झज्जर जिले के गांव कलोई में स्थापित अटल लाइब्रेरी ग्रामीण युवाओं के सपनों को नई दिशा दे रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पहले युवाओं को करीब 7 किलोमीटर दूर झज्जर या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता था। अब गांव में ही पुस्तकें, अध्ययन सामग्री
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करीब 2,666 की आबादी वाले कलोई गांव की साक्षरता दर 82.95 प्रतिशत है। गांव में प्रतिभाओं और मेहनत की कमी नहीं थी, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयुक्त संसाधन और शांत अध्ययन स्थल उपलब्ध नहीं था। शहर जाने में समय और आर्थिक खर्च के साथ कई अन्य परेशानियां भी युवाओं के सामने रहती थीं।
बेटियों को सुरक्षित अध्ययन का माहौल मिला
अटल लाइब्रेरी शुरू होने से गांव की बेटियों को भी पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिला है। दूर शहरों में जाकर तैयारी करना कई परिवारों के लिए सहज नहीं था। अब गांव में ही अध्ययन सुविधा उपलब्ध होने से बेटियां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान दे पा रही हैं।

ग्रामीण युवाओं को घर के नजदीक अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश की ग्राम पंचायतों में अटल ई-लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं।
2025 में सामुदायिक केंद्र के साथ बनाया भवन
विकास एवं पंचायत विभाग, हरियाणा सरकार के अंतर्गत वर्ष 2025 में गांव के सामुदायिक केंद्र के साथ निर्मित भवन में अटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें और अध्ययन सामग्री, फर्नीचर व बैठने की व्यवस्था के साथ वातानुकूलित अध्ययन कक्ष की सुविधा उपलब्ध है।
ग्रामीणों की भागीदारी से हो रहा संचालन
लाइब्रेरी के संचालन और व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए प्रबंधन समिति बनाई गई है। इसमें सरपंच, ग्राम सचिव, स्थानीय शिक्षाविदों और युवा प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इससे लाइब्रेरी के रखरखाव और विद्यार्थियों से जुड़ी गतिविधियों में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित हो रही है।

22 जिलों में 996 अटल पुस्तकालय स्थापित
हरियाणा सरकार की योजना के तहत ग्रामीण युवाओं को घर के नजदीक अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश की ग्राम पंचायतों में अटल ई-लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। अब तक 22 जिलों में 996 अटल पुस्तकालय स्थापित किए जा चुके हैं।
गांव से ही सफलता की तैयारी
कलोई की अटल लाइब्रेरी युवाओं के लिए महज किताबें पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी का केंद्र बन रही है। अब प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए शहर जाने के बजाय युवा गांव में ही बैठकर अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह सुविधा गांव के बच्चों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर देगी।