सरदार सरोवर: ₹7669 करोड़ के दावे पर सवाल: बड़वानी में मेधा पाटकर बोलीं- तीनों राज्यों से हुए समझौते पर स्पष्टीकरण दे सरकार - Barwani News

Published on 11 जुल॰ 2026

सरदार सरोवर परियोजना से संबंधित अंतरराज्यीय विवाद में केंद्र की मध्यस्थता से हुए समझौते पर सवाल उठ रहे हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के डूब क्षेत्र की 7,669 करोड़ रुपये की वैध भरपाई और पुनर

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विवाद में मध्य प्रदेश में जलमग्न हुई वन भूमि, शासकीय भूमि और अन्य सार्वजनिक संसाधनों की भरपाई का मुद्दा शामिल है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र लगातार गुजरात से कानूनी रूप से अपेक्षित वित्तीय सहायता की मांग कर रहे थे। केंद्रीय गृहमंत्री और जल संसाधन मंत्री की मध्यस्थता से हुए समझौते को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

मेधा पाटकर ने कहा कि समझौते का अधिकृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं है, लेकिन प्रचारित हुई खबरों में विरोधाभास भी हैं। उन्होंने परिप्रेक्ष्य को जानने और स्पष्टता की मांग की। साथ ही, यह भी अपेक्षित है कि राज्य शासन और विस्थापितों के अधिकार सुरक्षित रहें।

पढ़िए, कब-कब क्या हुआ

वर्ष 2000 में जब सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 90 मीटर तक सीमित थी, तब मध्य प्रदेश सरकार ने परियोजना से होने वाली क्षति के लिए 281.46 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी। इस राशि में वन क्षेत्र के लिए 112.51 करोड़ रुपये, सरकारी भूमि के लिए 157.61 करोड़ रुपये और जलमग्न वन भूमि के लिए 11.34 करोड़ रुपये शामिल थे।

इसके बाद बांध की ऊंचाई बढ़ाकर 110 मीटर और फिर 121.92 मीटर की गई। वर्ष 2014 से बांध की ऊंचाई में और वृद्धि की गई और 2017 में इसे 138.68 मीटर कर दिया गया। बांध की ऊंचाई बढ़ने के साथ ही मध्य प्रदेश में डूब क्षेत्र का विस्तार होता गया, जिससे बड़ी मात्रा में वन भूमि, सरकारी भूमि, कृषि क्षेत्र और अन्य प्राकृतिक संसाधन जलमग्न हुए।

पाटकर ने बताया कि इससे राज्य को होने वाली क्षति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई। विस्थापित गांवों की संख्या 2019 से 192 और एक नगर साबित हुई। 2023 में पुनरीक्षित बैकवॉटर स्तरों के आधार पर हजारों परिवारों को 'पुनर्वास के लिए अपात्र' घोषित कर दिया गया, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ गई। इसी वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने जलमग्न भूमि और अन्य प्रभावित परिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन कराया। 2019-2020 के आधार पर तैयार इस पुनर्मूल्यांकन के अनुसार, राज्य ने अपने डूब क्षेत्र की भरपाई के दावे को बढ़ाकर 7,669 करोड़ रुपये कर दिया। यह दावा बढ़े हुए डूब क्षेत्र और वर्तमान मूल्य के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तैयार किया गया था।