अमेरिकी सैनिकों का होगा… ईरान जंग के बीच पेंटागन ने लिया ये चौंकाने वाला फैसला, मचा हड़कंप
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Written By:
अमन उपाध्याय
Updated On: Jul 19, 2026 | 08:10 AM IST
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सार
Pentagon On US Soldiers: पेंटागन ने अमेरिकी सैनिकों के लिए सालाना टेस्टोस्टेरोन जांच अनिवार्य कर दी है। जहां सरकार इसे युद्ध की तैयारी बता रही है, वहीं डॉक्टर बांझपन के खतरे को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अमेरिकी सैनिकों का होगा टेस्टोस्टेरोन टेस्ट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
विस्तार
Pentagon US Soldiers Testosterone Test: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने अपनी सेना के लिए एक ऐसा फरमान जारी किया है जिसने चिकित्सा जगत और रक्षा विशेषज्ञों के बीच नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने आदेश दिया है कि 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी एक्टिव-ड्यूटी और रिजर्व सैनिकों के लिए अब हर साल टेस्टोस्टेरोन के स्तर की जांच कराना अनिवार्य होगा।
युद्ध की तैयारी या स्वास्थ्य से समझौता?
रक्षा मंत्री हेगसेथ का तर्क है कि इस नई स्क्रीनिंग पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य सेना की युद्धक क्षमता और सैनिकों की शारीरिक सहनशक्ति को बढ़ाना है। उनके अनुसार, सैनिकों में हार्मोन का सही स्तर पक्का करने से न केवल उनके प्रदर्शन में सुधार होगा, बल्कि उनकी लंबी उम्र और काम करने की क्षमता भी बेहतर होगी।
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सरकार का मानना है कि यह कदम ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’ जैसी समस्याओं से निपटने में मददगार साबित होगा, जो अक्सर डेल्टा फोर्स और नेवी सील्स जैसे विशेष बलों के जवानों को प्रभावित करता है।
क्या है ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’?
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेटर सिंड्रोम एक जटिल स्थिति है जिसमें सैनिकों को कम टेस्टोस्टेरोन के साथ-साथ हार्मोनल गड़बड़ी, नींद की समस्या, मेटाबॉलिज्म में खराबी और मस्तिष्क की चोट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से वे जवान जो लगातार धमाकों, रॉकेट फायरिंग और कठिन युद्ध अभियानों के संपर्क में रहते हैं, उनमें ये लक्षण अधिक देखे जाते हैं।
डॉक्टरों ने बजाई खतरे की घंटी
हालांकि, पेंटागन के इस फैसले से चिकित्सा विशेषज्ञ हैरान हैं। रॉयटर्स द्वारा संपर्क किए गए छह विशेषज्ञों में से पांच ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट लक्षण के टेस्टोस्टेरोन का इलाज या सप्लीमेंट देना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गलत तरीके से दी गई हार्मोन थेरेपी से सैनिकों में बांझपन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉ. केविन मैकवेरी और अन्य यूरोलॉजिस्ट्स का मानना है कि इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं हैं कि सभी सैनिकों की सामूहिक स्क्रीनिंग करने से अमेरिकी सेना की युद्ध क्षमता में कोई बड़ा सुधार होगा।
अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट केवल उन्हीं मरीजों को दिए जाने चाहिए जिनमें थकान, मांसपेशियों में कमी और हड्डियों की कमजोरी जैसे स्पष्ट लक्षण हों।
ट्रंप प्रशासन के नए नीतिगत बदलाव
यह फैसला ट्रंप प्रशासन के तहत लागू की जा रही उन स्वास्थ्य नीतियों का हिस्सा है, जिन्हें वैज्ञानिक आधार पर कम और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर ज्यादा आधारित माना जा रहा है। इसी क्रम में हेगसेथ ने सैनिकों के लिए लंबे समय से अनिवार्य ‘फ्लू वैक्सीन’ के नियम को भी रद्द कर दिया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं के बजाय नींद, सही खान-पान और आराम से भी टेस्टोस्टेरोन का स्तर सुधारा जा सकता है, जिसके लिए दवाएं लेना अनिवार्य करना जल्दबाजी हो सकती है।
