पुणे मनपा में कचरा टेंडर पर घमासान: विपक्ष का तंज, विभाग का नाम बदलकर ‘भूमिग्रीन कचरा विभाग’ करने का प्रस्ताव| Navbharat Live

Published on 18 जुल॰ 2026

पुणे मनपा में कचरा टेंडर पर घमासान: विपक्ष का तंज, विभाग का नाम बदलकर ‘भूमिग्रीन कचरा विभाग’ करने का प्रस्ताव

  • Written By:

    रूपम सिंह

Updated On: Jul 18, 2026 | 08:48 AM IST

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सार

Pune Waste Tender: पुणे मनपा में कचरा टेंडर फिक्सिंग के आरोपों पर विपक्ष ने स्थायी समिति में विभाग का नाम 'भूमिग्रीन' करने का व्यंग्यात्मक प्रस्ताव रख प्रशासन को घेरा।

Opposition in Pune PMC moves a satirical proposal to rename the solid waste department after a private firm, alleging a multi-crore tender fixing scam.

पुणे कचरा टेंडर (सोर्स- सोशल मीडिया)

विस्तार

Pune Solid Waste Management Tender: पुणे मनपा में कचरा प्रसंस्करण परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब बेहद दिलचस्प और आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी द्वारा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद, अब प्रशासन को घेरने के लिए मनपा की स्थायी समिति में एक बेहद व्यंग्यात्मक प्रस्ताव पेश किया गया है। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि महानगरपालिका के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग का नाम बदलकर सीधे पुणे मनपा भूमिग्रीन ठोस कचरा व्यवस्थापन विभाग रख दिया जाए।

अधिकारियों पर जमकर बरसे विपक्षी दल

स्थायी समिति में पेश प्रस्ताव में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा तंज कसा गया है। प्रस्तावक सदस्यों का आरोप है कि ठोस कचरा प्रबंधन विभाग के इंजीनियर, उपायुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, सतर्कता विभाग (विजिलेंस) से लेकर सीधे कमिश्नर कार्यालय तक के अधिकारी केवल एक ही कंपनी के हितों की रक्षा में जुटे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन ने ‘भूमि ग्रीन के लिए कुछ भी’ को अपना आधिकारिक ध्येय वाक्य (मोटो) बना लिया है।

आज विभाग और यह चुनिंदा निजी कंपनी एक ही सिक्के के दो पहलू बन चुके हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि करोड़ों-अरबों रुपये के टेंडर इसी विशेष कंपनी की झोली में डालने के लिए नियमों को ताक पर रखा जा रहा है, जिससे विभाग की निष्पक्षता पूरी तरह संदेह के घेरे में आ गई है। व्यंग्यात्मक लहजे में कहा गया कि अधिकारियों में ‘भूमि ग्रीन’ नाम सुनते ही जो उत्साह देखने को मिलता है, उसे देखते हुए पुणे की जनता के लिए इस रिश्ते को हमेशा के लिए ‘आधिकारिक’ कर देना चाहिए।

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…तो सड़क पर उतर करेंगे जन आंदोलन

यह अनोखा प्रस्ताव स्थायी समिति के सदस्य रफिक अब्दुल रहीम शेख द्वारा सूचक के रूप में रखा गया है, जिसका अनुमोदन दीपाली डोख ने किया। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद मनपा के गलियारों में अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है। विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस संदेहास्पद टेंडर प्रक्रिया को तत्काल रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी टेंडर जारी नहीं किए गए, तो इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरकर जन-आंदोलन किया जाएगा। स्थायी समिति का यह व्यंग्यात्मक प्रस्ताव अब मनपा की राजनीति में प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन चुका है।

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टेंडर प्रक्रिया में फिक्सिंग : निकम

पुणे मनपा में विपक्ष के नेता एड.निलेश निकम ने पूरे मामले का कच्चा चिट्टा खोला है। निकम का सीधा आरोप है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया को इस तरह से ‘टेलर-मेड’ (शर्तों में हेरफेर) किया गया है ताकि प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाए और केवल ‘भूमिग्रीन’ कंपनी ही इसके लिए पात्र साबित हो सके।

निकम ने टेंडर फिक्सिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि दूसरी कंपनी एंटोनी लारा को केवल तकनीकी औपचारिकता पूरी करने और दिखावे की प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए शामिल किया गया है। असल खेल तो भूमिग्रीन को ऊंची दरों पर ठेका देकर मनपा के खजाने को चूना लगाने है।

बड़ी सोसाइटियों पर चुप्पी क्यों ?

विपक्ष के नेता ने प्रशासन से जवाब मांगा है कि जो पुराने प्रकल्प अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं, उनके ठेकेदारों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई? कितनी पेनाल्टी वसूली गई? इसके साथ ही, 75 से अधिक फ्लैटों वाली बड़ी आवासीय सोसाइटियों पर, जिन्हें प्रॉपर्टी टैक्स में छूट मिलने के बावजूद खुद कचरा प्रोसेस करना अनिवार्य है, प्रशासन मेहरबान क्यों है? उनका कचरा नियमों के खिलाफ जाकर मनपा के रैंप तक कौन ला रहा है?

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