आवासीय सुविधा नहीं मिल रही: 7 छात्रावास तैयार, 400 छात्रों का हक और अधिकार पर लटके हैं ताले - Sitamarhi News

Published on 16 अक्टू॰ 2026

सरकारी राशि खर्च हुई, भवन बनकर तैयार हुए और हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पूरी हो गई। इसके बावजूद जिन विद्यार्थियों को इन छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करनी थी, उन्हें अब तक आवासीय सुविधा नहीं मिल सकी है। जिले में प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत निर्

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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की सूची में इन छात्रावासों का निर्माण पूरा होने और हस्तांतरण किए जाने का विवरण दर्ज है। इसके बाद भी भवनों का विद्यार्थियों के हित में इस्तेमाल नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सातों छात्रावासों में कुल 400 विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। इनमें बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग आवासीय व्यवस्था की गई है। योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना और उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद करना था। लेकिन, संचालन शुरू नहीं होने से योजना का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन बनकर तैयार हैं और हस्तांतरण भी हो चुका है, तो फिर छात्रावासों में विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था शुरू करने में देरी क्यों हो रही है। बाजपट्टी के श्री रघुनाथ प्रसाद नोपानी उच्च माध्यमिक विद्यालय और पुपरी के प्रोजेक्ट हाई स्कूल में 50-50 शैय्या वाले बालिका छात्रावास बनाए गए हैं। परसौनी के जनता हाई स्कूल और बेलसंड के श्री गुरु शरण हाई स्कूल में 50-50 शैय्या वाले बालक छात्रावास है। चोरौत के बड़ी बेहटा हाई स्कूल में 100 शैय्या वाला बालक छात्रावास बनाया गया है। सुरसंड के शाही हाई स्कूल में 100 शैय्या वाला बालिका छात्रावास और सरयुग हाई स्कूल में 100 शैय्या वाला बालक छात्रावास निर्मित है। इस तरह जिले में सात छात्रावासों के जरिए 400 विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की क्षमता तैयार की गई है। छात्रावासों का निर्माण पूरा होने के बाद इन्हें शिक्षा विभाग को सौंपे जाने की जानकारी दी गई है।

संचालन शुरू करने की समयसीमा तय की जाए सात छात्रावासों का संचालन शुरू नहीं होना शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन के उदासीनता को दर्शाता है। स्थानीय जिला निवासी कौशलेन्द्र कुमार,दीपक कुमार, सौरव कुमार,रमेश चंद्र कुंवर,रमन प्रताप, कौशल चतुर्वेदी,विक्की कुमार आदि कहते है संचालन की प्रक्रिया कहां लंबित है और विद्यार्थियों को सुविधा देने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही, सभी छात्रावासों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा कर संचालन शुरू करने की समयसीमा तय की जानी चाहिए। सरकारी योजनाओं की सफलता भवन बनाने और उन्हें हस्तांतरित करने तक सीमित नहीं हो सकती। असली सफलता तब होगी, जब जरूरतमंद विद्यार्थी इन छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर सकेंगे। फिलहाल, सातों छात्रावासों का संचालन शुरू होने का इंतजार है।

2015-17 के दौरान एमएसडीपी के तहत इन छात्रावासों का निर्माण कराया गया था। विभागीय नियंत्रण से संबंधित नीतिगत निर्णय के कारण इनके संचालन की प्रक्रिया लंबित है। इस संबंध में संबंधित विभाग से बातचीत की जा रही है, ताकि छात्रावासों का संचालन शुरू करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा सके। - तनय सुल्तानिया, डीएम, सीतामढ़ी