आयुष्मान कार्डधारक मरीजों के इलाज में लापरवाही, नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितता करने पर यूपी के 866 अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। ये कार्रवाई पिछले 6 वर्षों के दौरान की गई। इसमें 648 अस्पतालों को सूची से बाहर कर दिया गया है। वहीं 61 अस्पतालों
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डेटा एनालिटिक्स से पकड़ी जा रही गड़बड़ी
अस्पतालों की निगरानी के लिए स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रही है। इसी के जरिए आयुष्मान मरीजों के इलाज में संदिग्ध पैटर्न को चिन्हित किया जा रहा है।
जांच में खास तौर पर ऐसे मामले पकड़े जा रहे हैं, जिनमें–
- एक ही मरीज को बार-बार भर्ती दिखाया गया।
- एक ही मरीज की बार-बार एक जैसी रिपोर्ट भेजी गई।
- ओपीडी में आए मरीज को आईपीडी यानी भर्ती मरीज के तौर पर दर्ज किया गया।
- इलाज के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया।
- आयुष्मान योजना के नियमों का उल्लंघन किया गया।
इस वित्तीय वर्ष में 318 अस्पताल रडार पर आए
स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 318 अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 242 अस्पतालों को भारत सरकार के 35 मापदंड पूरा नहीं करने पर सूची से बाहर किया गया।
वहीं, 61 अस्पतालों को निलंबित किया गया है। 15 अस्पतालों की संबंधित स्पेशियलिटी को सूची से बाहर किया गया है। इससे पहले वर्ष 2025 में 16 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई थी। इनमें 14 अस्पतालों को सूची से बाहर और दो अस्पतालों की स्पेशियलिटी से हटाया गया।
2020 से अब तक हर साल हुई कार्रवाई
- 2020: 77 अस्पताल
- 2021: 44 अस्पताल
- 2022: 41 अस्पताल
- 2023: 203 अस्पताल
- 2024: 27 अस्पताल
- 2025: 16 अस्पताल
- 2026: 318 अस्पताल
दो साल में ₹8.53 करोड़ की पेनाल्टी
अस्पतालों पर सिर्फ आयुष्मान सूची से बाहर करने की कार्रवाई ही नहीं की गई, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 अस्पतालों पर कुल 3 करोड़ 45 लाख 66 हजार 861 रुपए की पेनाल्टी लगाई गई। इसमें से 3 करोड़ 19 लाख 27 हजार 958 रुपए की वसूली हो चुकी है। शेष राशि की रिकवरी की जा रही है।
वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 80 अस्पतालों पर 5 करोड़ 7 लाख 59 हजार 491 रुपए की पेनाल्टी लगाई गई। इनमें से 1 करोड़ 17 लाख 72 हजार 883 रुपए की वसूली हो चुकी है। अभी 3 करोड़ 89 लाख 86 हजार 608 रुपए की रिकवरी बाकी है।
पेनाल्टी के बाद भी नहीं सुधरे तो सस्पेंशन
अधिकारियों के मुताबिक अस्पतालों को नियमों और निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है। पेनाल्टी लगाने के बाद भी यदि अस्पताल मानकों को पूरा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में अस्पताल को आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर भी किया जा सकता है।
सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज कराने वाले मरीजों को योजना के तहत निर्धारित सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले और अस्पताल योजना का गलत इस्तेमाल न कर सकें।