
इजराइल के राजदूत रूवेन अजारImage Credit source: ANI
भारत में इजराइल के राजदूत रूवेन अजार ने 7 अक्टूबर 2023 की घटना को खुफिया और एक बड़ी ऑपरेशनल विफलता करार दिया है. उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटना को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं. दरअसल, तीन साल पहले फिलिस्तीन के हमास समूह द्वारा गाजा में किए गए उस घातक हमले में लगभग 1,200 इजराइली नागरिक मारे गए थे और लगभग 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था. रूवेन अजार ने कहा कि इस घटना से इजराइल ने महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 1967 से पहले की सीमाओं का प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं है.
न्यूज9 से बातचीत में रूवेन अजार ने कहा कि हम ऐसी स्थिति को कैसे स्वीकार कर सकते हैं, जिसमें हमें मिटाने की चाह रखने वाले लोग हमारे बगल में रहें और हमें फिर से मिटाने की क्षमता विकसित करें? हमने बातचीत के ज़रिए दो-राज्य समाधान तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन हम असफल रहे, भले ही हमने बहुत उदार प्रस्ताव रखे थे, क्योंकि फिलिस्तीनी एक यहूदी राज्य को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे. फिर हम गाजा पट्टी से एक-एक व्यक्ति को हटाकर यहां तक कि कब्रों को भी खोदकर वापस चले गए और उन्होंने इसका इस्तेमाल इजराइल पर फिर से हमला करने के लिए एक मंच के रूप में किया.
उन्होंने आगे कहा कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद जब हमने उन खून के प्यासे आतंकवादियों को देखा, जिन्हें हमारे साथ रहने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, बल्कि वो हमें सबसे क्रूर तरीके से मारना चाहते थे, तो इस समय हम किसी भी फिलिस्तीनी नेतृत्व पर कैसे भरोसा कर सकते हैं?
‘खुफिया और ऑपरेशनल विफलता थी घटना’
रूवेन अजार ने कहा, ‘हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह एक बड़ी खुफिया और परिचालन विफलता थी और हमने इसे सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए, चाहे वह हमारी खुफिया कार्यप्रणाली हो या हमारी सीमाओं की रक्षा करने का तरीका, लेकिन इससे भी बढ़कर मुझे लगता है कि इजराइल ने यह सीखा है कि हम अपनी सीमा के दूसरी ओर इस तरह के मजबूत आतंकवादी ढांचे को विकसित होने नहीं दे सकते’.
उन्होंने आगे कहा, ‘7 अक्टूबर की घटना के तीन साल बाद भी हम गाजा पट्टी, दक्षिणी लेबनान और सीरिया में बफर जोन बनाए हुए हैं. हमारा इरादा इसे हमेशा के लिए बनाए रखने का नहीं है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके बाद जो भी राजनीतिक व्यवस्था बने, उसमें आतंकवादियों को ऐसी क्षमताएं हासिल करने की अनुमति न दी जाए, जिससे वो इतने बड़े पैमाने पर जघन्य हत्या, अंग-भंग, यातना और बलात्कार का अभियान चला सकें’.
इजराइल के साथ व्यापार क्यों नहीं कर रहा ईरान?
जब उनसे पूछा गया कि ईरान सऊदी अरब और यूएई की तरह व्यवहार क्यों नहीं कर पा रहा है और इजराइल के साथ सामान्य रूप से व्यापार क्यों नहीं कर पा रहा है, तो उन्होंने कहा कि ईरानी शासन के साथ हमारा अस्तित्व संघर्ष चल रहा है. वो यहूदी राष्ट्र के आत्मनिर्णय के अधिकार को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और सैन्य साधनों, सोशल मीडिया अभियानों और धर्म की चरमपंथी व्याख्याओं के प्रचार के माध्यम से इसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. यह क्षेत्र में अस्थिरता को लगातार बढ़ा रहा है. इस शासन और क्षेत्र की अन्य सरकारों के बीच संघर्ष में हमें एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है.
भारत-इजराइल मुक्त व्यापार समझौते पर क्या बोले?
रूवेन अजार ने मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा, ‘उम्मीद है कि हमारा मुक्त व्यापार समझौता भी हो जाएगा. नवंबर और दिसंबर में प्रतिनिधिमंडल आने वाले हैं. हमारा साइबर सहयोग प्रगति कर रहा है. हमारे साइबर प्राधिकरण के प्रमुख और हमारे इनोवेशन प्राधिकरण के प्रमुख इजराइल और भारत के बीच संयुक्त उद्यमों के लिए तकनीकी अनुदान के एक नए बैच को मंजूरी देने आ रहे हैं’.
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सोनू शर्मा
TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. यहां न्यूज डेस्क पर काम करते हैं. इससे पहले ट्रेंडिंग टीम में थे. न्यूज चैनल और डिजिटल मीडिया में 10 साल से अधिक का अनुभव है. पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता स्थित NSHM कॉलेज से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. उसके बाद IBN7 (अब न्यूज18 इंडिया) में इंटर्नशिप की. फिर बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर सुदर्शन न्यूज चैनल से जुड़े. यहां स्पोर्ट्स टीम के साथ काम किया. फिर बिहार के पटना स्थित आर्यन न्यूज (बतौर प्रोड्यूसर), दिल्ली स्थित नेड्रिक न्यूज (बतौर सब एडिटर) और अमर उजाला जैसे संस्थानों में काम किया. अमर उजाला डिजिटल में बतौर सब एडिटर नेशनल और इंटरनेशनल बीट के साथ-साथ ट्रेंडिंग, ऑड, स्पोर्ट्स, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट पर काम किया. यहां शिफ्ट हेड की भूमिका भी निभाई. उसके बाद TV9 भारतवर्ष से जुड़े. ट्रेंडिंग के साथ-साथ ऑड न्यूज, हेल्थ, साइंस और रिसर्च में बेहतरीन पकड़ है. किताबें पढ़ने का शौक है.
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