इस सूची में है।
यूपी सरकार ने लीज खत्म होने के बाद इसे अपने कब्जे में ले लिया। अब बड़ा सवाल यह है कि निवेशकों को मेहनत का पैसा मिलेगा (रिफंड) या वे कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पिसते रहेंगे।
सहारा ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में रखी संपत्तियों की सूची, कहा- इन्हें बेचकर चुकाएंगे निवेशकों का पैसा।
लेकिन इनमें शामिल एम्बी वैली, सहारा शहर, होटल, मॉल और प्रिंटिंग प्रेस जैसे बड़े प्रोजेक्ट में कई आपत्तियां।
न्याय में देरी, देशभर में सहारा के खिलाफ तेज हुए प्रदर्शन
7 अगस्त को सहारा पीड़ित निवेशकों का गुस्सा सड़क पर दिखा, जहां सुप्रीम कोर्ट के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। मांग है कि जल्द सहारा की संपत्तियां बेचकर पैसा लौटाया जाए। न्याय सुप्रीम कोर्ट से मिलना है, मगर देरी हो रही है। 9 अगस्त को विश्व भारती जनसेवा संस्था ने रांची में सत्याग्रह आंदोलन करने का ऐलान किया है।
महत्वपूर्ण तारीखें
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमित्र शेखर नाफड़े कर रहे मध्यक्षता- इन संपत्तियों के सत्यापन के लिए न्यायमित्र के तौर पर वरिष्ठ वकील शेखर नाफड़े की नियुक्ति की है। इनके माध्यम से ही संपत्तियों की सूची कोर्ट में रखी गई।
14 अक्टूबर 2025- सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता शेखर नाफड़े (एमिकस क्यूरी) को निर्देश दिया था कि 88 संपत्तियों का चार्ट तैयार करें और उन्हें तीन श्रेणियों में बांटें-
1. जिन पर कोई विवाद नहीं। 2. जिन पर अधिकार स्पष्ट/स्थापित हो चुके हों। 3. जिन पर स्वामित्व या अधिकार को लेकर संदेह या विवाद है।
लोकसभा में केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि सहारा-सेबी रिफंड खाते से 10,000 करोड़ सेंट्रल रजिस्ट्रार को हस्तांतरित किए थे। जुलाई में 9,265 करोड़ रु. 4 सहकारी समितियों के 41.5 लाख पात्र जमाकर्ताओं को वापस किए गए हैं।

कई संपत्तियां कानूनी विवादों में फंसी, केंद्रीय मंत्री ने बताया; 41.5 लाख निवेशकों के पैसे लौटाए गए
17 नवंबर 2025 को अधिवक्ता शेखर नाफड़े की ओर से सहारा की याचिका पर‘रिस्पांस/कमेंट्स’ दाखिल किए। 65 पेज की विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। इसके अनुसार भास्कर ने दस्तावेजों के जरिए, जानकारी जुटाई, इसका निष्कर्ष इस प्रकार है।
63 संपत्ति आईटी अटैचमेंट, गिरवी (मोर्टगेज) या कानूनी विवादों में फंसी : बिक्री में कानूनी अड़चन आएगी।
20 संपत्तियों पर मुकदमे: स्वामित्व या अधिकार विवादित है, उनकी बिक्री कठिन हो सकती है।
30 संपत्तियों के टाइटल विवाद: खरीददार को मुश्किल में फंस सकते हैं। यदि टाइटल क्लियर नहीं है तो ड्यू डिलिजेंस अधूरी मानी जाती है। अडानी ग्रुप के साथ डील पूरी न होने की एक बड़ी वजह टाइटल विवाद ही है।
संपत्तियों पर तीसरे पक्ष के दावे: कोई भी दावा सही होने पर बिक्री प्रभावित होगी, खरीदार को मुकदमे झेलने पड़ सकते हैं।
अब तक जो संपत्तियां बेची गईं अजमेर- 26.24 करोड़। बदाऊं- 4.54 करोड़। उज्जैन- 21.41 करोड़। त्रिची- 17.90 करोड़। अनंतपुर- 56.28 करोड़। पोरबंदर- 20.23 करोड़। मदुरै- 39.18 करोड़। तिरूनलवेली- 29.24 करोड़। सलेम- 18.72 करोड़ रुपए। चेन्नई- 145.21 करोड़। इसके साथ ही सहारा ने सुप्रीम कोर्ट में जो दस्तावेज जमा किए हैं, उनमें 71 और संपत्तियों का जिक्र है। उनकी सूची है। इन संपत्तियों की कीमत 3268 करोड़ रुपए आंकी गई है। (आरटीआई में मिले दस्तावेजों के अनुसार)
शेखर नाफड़े ने कुछ संपत्तियों की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी है। मगर, मैं इसकी डिटेल नहीं दे सकता। -गौतम अवस्थी, वकील, सहारा ग्रुप की ओर से सारी जानकारी, सारे रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष रख दिए गए हैं। इसे कोर्ट देखेगी। अभी सबकुछ पेंडिंग है। निर्णय में कितना वक्त लगेगा, मैं नहीं बता सकता। -शेखर नाफड़े, न्यायमित्र (सुप्रीम कोर्ट द्वारा सहारा मामले में नियुक्त) वरिष्ठ वकील, सुप्रीम कोर्ट
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